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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए कृषि व सामाजिक विज्ञान का समन्वय आवश्यक

विकसित भारत के लक्ष्य की पूर्ति में कृषि विज्ञान की अहम भूमिका : डॉ. जाट

24 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए कृषि व सामाजिक विज्ञान का समन्वय आवश्यक – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि ग्रामीण भारत के सर्वांगीण उत्थान के लिए कृषि विज्ञान और सामाजिक विज्ञान को अलग-अलग खांचों में नहीं, बल्कि साथ-साथ कार्य करना होगा।

डॉ. जाट दिल्ली विश्वविद्यालय में 22 दिसंबर 2025 को आयोजित संगोष्ठी “ग्रामीण समुदायों का सशक्तिकरण : कृषि राजनीति और चौधरी चरण सिंह की विरासत—विकसित भारत की ओर” में विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और नीति निर्माण से गहराई से जुड़ी हुई है। यदि सामाजिक यथार्थ और किसानों की ज़मीनी जरूरतों को समझे बिना तकनीक विकसित की गई, तो उसका अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ता।

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कौशल विकास से ही संभव है तकनीक आधारित कृषि क्रांति

डॉ. जाट ने कहा कि तकनीक आधारित कृषि क्रांति के लिए ‘स्किलिंग इंडिया’ अनिवार्य है। युवाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, डिजिटल टूल्स और नवाचारों से जोड़कर ही खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

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आईसीएआर–दिल्ली विश्वविद्यालय सहयोग से होगा दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव

उन्होंने आईसीएआर और दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच प्रभावी सहयोग पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस तरह की साझेदारी से शोध, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी, जिसका समाज पर दीर्घकालिक और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

डॉ. जाट ने अपने वक्तव्य में चौधरी चरण सिंह की किसान-केन्द्रित सोच और नीतियों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

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