राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खरीफ 2026 के मौसमीय जोखिमों से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बनाया 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार

30 मई 2026, नई दिल्ली: खरीफ 2026 के मौसमीय जोखिमों से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बनाया 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार –  खरीफ 2026 सीजन के दौरान संभावित मौसमीय चुनौतियों से किसानों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार किया है। यह भंडार विलंबित मानसून, लंबे शुष्क दौर या पुनर्बुवाई की आवश्यकता जैसी परिस्थितियों में किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

राष्ट्रीय खरीफ कृषि सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश खरीफ 2026 की तैयारियों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) तथा प्रगतिशील किसानों के साथ व्यापक चर्चा के बाद बीज, उर्वरक, फसल बीमा, कृषि ऋण और प्राकृतिक खेती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कार्ययोजना तैयार की गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी फसल की सफलता के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 के लिए देश में लगभग 173 लाख क्विंटल बीजों की आवश्यकता का अनुमान है, जबकि वर्तमान में 192 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध हैं। इस प्रकार आवश्यकता से लगभग 11 प्रतिशत अधिक बीजों की व्यवस्था की गई है। राज्यों की मांग के अनुसार बीजों का आवंटन भी पूरा कर लिया गया है और राज्यों को समय पर बीज उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बुवाई शुरू होने से पहले बीज किसानों तक पहुंच सकें।

उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार भी तैयार किया गया है। यह भंडार उन परिस्थितियों में उपयोगी होगा जब किसी क्षेत्र में वर्षा में देरी हो, लंबे समय तक सूखा जैसी स्थिति बनी रहे या किसानों को पुनर्बुवाई करनी पड़े। सरकार ने ऐसी परिस्थितियों के लिए अग्रिम तैयारियां की हैं ताकि किसानों को बीजों की कमी का सामना न करना पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम की बढ़ती अनिश्चितता के कारण कृषि क्षेत्र को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बीजों की अतिरिक्त उपलब्धता और राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक भंडारण व्यवस्था किसानों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सम्मेलन में कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। इनमें उर्वरकों की उपलब्धता, कृषि ऋण, फसल बीमा, किसान आईडी, प्राकृतिक खेती तथा राज्य-विशिष्ट कृषि योजनाएं शामिल थीं। मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही हैं जिससे कृषि प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और किसान-केंद्रित बन सके।

कृषि ऋण के विषय पर उन्होंने बताया कि देश में औसत कृषि ऋण का आकार लगभग 1.32 लाख रुपये है, हालांकि विभिन्न राज्यों में इसमें काफी अंतर देखने को मिलता है। जिन क्षेत्रों में कृषि ऋण प्रवाह कम है, वहां बैंकों के साथ विशेष बैठकें आयोजित कर किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।

फसल बीमा योजना के संबंध में मंत्री ने कहा कि दावों के निपटान को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए फसल कटाई प्रयोगों और रिमोट सेंसिंग आधारित आकलन प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रीमियम भुगतान या दावों के निपटान में अनावश्यक देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान नकली और घटिया कृषि आदानों, विशेषकर कीटनाशकों, के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने पर भी सहमति बनी। राज्यों को नमूना जांच बढ़ाने, प्रयोगशालाओं को मजबूत करने और एनएबीएल मान्यता प्राप्त परीक्षण सुविधाओं का विस्तार करने की सलाह दी गई।

कृषि मंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रत्येक राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। इनमें मिट्टी की स्थिति, जलवायु, पोषक तत्वों की उपलब्धता, उपयुक्त फसलें, बीज किस्में और उर्वरक उपयोग जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा ताकि कृषि योजना स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाई जा सके।

प्राकृतिक खेती पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 20 लाख किसान प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकृत हो चुके हैं और करीब 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र इस पद्धति के अंतर्गत आ चुका है। उन्होंने कहा कि एकीकृत कृषि प्रणाली विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

सरकार 1 जून से 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ भी चलाएगी, जिसके तहत कृषि विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ गांवों में पहुंचकर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे।

राष्ट्रीय बीज भंडार की स्थापना को खरीफ 2026 की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था मौसमीय जोखिमों के दौरान किसानों को सहायता प्रदान करेगी और देश में खरीफ फसलों की बुवाई एवं उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में योगदान देगी।

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