पूर्वी भारत में महिला किसानों को सशक्त कृषि अभिभावक बनाने के साथ ”बीज संरक्षक” के निर्माण पर काम कर रहा आईआरआरआई-सार्क

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  • कुंतल दास; स्वाति नायक; सर्वेश शुक्ला; रवीन्द्र मोहराणा

28 जनवरी 2022, पूर्वी भारत में महिला किसानों को सशक्त कृषि अभिभावक बनाने के साथ ”बीज संरक्षक” के निर्माण पर काम कर रहा आईआरआरआई-सार्कग्रामीण भारत में अपनी आजीविका के लिए, कृषि में महिलाओं की भागीदारी 80% तक है, जिसमे 33% किसान और लगभग 47% खेतिहर मजदूर शामिल हैं। फिर भी महिलाओं के पास केवल 13% कृषि भूमि है। महिलाओं को अक्सर विस्तार कार्यक्रमों से बाहर रखा जाता है और परोक्ष रूप से खेती से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं को कृषि में सबसे आगे लाने के लिए प्रोत्साहन अभियान में वृद्धि देखी गई है।

गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादकता का आधार है और नई तकनीकों का वाहक है जिससे खेती पर निर्भर ग्रामीण परिवारों का कल्याण हो सकता है। धान का बीज उत्पादन एवं बीज बचाने की प्रथा भारतीय कृषि परंपराओं की आधारशिला रही है जिसने कृषि को जीवन का एक तरीका बना दिया, खासकर ग्रामीण क्षेत्र में। हालांकि, पूर्वी भारत में, गुणवत्ता वाले धान बीज की सीमित या किसान तक पहुंचने की कमी के कारण कम पैदावार देखी गई। इसके कारण एक कमजोर अनौपचारिक बीज प्रणाली (अन्य किसानों के साथ खेत में बचाए गए बीजों का आदान-प्रदान) ग्रामीण क्षेत्र में देखि जाती है। गुणवत्तापूर्ण धान बीज उत्पादन एवं भंडारण की प्रथा और धान की उन्नत किस्मों के बारे में जागरूकता जमीनी स्तर पर, समय की आवश्यकता है, खास करके उन महिलाओ के बीच जो धान की खेती तथा कृषि से जुड़े हुए है।
कई ग्रामीण समुदायों में, पीढ़ियों से बीजों को उत्पादन और रखरखाव मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा की जाने वाली प्रमुख कृषि गतिविधि है। खेती में शामिल महिलाओं को धान का बीज गुणन, प्रबंधन और भंडारण में उनकी अंतर्निहित क्षमताओं को प्रोत्साहित करते हुए “प्राथमिक किसान” या “बीज उत्पादक” के रूप में अग्रिम पंक्ति में लाने की आवश्यकता है।

कुशल बीज उत्पादक बनने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण

अपने सामाजिक समानता लक्ष्य के तहत, अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) महिला किसानों के लिए लैंगिक अंतर को कम करने के लिए कदम उठा रही है। इसे स्थानीय, लिंग-अनुकूल प्रशिक्षण, संचार और सूचना सामग्री के माध्यम से महिला समूहों और सहकारी समितियों के सशक्तिकरण और बीज सुरक्षा के बीच संबंध स्थापित करके कार्यान्वित किया जा रहा है।

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आईआरआरआई-दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईआरआरआई-सार्क) की “बीज प्रणाली और उत्पाद प्रबंधन” (SSPM) टीम ने “एक्सेलरेटेड जेनेटिक गेन इन राइस अलायन्स” (AGGRi) परियोजना के समर्थन से इस प्रशिक्षण श्रृंखला कार्यशालाओं को लागू किया। “बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन” द्वारा वित्त पोषित, AGGRi एलायंस का उद्देश्य, धान की उन्नत किस्मों के वितरण में तेजी लाना और पूर्वी भारत में किसानों को गुणवत्ता वाले बीज का पहुंच में सुधार करना है। SSPM टीम ने एनजीओ के सहयोग से बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रमुख स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया। बिहार में, मुजफ्फरपुर जिले के प्रयाग चक गांव, औराई ब्लॉक में पार्टनर एनजीओ “प्रभात किरण विकास संस्थान” के साथ 19 दिसंबर 2021 को 40 प्रतिभागियों के साथ प्रशिक्षण प्रतिस्पर्धा आयोजित किया गया। 1 जनवरी 2022 को छत्तीसगढ़ के अभनपुर प्रखंड के रायपुर जिले के निमोरा गांव में “छत्तीसगढ़ अग्रिकोण समिति” के टीम द्वारा आयोजित कार्यशाला में 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कैसरगंज प्रखंड के बहराइच जिले के गोधैया गांव में 10 दिसंबर 2021 को 40 प्रतिभागियों के साथ “अपराजिता सामाजिक संघ” प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया।

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कुल 110 महिलाएं, जो अपने-अपने क्षेत्रों में चावल की खेती में प्रत्यक्ष (कुल 65%) और परोक्ष रूप से (कुल 35%) शामिल हैं, चावल की नई उन्नत किस्मों और गुणवत्ता बीज उत्पादन तकनीक के बारे में अपने ज्ञान को मजबूत किया। प्रतिभागियों में ज्यादातर किसान, कृषि सहकारी समितियों के सदस्य और किसान संगठनों के सदस्य थे। प्रतिभागियों ने फील्ड डेटा एन्यूमरेटर्स, पार्टनर संगठनों के विशेषज्ञों और राज्य कृषि विभाग से बीज उत्पादन के व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों पहलुओं को प्राप्त किया। आईआरआरआई ने सभी प्रतिभागियों को वायु-रोधी अनाज भंडारण, “आईआरआरआई सुपर बैग” और गुणवत्ता बीज उत्पादन तथा क्षेत्रीय भाषाओं में मुद्रित चित्रात्मक मार्गदर्शका पुस्तिकाएं भी प्रदान कीं।

 

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