समन्वित कृषि प्रणाली से बढ़ेगी किसान आय, अनाज तक सीमित नहीं रहनी चाहिए खेती: शिवराज सिंह चौहान
30 जनवरी 2026, नई दिल्ली: समन्वित कृषि प्रणाली से बढ़ेगी किसान आय, अनाज तक सीमित नहीं रहनी चाहिए खेती: शिवराज सिंह चौहान – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंटीग्रेटेड या समन्वित कृषि प्रणाली को अब केवल अनाज उत्पादन तक सीमित रखना समयोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि खेती में फल, सब्जी और पशुपालन विशेष रूप से ऊँट, भेड़ और बकरी पालन को शामिल करने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कृषि अधिक लाभकारी बनेगी।
चौहान आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर में आयोजित संस्थान समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर थार के निर्माण के लिए एक ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें बीकानेर स्थित सभी अनुसंधान संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शीघ्र ही बीकानेर स्थित भाकृअनुप के विभिन्न संस्थानों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें समयबद्ध रूप से प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विशिष्ट फसलों, उन्नत बीजों, औषधीय खेती विशेष रूप से खेजड़ी के महत्व और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की आवश्यकता भी रेखांकित की।
श्री चौहान ने ऊँटनी के दूध को अत्यंत गुणकारी बताते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी है और मधुमेह जैसी बीमारियों के प्रबंधन में सहायक हो सकता है। उन्होंने केन्द्र द्वारा संचालित ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान की सराहना करते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि ऊँट पालन को आजीविका का मजबूत आधार बनाया जा सके।
संबोधन से पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने भाकृअनुप संस्थानों की उन्नत कृषि एवं पशुधन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, ऊँट फार्म में नवजात टोरडियों की देखभाल एवं स्वास्थ्य संबंधी कार्यों, उष्ट्र डेयरी में स्वच्छ उत्पादन, प्रसंस्करण एवं संकलन से जुड़ी वैज्ञानिक गतिविधियों तथा उष्ट्र संग्रहालय का निरीक्षण किया और इन प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने स्मरणीय उद्यान में पौधारोपण भी किया तथा ऊँट-गाड़ी की सवारी का अनुभव लिया।
कार्यक्रम में भाकृअनुप के सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि यदि बीकानेर स्थित भाकृअनुप के सातों संस्थान एक टीम के रूप में कार्य करें, तो थार क्षेत्र में स्थायी विकास और खुशहाली सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने ‘रेगिस्तान के जहाज’ कहे जाने वाले ऊँट की उपयोगिता को और अधिक प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए वैज्ञानिकों से अनुसंधान में नवाचार अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान एनआरसीसी, बीकानेर के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने मंत्री महोदय को केन्द्र में संचालित अनुसंधान गतिविधियों और ऊँटनी के दूध के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान की विस्तृत जानकारी दी और ऊँट प्रजाति से जुड़े अनुसंधान कार्यों को और अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर बीकानेर स्थित आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, पशुपालक, किसान एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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