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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने पर जोर, 2030 तक 85 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

05 सितंबर 2026, नई दिल्ली: प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने पर जोर, 2030 तक 85 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य – देश में प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों और मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए किसानों को इससे जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया।

24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके

समीक्षा बैठक में बताया गया कि देशभर में अब तक 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का प्रयास प्राकृतिक खेती को केवल वैकल्पिक कृषि पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि किसानों की उत्पादन लागत घटाने, आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने के माध्यम के रूप में विकसित करना है।

अनुसंधान को मजबूत करने की आवश्यकता

बैठक में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की उत्पादन लागत, उत्पादकता और शुद्ध आय का तुलनात्मक एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य में होने वाले बदलाव, प्राकृतिक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार, प्रमाणन व्यवस्था, किसान उत्पादक संगठनों की भूमिका, प्रशिक्षण तथा अनुसंधान को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।

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केंद्रीय कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती के वास्तविक प्रभावों का आकलन केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी आंकड़ों और किसानों के अनुभवों के आधार पर किया जाए। इसके लिए प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की लागत, उत्पादन, बाजार मूल्य और शुद्ध आय की तुलना पारंपरिक खेती से करने को कहा गया है।

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सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक अध्ययन से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद किसानों की आर्थिक स्थिति में कितना वास्तविक सुधार आया है। किसानों के अनुभव, अनुसंधान संस्थानों के निष्कर्ष और मैदानी आंकड़ों को एक साथ जोड़कर इसके आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा। इससे भविष्य में प्राकृतिक खेती की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

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