राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

आईक्रिसैट और यूएएस धारवाड़ ने विकसित की मूंगफली की दो नई हाई-ओलिक किस्में

प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों के लिए उच्च उपज और प्रीमियम गुणवत्ता वाली किस्में किसानों की आय बढ़ाने में होंगी सहायक

02 जुलाई 2026, नई दिल्ली: आईक्रिसैट और यूएएस धारवाड़ ने विकसित की मूंगफली की दो नई हाई-ओलिक किस्में –  भारतीय मूंगफली किसानों के लिए अच्छी खबर है। इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (आईक्रिसैट) और उसके शोध साझेदारों द्वारा विकसित मूंगफली की दो नई हाई-ओलिक किस्में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारत की खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला को भी मजबूत करेंगी। ये किस्में अधिक उपज के साथ बेहतर गुणवत्ता का खाद्य तेल उपलब्ध कराती हैं, जिससे किसानों को प्रीमियम बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

नई किस्मों ICGV 201214 और ICGV 181030 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अखिल भारतीय समन्वित मूंगफली अनुसंधान परियोजना (AICRP-G) की वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी (VIC) ने राष्ट्रीय स्तर पर जारी करने के लिए मंजूरी दी है। यह निर्णय 21 से 23 अप्रैल 2026 के बीच पुणे में आयोजित वार्षिक समूह बैठक में लिया गया।

यह उपलब्धि भारत के तिलहन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि ICGV 181030 ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अनुशंसित पहली हाई-ओलिक मूंगफली किस्म बन गई है।

हाई-ओलिक मूंगफली में सामान्य किस्मों की तुलना में ओलिक अम्ल (Oleic Acid) की मात्रा काफी अधिक होती है। इससे प्राप्त खाद्य तेल अधिक समय तक सुरक्षित रहता है, ऑक्सीकरण के प्रति अधिक स्थिर होता है तथा पोषण की दृष्टि से भी बेहतर माना जाता है। यही कारण है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, खाद्य निर्माता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए पहली हाई-ओलिक मूंगफली

ICGV 181030 (ICDh 181030) का संयुक्त रूप से विकास आईक्रिसैट और यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (यूएएस), धारवाड़ ने किया है।

यह मध्यम अवधि की स्पेनिश बंच किस्म खरीफ मौसम में जोन-II (गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र) तथा जोन-IV (झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों) में खेती के लिए अनुशंसित की गई है।

आईक्रिसैट में मूंगफली प्रजनन की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जनीला पसुपुलेटी के अनुसार, इस किस्म में लगभग 78 प्रतिशत ओलिक अम्ल पाया जाता है। तीन वर्षों के परीक्षणों में इसने जोन-IV में मानक किस्म गिरनार-3 की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक फली उत्पादन दिया, जबकि जोन-II में टीजी-37ए के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक उपज दर्ज की।

अधिक तेल और बेहतर बाजार क्षमता वाली दूसरी किस्म

दूसरी किस्म ICGV 201214 (ICGG 107) का विकास आईक्रिसैट और जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया है।

गुजरात और राजस्थान के लिए खरीफ मौसम में अनुशंसित इस मध्यम अवधि की स्पेनिश बंच किस्म में 81 प्रतिशत ओलिक अम्ल, 53 प्रतिशत तेलतथा 27 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। इसके दाने बड़े, आकर्षक और बाजार की मांग के अनुरूप हैं, जिससे किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग दोनों को लाभ मिलेगा।

तीन वर्षों तक विभिन्न स्थानों पर किए गए परीक्षणों में इस किस्म ने तेल की मात्रा के मामले में सभी मानक किस्मों से बेहतर प्रदर्शन किया। साथ ही, व्यापक रूप से उगाई जाने वाली जेएल-501 किस्म की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक गिरी (कर्नेल) उत्पादन दर्ज किया।

साझेदारी से फसल सुधार को मिली नई दिशा

आईक्रिसैट के ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम निदेशक (एक्सीलरेटेड क्रॉप इम्प्रूवमेंट) डॉ. रमन बाबू ने कहा कि आधुनिक फसल सुधार का उद्देश्य ऐसी किस्में विकसित करना होना चाहिए जो किसानों, उपभोक्ताओं और उद्योग—तीनों के लिए समान रूप से मूल्य सृजित करें।

उन्होंने कहा कि नई हाई-ओलिक मूंगफली किस्में इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि उन्नत पादप प्रजनन तकनीकों और संस्थागत सहयोग के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, पोषण गुणवत्ता में सुधार करने और भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक साथ काम किया जा सकता है।

आईक्रिसैट के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि यूएएस धारवाड़ और जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के साथ संस्थान की दीर्घकालिक साझेदारी ने भारत में हाई-ओलिक मूंगफली अनुसंधान को नई गति दी है।

उन्होंने कहा कि गिरनार-4 और गिरनार-5 जैसी सफल किस्मों के बाद विकसित ये नई किस्में किसानों की आय बढ़ाने, देश के खाद्य तेल क्षेत्र को मजबूत करने तथा उपभोक्ताओं को अधिक स्वास्थ्यवर्धक खाद्य तेल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उपयुक्त होने के कारण इन नई किस्मों से राष्ट्रीय खाद्य तेल–तिलहन मिशन (NMEO-Oilseeds) के तहत मूंगफली के रकबे के विस्तार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अधिक उत्पादकता, बेहतर तेल गुणवत्ता और मजबूत बाजार मांग का यह संयोजन भारत के तिलहन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों, प्रसंस्करण उद्योग और उपभोक्ताओं—तीनों के लिए अधिक मूल्य सृजित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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