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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ईरान संकट से वैश्विक पिस्ता बाजार में उथल-पुथल, कीमतों में 50% से अधिक उछाल

31 मार्च 2026, नई दिल्ली: ईरान संकट से वैश्विक पिस्ता बाजार में उथल-पुथल, कीमतों में 50% से अधिक उछाल – वैश्विक बाजार में पिस्ता की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आयातक देशों में चिंता बढ़ गई है। यह उछाल केवल मांग के कारण नहीं, बल्कि आपूर्ति में आई गंभीर बाधाओं का परिणाम है, जिसका केंद्र ईरान है, जो दुनिया का लगभग 18–20 प्रतिशत पिस्ता उत्पादन करता है।

वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष की स्थिति ने ईरान से होने वाले निर्यात को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक बाजार में उपलब्धता घट गई है और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

उत्पादन में गिरावट ने बढ़ाई समस्या

पिस्ता बाजार पहले से ही कमजोर स्थिति में था। वर्ष 2025/2026 में वैश्विक उत्पादन घटकर लगभग 10.9 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2024/2025 के 11.9 लाख मीट्रिक टन से करीब 8 प्रतिशत कम है।

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वैश्विक पिस्ता उत्पादन स्थिति

मापदंडआंकड़े
10 वर्ष का औसत (एमवाई 2016–2025)8,86,348 मीट्रिक टन
10 वर्ष की औसत वृद्धि दर4%
2024/2025 उत्पादन11.9 लाख मीट्रिक टन
2025/2026 उत्पादन10.9 लाख मीट्रिक टन
वार्षिक बदलाव-8%

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बाजार को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त भंडार भी उपलब्ध नहीं है।

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कुछ देशों पर निर्भरता बनी बड़ी कमजोरी

पिस्ता उत्पादन विश्व में कुछ ही देशों तक सीमित है, जिससे आपूर्ति तंत्र अधिक संवेदनशील बन जाता है।

प्रमुख पिस्ता उत्पादक देश (2025/2026)

देश / क्षेत्रवैश्विक हिस्सेदारी (%)उत्पादन (मीट्रिक टन)
अमेरिका65%7,12,682
ईरान18%2,00,000
तुर्की11%1,20,000
यूरोपीय संघ4%40,000
सीरिया2%20,000

हालांकि अमेरिका सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन ईरान की भूमिका निर्यात बाजार में अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर एशिया और मध्य-पूर्व में।

ईरान संकट: उत्पादन नहीं, आपूर्ति में बाधा

विशेषज्ञों के अनुसार समस्या केवल उत्पादन की नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला की है। कई स्थानों पर उत्पादन हुआ है, लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

मुख्य समस्याएं:

  • निर्यात में बाधा: शिपिंग और बंदरगाह संचालन प्रभावित
  • वित्तीय अड़चनें: अंतरराष्ट्रीय भुगतान में कठिनाई
  • व्यापारिक अनिश्चितता: खरीदार जोखिम से बचने के लिए अन्य स्रोत तलाश रहे हैं

इसका परिणाम यह हुआ कि ईरान का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक बाजार तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।

कीमतों में तेज उछाल, भारत पर असर

आपूर्ति में कमी का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है, जो 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है, क्योंकि यहां ईरान प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है।

वर्तमान स्थिति में:

  • अमेरिकी पिस्ता की मांग बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति सीमित है
  • परिवहन और बीमा लागत में वृद्धि हुई है
  • व्यापारी भविष्य की कमी को देखते हुए भंडारण बढ़ा रहे हैं

विकल्प सीमित, राहत जल्द संभव नहीं

तुर्की जैसे देश उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे ईरान की कमी को तुरंत पूरा नहीं कर सकते। पिस्ता की खेती में समय लगता है, इसलिए नए उत्पादन क्षेत्रों से तुरंत राहत मिलना संभव नहीं है।

यदि ईरान से आपूर्ति में बाधा जारी रहती है, तो:

  • कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं
  • वैश्विक व्यापार में बदलाव आ सकता है
  • आयातक देश नए स्रोत तलाशेंगे

पिस्ता की बढ़ती कीमतें केवल एक बाजार की घटना नहीं, बल्कि वैश्विक कृषि आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी को उजागर करती हैं। जब उत्पादन कुछ देशों तक सीमित होता है, तो किसी भी भू-राजनीतिक संकट का असर सीधे कीमतों पर दिखाई देता है।

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