राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

गर्मियों में करें खेतों की गहरी जुताई, कीट-रोग खत्म होंगे और बढ़ेगा उत्पादन  

21 मई 2026, नई दिल्ली: गर्मियों में करें खेतों की गहरी जुताई, कीट-रोग खत्म होंगे और बढ़ेगा उत्पादन – रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने के बजाय मई-जून की गर्मी में गहरी जुताई करना किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, तेज धूप में की गई गहरी जुताई न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है, बल्कि कीट, रोग और खरपतवारों को भी काफी हद तक खत्म कर देती है। इससे आने वाली खरीफ फसलों की पैदावार बेहतर होती है और खेती की लागत भी कम होती है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवधर मिश्रा के मुताबिक, मई महीने में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे समय में मिट्टी पलटने वाले हल से खेतों की लगभग 12 इंच तक गहरी जुताई करनी चाहिए। जुताई के बाद खेत को कुछ समय के लिए खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि तेज धूप का पूरा असर मिट्टी पर हो सके।

कीट और रोगों से मिलता है छुटकारा

गर्मी की गहरी जुताई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मिट्टी में छिपे हानिकारक कीट, उनके अंडे और रोग पैदा करने वाले जीवाणु तेज धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। इससे अगली फसल में कीटों और बीमारियों का प्रकोप कम होता है और किसानों को कीटनाशकों पर कम खर्च करना पड़ता है।

इसके अलावा खेतों में उगे जिद्दी खरपतवार भी जुताई के दौरान मिट्टी में नीचे दब जाते हैं और गर्मी के कारण सूखकर खत्म हो जाते हैं। इससे अगली फसल को बेहतर बढ़वार के लिए साफ और स्वस्थ जमीन मिलती है।

मिट्टी में बढ़ती है नमी और उर्वरा शक्ति

वैज्ञानिकों का कहना है कि जुताई हमेशा ढलान के विपरीत दिशा में करनी चाहिए। इससे बारिश का पानी खेत में ज्यादा समय तक रुकता है और मिट्टी के अंदर तक पहुंचता है। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है और फसलों को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है।

गहरी जुताई से मिट्टी का कटाव भी कम होता है। शोध के अनुसार, गर्मियों में की गई जुताई से मिट्टी कटाव में लगभग 66 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे खेत की उपजाऊ मिट्टी और जरूरी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।

नरवाई प्रबंधन में भी फायदेमंद

आजकल गेहूं की कटाई हार्वेस्टर से होने के कारण खेतों में नरवाई बच जाती है। गहरी जुताई करने पर यह अवशेष मिट्टी में दबकर धीरे-धीरे सड़ जाते हैं और जैविक खाद में बदल जाते हैं। इससे मिट्टी में कार्बनिक तत्व बढ़ते हैं और जमीन की गुणवत्ता सुधरती है।

मिट्टी में जीवांश बढ़ने से फसलों को पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं और खेत में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या भी बढ़ती है। इससे मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।

सही समय और तरीके का रखें ध्यान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जुताई सुबह 7 से 11 बजे के बीच या फिर शाम 4 से 6 बजे के बीच करना बेहतर रहता है। इस दौरान पक्षी ज्यादा सक्रिय रहते हैं और मिट्टी से बाहर आने वाले कीटों को खा जाते हैं।

जुताई करते समय मिट्टी के बड़े-बड़े ढेले बने रहने देना चाहिए। इससे तेज हवाओं में मिट्टी उड़ने का खतरा कम रहता है। वहीं अधिक रेतीले क्षेत्रों में गर्मी के समय गहरी जुताई करने से बचना चाहिए।

गहरी जुताई के लिए मोल्डबोर्ड हल, डिस्क हल, सब सॉयलर और कल्टीवेटर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हर दो से तीन साल में एक बार खेतों की गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए।

उत्पादन में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी

समय पर की गई गहरी जुताई से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, जल संरक्षण बेहतर होता है और फसलों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। यही वजह है कि कृषि वैज्ञानिक किसानों को खरीफ सीजन से पहले गर्मियों में गहरी जुताई करने की सलाह दे रहे हैं।

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