Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारतीय चीनी उत्पादन में 28% उछाल, लेकिन गिरती कीमतों से किसानों और मिलों की बढ़ी चिंता

16 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: भारतीय चीनी उत्पादन में 28% उछाल, लेकिन गिरती कीमतों से किसानों और मिलों की बढ़ी चिंता – देश के चीनी उद्योग के लिए चालू 2025–26 सत्र की शुरुआत उत्साहजनक रही है। खेतों में गन्ने की अच्छी उपलब्धता और मिलों में तेज पेराई के चलते भारतीय चीनी उत्पादन ने इस बार शुरुआती दौर में ही मजबूत बढ़त दर्ज की है। हालांकि, दूसरी ओर चीनी की गिरती कीमतों ने मिलों की आर्थिक सेहत और किसानों को समय पर भुगतान को लेकर चिंता भी खड़ी कर दी है।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 तक देश में 78.25 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के 61.28 लाख टन की तुलना में करीब 28 प्रतिशत ज्यादा है। फिलहाल देशभर में 478 चीनी मिलें गन्ने की पेराई में जुटी हुई हैं, जो यह संकेत देता है कि सीजन अच्छी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है।

ग्रामीण स्तर पर हालात देखें तो कई राज्यों में गन्ने की पैदावार बेहतर रही है। खेतों से मिलों तक गन्ने की आवक बनी हुई है और रिकवरी भी संतोषजनक बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश में दिसंबर के मध्य तक 24.56 लाख टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया गया, जो पिछले साल से 1.52 लाख टन अधिक है। महाराष्ट्र में भी पेराई जोरों पर है, जहां 187 मिलें चालू हैं और अब तक 31.79 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। कर्नाटक में भी पिछले साल की तुलना में पेराई तेज और उत्पादन अधिक रहा है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

हालांकि, बढ़ते उत्पादन के बीच चीनी की कीमतें उद्योग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। प्रमुख उत्पादक राज्यों में एक्स-मिल चीनी कीमतें उत्पादन लागत से नीचे चली गई हैं। महाराष्ट्र में यह कीमत फिलहाल 3,600 से 3,660 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है, जिससे मिलों की नकदी स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

आईएसएमए का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो मिलों के लिए किसानों को गन्ने का समय पर भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में एसोसिएशन ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में तत्काल संशोधन की मांग की है, ताकि बढ़ी हुई लागत का संतुलन बन सके। उद्योग का मानना है कि एमएसपी में संशोधन से न केवल मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी, बल्कि किसानों को भी समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा — और इसके लिए सरकार पर किसी अतिरिक्त राजकोषीय बोझ की जरूरत नहीं होगी।

कुल मिलाकर, एक ओर जहां भारतीय चीनी उत्पादन इस सीजन मजबूत संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कीमतों का संकट यह याद दिला रहा है कि खेत, किसान और मिल — तीनों का संतुलन बनाए रखना ही इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture