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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अनधिकृत कीटनाशकों की बिक्री, क्रॉपलाइफ इंडिया ने सख्त नियमों की मांग की

सरकार-उद्योग के संयुक्त ढांचे से सख्त निगरानी और जवाबदेही की मांग

28 जनवरी 2026, नई दिल्ली: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अनधिकृत कीटनाशकों की बिक्री, क्रॉपलाइफ इंडिया ने सख्त नियमों की मांग की – फसल सुरक्षा उत्पादों की अग्रणी संस्था क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India) ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनधिकृत और गैर-पंजीकृत कीटनाशकों की बिक्री पर गंभीर चिंता जताई है। संस्था ने कहा है कि ऑनलाइन माध्यम से कीटनाशकों की बढ़ती बिक्री को देखते हुए नियामकीय निगरानी, प्रवर्तन व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को तत्काल मजबूत करने की आवश्यकता है।

यह मुद्दा पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित क्रॉपलाइफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन – “ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री” के दौरान प्रमुखता से उठाया गया। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, नियामक अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया और कृषि आदानों की ऑनलाइन बिक्री से जुड़े जोखिमों और आवश्यक नियामकीय उपायों पर चर्चा की।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 (Draft Pesticides Management Bill, 2025) के तहत नियमों की समीक्षा की जा रही है, ऐसे में ई-कॉमर्स से जुड़े जोखिमों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

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सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. सिंह, कृषि आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ने कहा कि केवल जीएसटी जैसे बुनियादी दस्तावेजों की जांच ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब खतरनाक कृषि आदान जैसे कीटनाशक ऑनलाइन बेचे जा रहे हों। उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण, ट्रेसबिलिटी और आपूर्ति श्रृंखला की जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया।

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डॉ. सुभाष चंद, सचिव, केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) ने कहा कि डिजिटलीकरण और ई-कॉमर्स ग्रामीण भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कीटनाशक खतरनाक उत्पाद हैं और किसानों की सुरक्षा, गुणवत्ता और अनुपालन की जिम्मेदारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और निर्माताओं – दोनों की होनी चाहिए।

ओएनडीसी (ONDC) के कृषि डोमेन लीड श्री रवि शंकर ने किसानों को सही और प्रामाणिक उत्पाद पहचानने में मदद के लिए बेहतर कैटलॉगिंग, सलाहकारी जानकारी और ट्रेसबिलिटी सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि नकली और अवैध कृषि आदानों के खतरे को कम किया जा सके।

सम्मेलन में बोलते हुए क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन श्री अंकुर अग्रवाल ने कहा, “हम ई-कॉमर्स के माध्यम से कीटनाशकों की बिक्री के विरोध में नहीं हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल बिक्री मॉडल के साथ नियामकीय और प्रवर्तन ढांचे भी विकसित हों। अनधिकृत उत्पादों पर रोक लगाना सरकार और उद्योग – दोनों की साझा जिम्मेदारी है, जो किसानों की सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता विश्वास के लिए बेहद जरूरी है।”

क्रॉपलाइफ इंडिया ने बताया कि वर्तमान में कीटनाशकों की बिक्री और वितरण कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 के तहत सख्ती से नियंत्रित है। इसके तहत केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेता ही स्वीकृत उत्पादों की बिक्री निर्धारित क्षेत्रों में कर सकते हैं और इसके लिए निर्माता या आयातक द्वारा जारी वैध प्रिंसिपल सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है।

हालांकि, संस्था ने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को कीटनाशक कानून के तहत अलग से लाइसेंस लेने या यह सुनिश्चित करने की स्पष्ट कानूनी बाध्यता नहीं है कि ऑनलाइन सूचीबद्ध उत्पाद विक्रेता के लाइसेंस में दर्ज हैं या नहीं। इससे नियामकीय शून्य (रेगुलेटरी गैप) पैदा हो रहा है, जिसके कारण अनधिकृत उत्पाद किसानों तक पहुंच सकते हैं।

संस्था के अनुसार, ई-कॉमर्स के मार्केटप्लेस और इन्वेंट्री-आधारित मॉडल दोनों के जरिए कीटनाशकों की बिक्री हो रही है। इन्वेंट्री मॉडल में कई बार कीटनाशकों का भंडारण और वितरण ऐसे गोदामों से होता है जो कीटनाशक नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त नहीं होते, जबकि ऑफलाइन प्रणाली में यही कार्य लाइसेंस के बिना संभव नहीं है। इससे निरीक्षण, सैंपलिंग और ट्रेसबिलिटी में कठिनाई आती है।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि कीटनाशक नियमों का नियम 10E, जिसे 2022 में जोड़ा गया था, केवल ऑनलाइन या घर तक डिलीवरी की अनुमति देता है, लेकिन यह लाइसेंस, प्रिंसिपल सर्टिफिकेट, स्वीकृत परिसर या भौगोलिक सीमाओं जैसी शर्तों को समाप्त नहीं करता। इसके बावजूद, कुछ मामलों में इस नियम की गलत व्याख्या कर अनधिकृत बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।

वर्तमान प्रवर्तन व्यवस्था में निरीक्षण और जांच मुख्य रूप से लाइसेंस प्राप्त दुकानों तक सीमित रहती है, जबकि ई-कॉमर्स आपूर्ति श्रृंखला में भंडारण और परिवहन अक्सर निगरानी के दायरे से बाहर रह जाते हैं, जिससे अवैध या नकली उत्पादों पर त्वरित कार्रवाई करना कठिन हो जाता है।

श्री अंकुर अग्रवाल ने कहा कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 में ई-कॉमर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों—जैसे प्लेटफॉर्म-स्तरीय जवाबदेही, इन्वेंट्री मॉडल के लिए लाइसेंसिंग और डिजिटल ट्रेसबिलिटी—को अभी स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। क्रॉपलाइफ इंडिया इन सभी बिंदुओं पर अपने सुझाव औपचारिक परामर्श प्रक्रिया के तहत सरकार को सौंपेगा।

उन्होंने कहा, “डिजिटल कॉमर्स कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन इसका रास्ता ‘नियंत्रित सक्षमकरण’ का होना चाहिए, ताकि किसानों को केवल असली और मानक उत्पाद ही मिलें और व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।”

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