हवाई मार्ग से पहली बार मालदीव पहुंचे कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आम, किसानों को मिला 50% से ज्यादा रिटर्न
01 अगस्त 2026, नई दिल्ली: हवाई मार्ग से पहली बार मालदीव पहुंचे कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आम, किसानों को मिला 50% से ज्यादा रिटर्न – भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप मालदीव भेजकर भारतीय बागवानी निर्यात क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 30 जुलाई 2026 को रवाना की गई यह खेप कर्नाटक की देर से पकने वाली आम किस्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने और भारत के आम निर्यात को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

APEDA ने बताया बड़ी उपलब्धि
एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव (IAS) ने इस निर्यात को संभव बनाने वाले निर्यातक, किसान उत्पादक कंपनी (FPC), किसानों और अन्य सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल भारतीय आमों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोलने के साथ-साथ देर से पकने वाली किस्मों के निर्यात को बढ़ावा देती है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है।
कोलर जिले से भेजी गई एक मीट्रिक टन खेप
मालदीव भेजी गई एक मीट्रिक टन आमों की खेप कर्नाटक के कोलर जिले के केजीएफ तालुका स्थित एम/एस प्राकृतिकमाया फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPC) से जुड़े किसानों से प्राप्त की गई। इस खेप का निर्यात एम/एस अहल्या देवी वेंचर्स की निदेशक श्रीमती अश्विनी ए ने किया। वे नवपंजीकृत महिला उद्यमी एवं निर्यातक हैं, जिनकी भागीदारी कृषि निर्यात क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
क्यों खास हैं नीलम और तोतापुरी आम
नीलम आम अपनी मीठी, रसदार गूदे, सुगंध और डेसर्ट, स्मूदी तथा पेय पदार्थों में उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। वहीं तोतापुरी आम अपने विशिष्ट आकार, मीठे-खट्टे स्वाद और ताजा उपभोग के साथ-साथ प्रसंस्करण के लिए भी जाना जाता है। इन दोनों किस्मों की कटाई जून के अंत से जुलाई के अंत तक होती है। यही वजह है कि ये देर से पकने वाली किस्में भारत के आम निर्यात सीजन को आगे बढ़ाने और पीक सीजन के बाद भी अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
किसानों को मिला 50% से अधिक लाभ
इस निर्यात पहल का सबसे बड़ा फायदा किसान उत्पादक कंपनी (FPC) से जुड़े किसानों को मिला। एपीडा के अनुसार, किसानों को इस निर्यात के माध्यम से पारंपरिक बाजारों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अधिक रिटर्न प्राप्त हुआ। प्रत्यक्ष खरीद, निर्यात बाजार से सीधा जुड़ाव और संगठित तरीके से उत्पादों के एकत्रीकरण ने किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इससे निर्यात-उन्मुख खेती को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एपीडा के अनुसार, यह हवाई निर्यात कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता को दर्शाता है। किसान उत्पादक कंपनियां (FPC) संगठित रूप से किसानों की उपज एकत्रित कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उन्हें वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
निर्यात को मिलेगा और बढ़ावा
एपीडा का मानना है कि यह उपलब्धि कर्नाटक के आम निर्यात के लिए एक नई शुरुआत है। इससे किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसान उत्पादक कंपनियों (FPC), निर्यातकों और कृषि उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पाद भेजने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
एपीडा ने कहा कि वह राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने, वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रीमियम फलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है।
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