सोयाबीन की उन्नत किस्में NRC 200 68 और NRC 200 ने दिए 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के संकेत
14 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन की उन्नत किस्में NRC 200 68 और NRC 200 ने दिए 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के संकेत – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर में सोयाबीन की उन्नत किस्मों NRC 200 68 और NRC 200 70 का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। 9 अक्टूबर 2026 को आयोजित सोयाबीन कटाई दिवस के दौरान दोनों किस्मों की उत्पादन क्षमता का आकलन किया गया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, दोनों किस्मों से लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिलने के संकेत मिले हैं। यह आकलन प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों में सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने की संभावनाओं को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
एक एकड़ क्षेत्र में किया गया उपज का आकलन
संस्थान द्वारा विकसित दोनों किस्मों के एक-एक एकड़ क्षेत्र में कटाई के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उत्पादन क्षमता का शुरुआती आकलन किया गया। वर्तमान में देश में सोयाबीन की औसत उत्पादकता लगभग 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। ऐसे में उन्नत किस्मों से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज के संकेत मिलने से उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं सामने आई हैं।
सोयाबीन कटाई दिवस का मुख्य उद्देश्य उन्नत किस्मों की उत्पादन क्षमता का आकलन करना और उपज के आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन करना है। कटाई से मिले आंकड़ों का आगे वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा, जिससे किस्मों के प्रदर्शन और उत्पादन पर विभिन्न परिस्थितियों के प्रभाव को समझने में मदद मिलेगी।
अनुकूल मौसम में 25 क्विंटल तक उपज की संभावना
ICAR-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान और अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के तहत देशभर में किए जा रहे अनुसंधान एवं परीक्षणों के आंकड़े बताते हैं कि उन्नत किस्मों और उपयुक्त उत्पादन तकनीकों को अपनाकर 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। अनुकूल परिस्थितियों में यह उत्पादन लगभग 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है।
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने शुरुआती आंकड़ों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने में उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के बावजूद दोनों किस्मों से लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज के संकेत सकारात्मक हैं। इन आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण भविष्य की अनुसंधान रणनीतियों को दिशा देने में मदद करेगा।
कई वर्षों के आंकड़ों से मिलेगी उत्पादन की जानकारी
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के निदेशक के अनुसार, कटाई दिवस के आंकड़ों का महत्व केवल एक वर्ष की उपज के आकलन तक सीमित नहीं है। इन आंकड़ों को नियमित रूप से संकलित कर कई वर्षों तक विश्लेषण करने से विभिन्न क्षेत्रों, किस्मों और उत्पादन परिस्थितियों में उत्पादकता में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।
दीर्घकालीन आंकड़ों से हर साल उत्पादकता में होने वाली प्रगति का आकलन किया जा सकेगा। साथ ही, भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं का अनुमान लगाने और अनुसंधान व तकनीकी प्रसार की प्रभावशीलता समझने के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार होगा। संस्थान का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से सोयाबीन की विभिन्न किस्मों की वास्तविक उत्पादन क्षमता का आकलन करना, उन्नत तकनीकों के प्रभाव को समझना और किसानों तक अधिक उत्पादक किस्मों एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाना है। इससे सोयाबीन अनुसंधान, कृषि विस्तार और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के बीच समन्वय मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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