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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कर्नाटक में दलहन उत्पादन बढ़ाने की बड़ी रणनीति, प्री-खरीफ बैठक में भाकृअनुप वैज्ञानिकों ने तैयार किया तकनीकी रोडमैप  

08 मई 2026, नई दिल्ली: कर्नाटक में दलहन उत्पादन बढ़ाने की बड़ी रणनीति, प्री-खरीफ बैठक में भाकृअनुप वैज्ञानिकों ने तैयार किया तकनीकी रोडमैप – कर्नाटक में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु तथा कर्नाटक राज्य कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्री-खरीफ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दलहनी फसलों की उन्नत तकनीकों के प्रसार और उत्पादन वृद्धि के लिए विस्तृत तकनीकी रोडमैप तैयार किया गया।

बैठक में देशभर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें कर्नाटक में दलहन उत्पादन की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने जिले-स्तरीय क्लस्टर आधारित रणनीति अपनाने, उन्नत किस्मों के उपयोग और तकनीकी हस्तांतरण को मजबूत करने पर जोर दिया, जिससे उत्पादन और उत्पादकता दोनों में सुधार किया जा सके।

अरहर फसल और रोग प्रबंधन पर विशेष फोकस

बैठक में अरहर फसल को कर्नाटक की प्रमुख दलहनी फसल बताते हुए इसके उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने हाल ही में विकसित उच्च उत्पादक किस्मों को अपनाने की सलाह दी। साथ ही विल्ट रोग के प्रभावी प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

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उर्वरक प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती पर चर्चा

वैज्ञानिकों ने दलहनी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग और समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को आवश्यक बताया। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए सूखा प्रबंधन और अनुकूलन रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। साथ ही गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता को एक बड़ी चुनौती बताया गया और इसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता जताई गई।

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बीज उपलब्धता और उत्पादन विस्तार पर जोर

बैठक में यह जानकारी दी गई कि कर्नाटक में लगभग 34.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन उन्नत किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत मिनी किट वितरण और बीज हब को मजबूत करने की बात कही गई।

तकनीकी प्रसार और भविष्य की रणनीति

वैज्ञानिकों ने प्रदर्शन आधारित तकनीक हस्तांतरण, नियमित प्री-सीजन बैठकों और स्पष्ट तकनीकी दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही पौध संरक्षण, जैव-कीटनाशक उपयोग, खरपतवार प्रबंधन और नई मूंग किस्मों के प्रसार पर भी चर्चा की गई।

बैठक में लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रभारी और विभिन्न जिलों के कृषि विशेषज्ञ शामिल रहे। सभी ने मिलकर कर्नाटक में दलहन उत्पादन को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में समन्वित प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।

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