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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए छोटे किसानों का सशक्तिकरण जरूरी : ब्रिक्स बैठक में बोले  शिवराज सिंह चौहान

13 जून 2026, इंदौर: वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए छोटे किसानों का सशक्तिकरण जरूरी : ब्रिक्स बैठक में बोले  शिवराज सिंह चौहान – वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने और कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के प्रति अधिक लचीला बनाने के लिए छोटे किसानों का सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। यह बात भारत के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र में कही।

ब्रिक्स देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि दुनिया भर की कृषि आज कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव, खेती की बढ़ती लागत और कृषि बाजारों में अनिश्चितता जैसी समस्याएं किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। ऐसे समय में छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि छोटे किसान दुनिया की खाद्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि उन्हें बेहतर तकनीक, वित्तीय संसाधन, नवाचार, बाजार और ज्ञान तक पहुंच मिले तो कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि विकास को भी गति मिलेगी।

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चौहान ने कहा, “टिकाऊ कृषि विकास के लिए छोटे और सीमांत किसानों का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसान आर्थिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और लचीली होगी।”

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खाद्य सुरक्षा के केंद्र में छोटे किसान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया की बढ़ती आबादी के लिए खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने में छोटे किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन, बाजार में उतार-चढ़ाव और आर्थिक जोखिमों का सबसे अधिक प्रभाव इसी वर्ग पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि छोटे किसानों की क्षमता बढ़ाना और उन्हें बदलती परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना सभी देशों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे न केवल ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक खाद्य प्रणालियां भी अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेंगी।

बदलती कृषि चुनौतियों के बीच ब्रिक्स सहयोग की जरूरत

इंदौर में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि, टिकाऊ खेती, कृषि नवाचार और किसान कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।

चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास कृषि क्षेत्र की साझा चुनौतियों का समाधान खोजने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और नीतिगत साझेदारी के माध्यम से सदस्य देश किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक कृषि सहयोग को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया को एक परिवार मानने का भारतीय दृष्टिकोण आज पहले से अधिक प्रासंगिक है।

उनके अनुसार, सहयोग और साझेदारी की यही भावना जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी, बाजार अस्थिरता और बढ़ती खाद्य मांग जैसी चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने में मदद कर सकती है।

कृषि के भविष्य को दिशा देंगे तकनीक और टिकाऊ विकास

चौहान ने कृषि क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कृषि, प्रिसिजन फार्मिंग, कृषि स्टार्टअप और नवाचार आधारित समाधान किसानों को कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करने में मदद कर रहे हैं।

साथ ही उन्होंने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्राकृतिक खेती, जलवायु-स्मार्ट कृषि और कृषि आदानों के संतुलित उपयोग को उन्होंने भविष्य की कृषि के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कृषि परिवर्तन में महिलाओं और युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और यही भविष्य के कृषि परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत होगी।

उन्होंने कहा कि महिलाएं कृषि और संबद्ध गतिविधियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं, जबकि युवा उद्यमी और एग्री-टेक स्टार्टअप आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेती को अधिक कुशल और लाभकारी बना रहे हैं।

चौहान के अनुसार, महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी, उत्पादक और मजबूत बनाने में मदद करेगी।

मजबूत वैश्विक खाद्य प्रणाली की दिशा में

ब्रिक्स देशों से सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए चौहान ने कहा कि अनुसंधान साझेदारी, तकनीकी हस्तांतरण, ज्ञान साझा करने और नीतिगत संवाद को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंदौर में हो रही चर्चा किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने में मदद करेगी और एक सुरक्षित, टिकाऊ तथा समावेशी वैश्विक खाद्य प्रणाली के निर्माण में योगदान देगी।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, सीमित प्राकृतिक संसाधनों और बढ़ती खाद्य मांग के दौर में दुनिया भर की सरकारों को छोटे किसानों की आर्थिक और तकनीकी क्षमता बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

चौहान ने कहा, “वैश्विक खाद्य सुरक्षा की शुरुआत समृद्ध और सशक्त किसानों से होती है।”


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