राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

बारिश नहीं के बराबर, फिर भी बढ़ी खरीफ बुवाई; धान, दलहन और मोटे अनाज ने संभाली रफ्तार

23 जून 2026, नई दिल्ली: बारिश नहीं के बराबर, फिर भी बढ़ी खरीफ बुवाई; धान, दलहन और मोटे अनाज ने संभाली रफ्तार – देश के कई हिस्सों में मानसून की धीमी प्रगति और सामान्य से कम वर्षा के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई में शुरुआती बढ़त दर्ज की गई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 19 जून 2026 तक देश में खरीफ फसलों का कुल रकबा 119.90 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 117.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.95 लाख हेक्टेयर अधिक है।

हालांकि मानसून की सक्रियता अभी पूरी तरह नहीं दिखी है, फिर भी किसानों ने धान, दलहन और श्री अन्न (मोटे अनाज) की बुवाई में उल्लेखनीय तेजी दिखाई है। दूसरी ओर सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख वर्षा आधारित फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रहा है।

धान की बुवाई में सबसे बड़ी बढ़त

खरीफ सीजन की शुरुआत में धान की बुवाई ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। 19 जून तक देश में 12.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई/बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 8.09 लाख हेक्टेयर था। यानी धान के रकबे में 4.26 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचित क्षेत्रों में उपलब्ध पानी तथा कुछ राज्यों में समय से हुई प्री-मानसून वर्षा ने धान की शुरुआती बुवाई को गति दी है।

दलहन में भी सकारात्मक संकेत

दलहनी फसलों का कुल रकबा 7.21 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 6.39 लाख हेक्टेयर से 0.83 लाख हेक्टेयर अधिक है।

दलहनों में सबसे अधिक वृद्धि मूंग की बुवाई में देखने को मिली। मूंग का रकबा 2.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.08 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं अरहर की बुवाई लगभग स्थिर बनी हुई है। दूसरी ओर उड़द के रकबे में कमी दर्ज की गई है।

सरकार द्वारा दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के प्रयासों का असर किसानों के रुझान में दिखाई दे रहा है।

श्री अन्न और मोटे अनाज की बढ़ी चमक

सरकार द्वारा मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की नीति का असर इस खरीफ सीजन में भी नजर आ रहा है। श्री अन्न एवं मोटे अनाजों का कुल रकबा 12.43 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 9.82 लाख हेक्टेयर था।

बाजरा की बुवाई में 1.91 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है। ज्वार और मक्का के रकबे में भी वृद्धि हुई है। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने की क्षमता के कारण मोटे अनाज किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बनते जा रहे हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब मानसून की स्थिति अनिश्चित हो।

तिलहनों में गिरावट, सोयाबीन पीछे

तिलहनी फसलों का कुल रकबा पिछले वर्ष की तुलना में घटकर 7.24 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो 2025 में इसी अवधि के 8.11 लाख हेक्टेयर था।

इस गिरावट की मुख्य वजह सोयाबीन की धीमी बुवाई है। देश में सोयाबीन का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.30 लाख हेक्टेयर रह गया है, यानी 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त नमी मिलने के बाद ही बड़े पैमाने पर बुवाई शुरू होने की संभावना है।

हालांकि मूंगफली और सूरजमुखी के रकबे में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कपास की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट

कपास की बुवाई इस वर्ष सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दे रही है। 19 जून तक कपास का रकबा 17.13 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार कपास क्षेत्र में 5.69 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार कपास उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की देरी और किसानों की सतर्कता इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने पर कपास की बुवाई में तेजी आने की संभावना है।

गन्ना और जूट में स्थिरता

गन्ने का रकबा 57.31 लाख हेक्टेयर तथा जूट एवं मेस्टा का रकबा 6.22 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। दोनों फसलों में पिछले वर्ष की तुलना में मामूली बढ़ोतरी हुई है। चूंकि ये लंबी अवधि की फसलें हैं, इसलिए शुरुआती मानसूनी उतार-चढ़ाव का इन पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ता है।

अगले दो सप्ताह होंगे महत्वपूर्ण

खरीफ बुवाई का बड़ा हिस्सा जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में होता है। ऐसे में आने वाले दो सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है और पर्याप्त वर्षा होती है तो सोयाबीन, कपास तथा अन्य वर्षा आधारित फसलों के रकबे में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

फिलहाल कम बारिश के बावजूद किसानों ने खरीफ सीजन की शुरुआत सकारात्मक तरीके से की है। धान, दलहन और मोटे अनाजों में बढ़ी बुवाई यह संकेत देती है कि कृषि क्षेत्र मानसून की चुनौतियों के बीच भी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

19 जून 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति (क्षेत्रफल : लाख हेक्टेयर में)

फसल20262025परिवर्तन
धान12.368.09+4.26
दलहन7.216.39+0.83
श्री अन्न एवं मोटे अनाज12.439.82+2.61
तिलहन7.248.11-0.87
गन्ना57.3156.64+0.67
जूट एवं मेस्टा6.226.09+0.14
कपास17.1322.82-5.69
कुल119.90117.95+1.95


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