राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मौजूदा सीजन में पराली जलाने के मामलों को ‘शून्य’ करने का लक्ष्य : श्री तोमर

05 अगस्त 2023, नई दिल्ली: मौजूदा सीजन में पराली जलाने के मामलों को ‘शून्य’ करने का लक्ष्य : श्री तोमर – पराली की जलाने की घटना हर साल दिल्ली और उसके आस पास के इलाकों मे वायु प्रदूषण का एक बड़ा  कारण बन जाती हैं। इस बार कैंद्र सरकार ने पराली जलाने की समस्या को शून्य स्तर पर लाने के दिशा में गंभीरता से काम कर रहा हैं। इस संबंध में शुक्रवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पर्यावरण मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव की सह-अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौजूदा मौसम में धान की पराली जलाने से रोकने के बारे में विचार-विमर्श हुआ।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने धान की पराली जलाने के मुद्दे के समाधान में दिखाई गई गंभीरता के लिए सभी हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों के प्रयासों से धान की पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी देखी जा रही है। हालांकि, धान की पराली जलाने का संबंध केवल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों के प्रदूषण से नहीं है, बल्कि यह मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालकर, कृषि भूमि पर भी हानिकारक प्रभाव डाल रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार चार राज्यों को सीआरएम योजना के अंतर्गत पर्याप्त धनराशि प्रदान कर रही है और इन राज्यों को समय पर किसानों को मशीन प्रदान करके उसका समुचित इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिए। मशीनों के समुचित उपयोग और बायो-डीकंपोजर का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर उचित निगरानी की जरूरत है। समुचित प्रबंधन के माध्यम से व्यावसायिक उद्देश्य हासिल करने के लिए धान के भूसे का इस्तेमाल करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। विभिन्न निकायों के माध्यम से पराली जलाने से रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों (एटीएमए) जैसी एजेंसियों को उनकी पूरी क्षमता से उपयोग करने की जरूरत है।

वही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से धान की पराली जलाने से रोकने के प्रयासों के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसी एजेंसियों के ठोस प्रयासों के कारण, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पराली जलने की घटनाओं में कमी आई है। धान के भूसे के समुचित प्रबंधन को प्रोत्साहन देने की जरूरत है, जो बिजली, बायोमास आदि जैसे उपयोगकर्ता उद्योगों को कच्चा माल मुहैया करेगा।बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री मनोज आहूजा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे |

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