श्री रूपाला ने मछली पालन की सफलताओं  पर पुस्तक का विमोचन किया

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19 अगस्त 2022, नई दिल्ली: श्री रूपाला ने मछली पालन की सफलताओं  पर पुस्तक का विमोचन किया – राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) द्वारा गत दिवस  नई दिल्ली के एनएएससी परिसर के व्याख्यान कक्ष में शासी निकाय की 9वीं बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने शासी निकाय के बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में डॉ. एल. मुरुगन, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री और शासी निकाय के उपाध्यक्ष और डॉ. संजीव कुमार बालियान, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, विशेष रूप से आमंत्रित सदस्य, शासी निकाय के अन्य अधिकारी और  नीति आयोग के सदस्य (कृषि) ने हिस्सा लिया। बैठक में श्री जतीन्द्र नाथ स्वैन, सचिव, मात्स्यिकी विभाग,  प्रोफेसर रमेश चंद, नीति आयोग और अन्य विभागों के सचिव तथा विभिन्न राज्यों के नामित गैर-सरकारी शासी निकाय के 14 सदस्य भी शामिल हुए।

श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने 75वें स्वतंत्रता दिवस – आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के अवसर पर एनएफडीबी द्वारा प्रकाशित “भारतीय मात्स्यिकी से सुपर सक्सेस स्टोरीज” पर पुस्तक का विमोचन किया। इसके अलावा  आईसीएआर-सीआईएफए द्वारा विकसित ऑनलाइन मार्केट प्लेस फीचर “एक्वा बाजार” ऐप को जारी किया । यह ऐप मछली  पालकों के लिए आवश्यक सेवाएं और मछली के बीज, चारा, दवाओं जैसे इनपुट की प्राप्ति में मदद करेगा, साथ ही साथ इसमें किसानों द्वारा बिक्री के लिए टेबल आकार की मछली को सूचीबद्ध भी किया जा सकता है।

राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने कहा कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में झींगा पालन करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर इन राज्यों में जलीय कृषि विकसित की जाती है, तो वे झींगा उत्पादन में आंध्र प्रदेश के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। सचिव श्री जतीन्द्र नाथ स्वैन ने मात्स्यिकी क्षेत्र में एनएफडीबी की भूमिका,  और देश में मत्स्यपालन के विकास में इसके योगदान के बारे में जानकारी प्रदान की।

डॉ. रमेश चंद, नीति आयोग के सदस्य (कृषि) ने कहा कि पिछले दशक से मत्स्यपालन क्षेत्र में लगभग 8 प्रतिशत की दर से नियमित रूप से रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि बोर्ड को चाहिए कि वह बोर्ड द्वारा निर्धारित किए गए उद्देश्यों के अनुसार आउटपुट और परिणामों को दिखाए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में लगभग 52 प्रतिशत योगदान देता है। उन्होंने कहा कि एक जिला, एक उत्पाद को बढ़ावा देना जरूरी है और मत्स्यपालन क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति की प्रौद्योगिकियों को लागू करना होगा।

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