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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खरीफ 2025: डीएपी की बोरी 1350 रुपये में, चने पर 10% आयात शुल्क लागू

01 अप्रैल 2025, नई दिल्ली: खरीफ 2025: डीएपी की बोरी 1350 रुपये में, चने पर 10% आयात शुल्क लागू –  केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2025 के लिए किसानों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी है। इसके तहत खरीफ सीजन (1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025) के लिए 37,216.15 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। यह राशि रबी सीजन 2024-25 की तुलना में करीब 13,000 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से किसानों को डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की एक बोरी 1350 रुपये में मिलेगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फैसले पर कहा, “किसानों को डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही मिलेगी। इसके लिए सरकार भारी सब्सिडी दे रही है। इस साल करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी सस्ती खाद के लिए दी गई है।” उन्होंने यह भी बताया कि खरीफ सीजन में सस्ती डीएपी उपलब्ध कराने के लिए 37,216 करोड़ रुपये की विशेष सब्सिडी दी जाएगी।

चने पर 10% आयात शुल्क, विदेशी चना होगा महंगा

किसानों के हित में सरकार ने आयात-निर्यात नीति में भी बदलाव किया है। चने पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लागू करने का फैसला लिया गया है, जिसकी अधिसूचना 27 मार्च को जारी की गई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “10 प्रतिशत आयात शुल्क से सस्ता चना विदेश से नहीं आएगा, जिससे हमारे किसानों को उचित दाम मिलेगा।” उन्होंने बताया कि इस साल चने का उत्पादन भी बढ़ा है। 2024-25 के अग्रिम अनुमान के मुताबिक, चने का उत्पादन 115 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा होगा, जो पिछले साल के 110 लाख मीट्रिक टन से अधिक है।

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मसूर पर भी बढ़ा था शुल्क

पिछले दिनों मसूर के आयात पर भी सरकार ने नीति में बदलाव किया था। पहले मसूर पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क था, लेकिन कीमतें कम होने से किसानों को नुकसान हो रहा था। इसके बाद सरकार ने मसूर पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क लागू करने का फैसला किया।

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सब्सिडी और एमएसपी पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का ध्यान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कीमतों को नियंत्रित करने पर भी है। “प्रधानमंत्री का मंत्र है कि किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम मिले। इसके लिए न सिर्फ उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभ के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया जाता है, बल्कि खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है,” उन्होंने कहा।

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