दिल्ली में ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ, शिवराज सिंह चौहान ने दिया विकसित भारत का रोडमैप
29 जून 2026, नई दिल्ली: दिल्ली में ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ, शिवराज सिंह चौहान ने दिया विकसित भारत का रोडमैप – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया।
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने ग्रामीण विकास योजनाओं पर विस्तृत मंथन किया, जबकि दूसरे दिन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री नीतिगत दिशा और साझा रोडमैप पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी भी मौजूद रहे।
विकसित भारत के लिए टीम इंडिया का साझा प्रयास
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन को साकार करने की एक सुनियोजित रणनीति है। उन्होंने कहा कि यह दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन “टीम इंडिया–टीम रूरल डेवलपमेंट” का साझा प्रयास है, जहां केंद्र और राज्यों के मंत्री तथा अधिकारी एक टीम के रूप में ग्रामीण विकास की दिशा तय कर रहे हैं।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऊंचाई ऐसी नहीं होनी चाहिए कि हम दूसरों को गले न लगा सकें। यही भावना ग्रामीण विकास की योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में भी दिखाई देनी चाहिए।
गांवों के विकास से ही बनेगा विकसित भारत
शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “मैन ऑफ आइडिया” बताते हुए कहा कि उनके मन में विकसित, आत्मनिर्भर और गौरवशाली भारत बनाने की गहरी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि इस संकल्प को तभी साकार किया जा सकता है, जब केंद्र और राज्य मिलकर गांवों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव देश की अर्थव्यवस्था, संस्कृति, सभ्यता और लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई हैं। यह सम्मेलन ग्रामीण समृद्धि का “अमृत मंथन” है, जहां से निकले सुझाव देश के हर गांव तक पहुंचेंगे।
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विचार को दोहराते हुए कहा कि सरकार केवल फाइलों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि बिना किसी परेशानी, रिश्वत या अनावश्यक देरी के हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।
सुधारों और पारदर्शिता पर रहेगा जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं में जहां भी नियमों और प्रक्रियाओं में बाधाएं हैं, उन्हें दूर करना होगा। उन्होंने मनरेगा के क्रियान्वयन का उल्लेख करते हुए कहा कि कई स्थानों पर मशीनों से काम, मस्टर रोल में गड़बड़ियां और गलत उपस्थिति जैसी कमियों के कारण धन का दुरुपयोग हुआ है। इन कमियों को दूर करने के लिए सुधार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मजदूरों के लिए काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है और प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद मजदूर काम से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पंचायतों तक उपलब्ध कराई जा रही बड़ी राशि का सही उपयोग किया जाए तो गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है।
इन योजनाओं पर हो रहा मंथन
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सम्मेलन ग्रामीण विकास के पूरे इको-सिस्टम पर केंद्रित है। इसमें विकसित भारत-जी राम जी (VB-GRAM-G), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण कौशल विकास तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है, ताकि इन सभी योजनाओं को आपस में जोड़कर विकसित भारत के लक्ष्य को गति दी जा सके।
पात्र गरीब को आवास से वंचित न करें
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत चल रहे भौतिक सत्यापन अभियान का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी पात्र गरीब परिवार को अपात्र घोषित करना महापाप है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र परिवार केवल लापरवाही या पक्षपात के कारण पक्के मकान से वंचित न रहे। साथ ही सामूहिक सामग्री खरीद, मेसन प्रशिक्षण और योजनाओं के बेहतर समन्वय जैसे नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
महिलाओं को बनाया जाएगा ग्रामीण उद्यमी
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा चुकी हैं और लाखों महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार का लक्ष्य इस संख्या को 6 करोड़ तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें फूड प्रोसेसिंग, एग्री-बिजनेस, सर्विस सेक्टर और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर आधुनिक ग्रामीण उद्यमी बनाया जाएगा।
सड़क, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाली ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार की सुविधाएं पहुंच रही हैं, जिससे किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं की समीक्षा को भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने डिजिटल माध्यम से पारदर्शी और समयबद्ध पेंशन वितरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
ग्रामीण विकास को मिशन की तरह करने का आह्वान
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों और मंत्रियों से सरकारी कार्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का मिशन मानकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हर अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांवों की तस्वीर बदलने का संकल्प लेकर कार्य करेगा तो यह सम्मेलन वास्तव में “अमृत मंथन” साबित होगा।
उन्होंने सभी राज्यों से अपील की कि सम्मेलन से निकलने वाले सुझावों और अनुभवों को अपने-अपने राज्यों में लागू करें, ताकि विकसित भारत का सपना गांवों के विकास के माध्यम से साकार हो सके।
पहले दिन अधिकारियों का मंथन, दूसरे दिन मंत्रियों की बैठक
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में विकसित भारत-जी राम जी (VB-GRAM-G), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण कौशल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम पर विस्तृत चर्चा हुई। इन सत्रों में योजनाओं की प्रगति, राज्यों के अनुभव, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग तथा वित्तीय प्रबंधन पर विचार-विमर्श किया गया। दूसरे दिन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री सम्मेलन में शामिल होकर साझा नीति और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे अपने विचार
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि शहरों की ओर बढ़ते पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनरेगा से ‘वीबी जी राम जी’ की ओर बदलाव केवल रोजगार सृजन नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों और धन के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्यों के सहयोग से गांवों को मजबूत करने, पलायन रोकने और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों तथा लखपति दीदी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है, पात्र परिवारों को पक्के मकान दिए जा रहे हैं और मनरेगा में सुधार कर उसे विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप नया स्वरूप दिया जा रहा है।
वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश में लगभग 8 लाख किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं, 3 करोड़ पक्के घर तैयार हुए हैं, 3 करोड़ लखपति दीदी बनी हैं और 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अब इन परिसंपत्तियों के बेहतर रखरखाव, योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ और ग्रामीण नागरिकों की जीवन गुणवत्ता को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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