भारत में क्षेत्रवार कृषि नीति, नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून की तैयारी: शिवराज सिंह चौहान
25 अप्रैल 2026, लखनऊ: भारत में क्षेत्रवार कृषि नीति, नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून की तैयारी: शिवराज सिंह चौहान – भारत सरकार कृषि नीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब खेती के लिए पूरे देश में एक जैसी नीति के बजाय क्षेत्रवार रणनीति बनाई जाएगी। जलवायु, पानी की उपलब्धता, भूमि की स्थिति और फसल पैटर्न के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग योजना तैयार होगी। यह बात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
उत्तरी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को कृषि विकास के लिए अब व्यावहारिक और स्थानीय जरूरतों पर आधारित मॉडल अपनाना होगा। इसी सोच के तहत देश को पांच कृषि क्षेत्रों में विभाजित किया गया है और हर क्षेत्र के लिए अलग सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि राज्यों के साथ मिलकर खरीफ और रबी मौसम की ठोस कार्ययोजना बनाई जा सके।
गेहूं-धान से आगे बढ़ेगी कृषि नीति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन, खासकर गेहूं और धान में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन आने वाले समय में केवल इन फसलों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। अब दालें, तिलहन, बागवानी, फल, सब्जियां, खाद्य प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार के सामने कृषि क्षेत्र के तीन बड़े लक्ष्य हैं—देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना।
कृषि विकास के छह प्रमुख स्तंभ
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार की कृषि रणनीति छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, किसानों को मेहनत का उचित मूल्य दिलाना, नुकसान होने पर मुआवजा देना, फसल विविधीकरण बढ़ाना और किसानों को बाजार से जोड़ना।
उन्होंने कहा कि खेती को अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं देखा जा सकता। इसे प्रसंस्करण, निर्यात, तकनीक और पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़कर देखना होगा।
छोटे किसानों पर विशेष फोकस
मंत्री ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं, इसलिए कम जमीन से अधिक आय देने वाले मॉडल अपनाने होंगे।
उन्होंने अंतरवर्तीय फसल प्रणाली, अनाज के साथ फल-सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती जैसे एकीकृत कृषि मॉडल को छोटे किसानों के लिए उपयोगी बताया। केंद्र सरकार ऐसे कई मॉडल तैयार कर चुकी है, जिन्हें राज्य अपनी परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकते हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में किसानों को सस्ता संस्थागत ऋण नहीं मिल पा रहा है। इसलिए हर पात्र किसान तक किसान क्रेडिट कार्ड पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि किसान समय पर बीज, उर्वरक, मशीनरी और अन्य संसाधन खरीद सकें।
उन्होंने फार्मर आईडी को कृषि प्रशासन में बड़ा सुधार बताया। इसके तहत भूमि रिकॉर्ड, खसरा नंबर, पशुधन और किसान से जुड़ी अन्य जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता से मिल सकेगा।
लैब से खेत तक पहुंचेगी तकनीक
मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक शोध का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए विकासित कृषि संकल्प अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीमें गांव-गांव जाकर किसान सभाएं करेंगी और नई तकनीक, उन्नत बीज तथा वैज्ञानिक खेती की जानकारी देंगी।
उन्होंने कहा कि जब तक प्रयोगशाला का ज्ञान खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक शोध का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिलेगा।
उर्वरक पर राहत जारी
उर्वरक कीमतों पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों को यूरिया ₹266 प्रति बोरी और डीएपी ₹1,350 प्रति बोरी उपलब्ध कराने के लिए हाल ही में अतिरिक्त ₹41,000 करोड़ की मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक महंगाई का असर खुद वहन कर रही है ताकि किसानों की लागत न बढ़े।
नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून
प्रेस वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण घोषणा नकली बीज, नकली कीटनाशक और मिलावटी कृषि उत्पादों के खिलाफ कड़े कानून बनाने को लेकर रही।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त सख्त नहीं हैं। कई मामलों में मामूली जुर्माने का प्रावधान है, जिससे दोषियों में डर नहीं बनता। इसलिए बीज अधिनियम और कीटनाशक कानून में सख्त प्रावधान लाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह केवल किसानों की फसल का मामला नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
प्राकृतिक खेती और बागवानी को बढ़ावा
मंत्री ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। शुरुआती वर्षों में किसानों को आने वाली चुनौतियों को देखते हुए प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि देश में नौ क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां से किसानों को रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बागवानी क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
आलू किसानों को राहत
उत्तर प्रदेश में आलू कीमतों में गिरावट का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए 20 लाख मीट्रिक टन आलू खरीद की मंजूरी दी गई है। साथ ही राज्य में एक अंतरराष्ट्रीय प्रोसेसिंग सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जिससे प्रसंस्करण, भंडारण और बेहतर बाजार सुविधाएं विकसित होंगी।
भारतीय कृषि के लिए नई दिशा
लखनऊ सम्मेलन भारत की कृषि नीति में बड़े बदलाव का संकेत है। अब फोकस केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि किसान आय, पोषण सुरक्षा, तकनीक हस्तांतरण, टिकाऊ खेती और बेहतर बाजार व्यवस्था पर होगा।
यदि यह रणनीति प्रभावी रूप से लागू होती है, तो भारत की कृषि अधिक लाभकारी, विज्ञान आधारित, बाजार से जुड़ी और किसान केंद्रित बन सकती है।
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