राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत में नकली बीजों पर सख्ती: राज्यों को कार्रवाई के व्यापक अधिकार

10 फरवरी 2026, नई दिल्ली: भारत में नकली बीजों पर सख्ती: राज्यों को कार्रवाई के व्यापक अधिकार – भारत में नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा बीज कानूनों के तहत राज्य सरकारों को पूरी कार्रवाई की शक्ति दी गई है। इन कानूनों के माध्यम से राज्य स्तर पर बीजों की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के तहत राज्य सरकारें बीज निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकती हैं। ये निरीक्षक बीज दुकानों और गोदामों की जांच कर सकते हैं, नमूने ले सकते हैं और दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने, बीज का स्टॉक जब्त करने, बिक्री पर रोक लगाने और कानूनी कार्रवाई करने के अधिकार रखते हैं।

बीजों की डिजिटल निगरानी के लिए ‘साथी’ पोर्टल

नकली बीजों की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंट्री (SATHI) पोर्टल भी शुरू किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बीजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि किसान तक पहुंचने वाला बीज प्रमाणित और गुणवत्ता वाला हो।

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी है कि बीजों के भंडारण स्थलों, थोक और खुदरा दुकानों पर कड़ी निगरानी रखी जाए ताकि नकली या घटिया बीजों की बिक्री रोकी जा सके।

पारंपरिक और किसान किस्मों की सुरक्षा

सरकार ने यह भी बताया कि पारंपरिक और किसानों द्वारा विकसित बीजों की सुरक्षा के लिए पहले से ही कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम 2001 और जैव विविधता अधिनियम 2002 के तहत किसानों को अपने पारंपरिक बीजों के संरक्षण और उपयोग का अधिकार दिया गया है।

इन कानूनों के अनुसार किसान अपने खेत में पैदा किए गए बीज को बचा सकते हैं, बो सकते हैं, दोबारा बो सकते हैं, आपस में बांट सकते हैं और बेच भी सकते हैं।

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

पारंपरिक बीज उत्पादन को बढ़ावा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत पारंपरिक किस्मों के बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की सहायता दी जा रही है। इसमें किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराना, अनाज और मोटे अनाज के लिए ₹1000 प्रति क्विंटल तथा दलहन और तिलहन के लिए ₹2000 प्रति क्विंटल बीज उत्पादन प्रोत्साहन शामिल है। इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रम और सामुदायिक बीज बैंक स्थापित करने के लिए एक बार में ₹50 लाख तक की सहायता भी दी जा रही है।

पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत किसानों की किस्मों का पंजीकरण कर उन्हें बौद्धिक संपदा संरक्षण दिया जाता है। साथ ही पारंपरिक किस्मों के संरक्षण के लिए किसानों और समुदायों को सम्मान और ₹15 लाख तक की आर्थिक सहायता राष्ट्रीय जीन कोष से प्रदान की जाती है।

बीज लाइसेंस और कीमत नियंत्रण

सरकार ने स्पष्ट किया कि बीज व्यवसाय करने वाले किसी भी व्यक्ति, कंपनी या फर्म को बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के तहत राज्य सरकार से बीज विक्रेता लाइसेंस लेना अनिवार्य है। वहीं बागवानी नर्सरियों को संबंधित राज्यों के नर्सरी कानूनों के तहत पंजीकृत किया जाता है।

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बीटी कपास बीजों की कीमत को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कपास बीज मूल्य नियंत्रण आदेश 2015 लागू है, जिसके अंतर्गत हर वर्ष बीटी कपास बीजों की अधिकतम बिक्री कीमत तय की जाती है।

सस्ते और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने पर जोर

केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र को बीज अनुसंधान और अवसंरचना मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। वर्ष 2014 से 2025-26 के बीच फसलों की 3236 उच्च उत्पादक किस्में जारी की गई हैं, जिनमें से अधिकांश जलवायु-सहिष्णु किस्में हैं।

इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, तिलहन मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी योजनाओं के तहत किसानों को उन्नत किस्मों के बीज, मिनीकिट और अन्य सहायता दी जा रही है, जिससे खेती की लागत कम हो और उत्पादकता बढ़े।

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