किसानों के लिए खुशखबरी: ICAR ने विकसित की ‘प्रगति’ हल्दी किस्म, कम समय में देगी ज्यादा उपज और बेहतर मुनाफा
11 मई 2026, नई दिल्ली: किसानों के लिए खुशखबरी: ICAR ने विकसित की ‘प्रगति’ हल्दी किस्म, कम समय में देगी ज्यादा उपज और बेहतर मुनाफा – बदलते जलवायु हालात और खेती पर बढ़ते प्राकृतिक दबाव के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बड़ी राहत दी है। ICAR–भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझीकोड ने हल्दी की एक नई उन्नत किस्म ‘प्रगति’ विकसित की है, जो कम समय में अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ मौसम की चुनौतियों को भी बेहतर तरीके से झेल सकती है। यह नई किस्म किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
‘प्रगति’ हल्दी किस्म को विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि यह कम पानी, अधिक तापमान, पाला और कीटों के प्रभाव में भी बेहतर उत्पादन दे सके। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति काफी हद तक सहनशील है, जिससे फसल का नुकसान कम होगा और किसानों को स्थिर उपज मिल सकेगी।
180 दिन में तैयार होगी फसल
इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका जल्दी तैयार होना है। ‘प्रगति’ हल्दी मात्र 180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में फसल चक्र पूरा कर अगली खेती की योजना बनाने का अवसर मिलता है। यह विशेषता इसे पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक लाभकारी बनाती है।
बेहतर गुणवत्ता और बाजार में अधिक मूल्य
ICAR के अनुसार इस किस्म में करक्यूमिन की मात्रा लगभग 5.55 प्रतिशत पाई गई है, जो हल्दी की गुणवत्ता और बाजार मूल्य को बढ़ाती है। इसके अलावा इसमें लगभग 13 प्रतिशत ओलियोरेसिन मौजूद है, जिससे यह प्रसंस्करण और निर्यात के लिए भी उपयुक्त बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी गुणवत्ता के कारण किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो सकता है।
कीटों से सुरक्षा और कम नुकसान
‘प्रगति’ किस्म नेमाटोड जैसे हानिकारक कीटों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है। इससे फसल में रोग और नुकसान की संभावना कम हो जाती है, जिससे उत्पादन अधिक सुरक्षित और स्थिर रहता है।
इन राज्यों के लिए उपयुक्त
यह किस्म केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की जलवायु के लिए उपयुक्त मानी गई है। इन क्षेत्रों में किसान इस किस्म से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
हल्दी की खेती का वैज्ञानिक तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी की बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर 75 क्विंटल नाडेप खाद या 200-250 क्विंटल सड़ी गोबर खाद का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी गई है। बुवाई 40×20 सेंटीमीटर की दूरी पर और 4 सेंटीमीटर की गहराई में करनी चाहिए। बीजों को बोने से पहले कॉपर ऑक्सीक्लोराइड घोल से उपचारित करना जरूरी बताया गया है।
किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘प्रगति’ हल्दी किस्म किसानों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। कम समय में तैयार होने, बेहतर गुणवत्ता और अधिक उपज के कारण यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह औषधीय और ब्यूटी प्रोडक्ट उद्योग के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
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