राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: प्रदर्शनकारी किसानों से परामर्श के लिए पैनल गठित

29 जुलाई 2024, चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट का आदेश: प्रदर्शनकारी किसानों से परामर्श के लिए पैनल गठित – 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर जारी किसान आंदोलन के छठे महीने में “प्रमुख व्यक्तियों की एक स्वतंत्र समिति” गठित करने का आदेश दिया, ताकि एक सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके। यह अंतरिम आदेश हरियाणा सरकार द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में आया, जिसमें उसने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसने शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड्स हटाने का आदेश दिया था।

हरियाणा ने इस वर्ष 13 फरवरी को बॉर्डर बंद कर दी थी, जब किसानों, जिनमें अधिकतर पंजाब से थे, ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी बनाने के लिए अपना आंदोलन तेज़ करने के लिए दिल्ली की ओर अपना मार्च शुरू किया था।

राजनीतिक और कानूनी संघर्ष

किसानों ने एमएसपी-गारंटी कानून की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया। शुरू में केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों से वार्ता की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला और किसानों ने अपना आंदोलन जारी रखा। इस बीच, शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस की कार्रवाई में कई किसान और पुलिसकर्मी घायल हुए, जिसमें एक किसान की गोली लगने से मौत हो गई, जिसकी अलग से जांच चल रही है।

किसान दिल्ली की ओर मार्च करने के मौके का इंतजार कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार, दोनों भाजपा शासित हैं, उन्हें रोकने की कोशिश कर रही हैं। हरियाणा सरकार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, क्योंकि सीमा खोलने से किसानों को दिल्ली पहुंचने का रास्ता मिल सकता था।

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि बॉर्डर बंद करने की स्थिति को बनाए रखा जाए, लेकिन “प्रमुख व्यक्तियों की एक स्वतंत्र समिति” गठित करने का आदेश दिया, जो किसानों, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से परामर्श करेगी ताकि न्यायसंगत, उचित और सभी के हित में समाधान निकाला जा सके।

आदेश में कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा राज्य समिति के सदस्यों के नाम सुझा सकते हैं या फिर वे समिति के गठन के लिए कुछ उपयुक्त व्यक्तियों को ढूंढने का काम हम पर छोड़ सकते हैं। उच्च न्यायालय ने राज्यों से एक हफ्ते के भीतर जवाब माँगा है।

इसमें आगे कोर्ट ने कहा , “तब तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिए जाते है ताकि शंभू बॉर्डर पर कोई अप्रिय घटना न हो। इस बीच, हरियाणा और पंजाब राज्यों को यातायात के मुक्त प्रवाह के लिए चरणबद्ध तरीके से बैरिकेड्स हटाने और साइट पर बड़े पैमाने पर जनता को हो रही असुविधा का निवारण करने के लिए अपने-अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिए जाते है।”

शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि वे आदेश का अध्ययन करने के बाद विस्तृत टिप्पणी करेंगे, लेकिन यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट को भाजपा सरकार पर विश्वास नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप सभी हितधारकों से परामर्श के लिए स्वतंत्र समिति का गठन हुआ है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और केंद्र की भाजपा सरकारें लगातार कई मुद्दों पर कोर्ट को गुमराह कर रही हैं, लेकिन किसान एमएसपी गारंटी कानून की मांग पर डटे रहेंगे।

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