महाराष्ट्र के किसानों को मिलेगा बड़ा सहारा, लोकसभा में मंत्री शिवराज ने NDRF फंड से राहत की घोषणा की
09 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: महाराष्ट्र के किसानों को मिलेगा बड़ा सहारा, लोकसभा में मंत्री शिवराज ने NDRF फंड से राहत की घोषणा की – लोकसभा में केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और किसानों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार जलवायु परिवर्तन के कारण महाराष्ट्र में किसानों को होने वाले नुकसान के लिए NDRF (नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड) से राहत प्रदान करेगी। यदि राज्य में किसी प्राकृतिक आपदा, जैसे बारिश, सूखा, ओलावृष्टि या अन्य मौसमीय उतार-चढ़ाव के कारण 33% या उससे अधिक फसल हानि होती है, तो प्रभावित किसानों को SDRF (State Disaster Response Fund) के तहत वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह राहत राशि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को फसल नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।
मंत्री ने लोकसभा में यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पीडीएमसी योजना (कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन) के तहत महाराष्ट्र को ₹3,000 करोड़ से अधिक की केंद्रीय सहायता दी है, जिससे लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है। इस सहायता का लाभ 11 लाख किसानों को हुआ है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन, सूखा, और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान से बचाना और उनके लिए स्थिरता प्रदान करना है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपाय
शिवराज सिंह चौहान ने जलवायु परिवर्तन को भारत की कृषि के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है, जहां इसका असर सबसे तेजी से देखा जा रहा है। उन्होंने यह जानकारी दी कि ICAR की NICRA (राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवाचार) परियोजना के तहत महाराष्ट्र के कई जिलों में जलवायु के प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि जोखिम और संवेदनशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। चौहान ने कहा कि नांदेड़ और नंदुरबार जैसे जिले अत्यधिक जोखिम में हैं, जबकि अकोला, वर्धा, हिंगोली, परभणी, अहमदनगर, लातूर और जालना जैसे जिलों को उच्च जोखिम वाले जिलों के रूप में पहचाना गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि NICRA परियोजना के तहत सामुदायिक तालाब, जलकुंड, नाली सिंचाई, माइक्रो इरिगेशन और मल्चिंग जैसी जल संरक्षण और दक्षता बढ़ाने वाली तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से किसानों को जल संकट और सूखा जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिल रही है। इसके अलावा, सोयाबीन और काबुली चने की उन्नत किस्मों पर भी काम जारी है, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ सके।
कृषि संकट में पशुपालन पर भी ध्यान
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी उल्लेख किया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पशुपालन पर भी पड़ रहा है, क्योंकि चरागाह, पानी की उपलब्धता और पशु स्वास्थ्य सीधे तौर पर मौसम के बदलावों से प्रभावित होते हैं। इस संदर्भ में भी सरकार की प्राथमिकताएं तय की गई हैं और किसानों को इस क्षेत्र में भी सहायता दी जा रही है।
फसल बीमा योजना से किसानों को राहत
कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक राज्य में ₹26,342 करोड़ के बीमा दावे किसानों को दिए जा चुके हैं। इसके अलावा, यदि बीमा कंपनियां भुगतान में देरी करती हैं, तो उन्हें 12% ब्याज भी देना होगा।
केंद्र और राज्य की संयुक्त पहल
मंत्री ने यह आश्वासन भी दिया कि वे स्वयं महाराष्ट्र का दौरा कर चुके हैं और जहां भी फसल नुकसान का आकलन पूरा होगा, केंद्र सरकार फसल बीमा और NDRF दोनों माध्यमों से किसानों को राहत राशि प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में, किसानों को सहायता देने में सक्रिय रूप से काम कर रही है। केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महाराष्ट्र की कृषि जलवायु परिवर्तन के संकट के बावजूद सुरक्षित और टिकाऊ बनी रहे।
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