डॉ. अशोक कुमार सिंह को बासमती अनुसंधान में ऐतिहासिक योगदान के लिए पद्मश्री
27 जनवरी 2026, नई दिल्ली: डॉ. अशोक कुमार सिंह को बासमती अनुसंधान में ऐतिहासिक योगदान के लिए पद्मश्री – देश में बासमती धान अनुसंधान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को इस वर्ष पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान कृषि विज्ञान के क्षेत्र में, विशेष रूप से बासमती धान की उन्नत किस्मों के विकास के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और भारत की निर्यात क्षमता को सशक्त करने के लिए प्रदान किया जा रहा है।
डॉ. सिंह का लगभग तीन दशक का कार्यकाल आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली में रहा है। इस दौरान उन्होंने बासमती धान की 25 उन्नत किस्मों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई। आज ये किस्में देश में लगभग 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई जा रही हैं और उत्तर भारत के लाखों किसानों की आजीविका को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रही हैं। इन किस्मों ने न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि दाने की गुणवत्ता, सुगंध और निर्यात मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। आईसीएआर–आईएआरआई के पूर्व निदेशक रह चुके डॉ. सिंह को अपने करियर में अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
इनमें रफ़ी अहमद किदवई पुरस्कार, भारत रत्न डॉ. सी. सुब्रमण्यम पुरस्कार, नानाजी देशमुख अंतरविषयक टीम पुरस्कार, बोरलॉग अवॉर्ड, आईएआरआई सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार, डॉ. बी.पी. पाल पुरस्कार, वासविक पुरस्कार, ओम प्रकाश भसीन पुरस्कार और डी.एस. बराड़ पुरस्कार शामिल हैं। डॉ. सिंह ने अब तक दो पुस्तकें लिखी हैं और 250 से अधिक शोध पत्र देश-विदेश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं। वे इंडियन नेशनल साइंस अकादमी (INSA), नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज़, इंडिया (NASI) तथा नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (NAAS) के फेलो हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व छात्र डॉ. सिंह ने कृषि में स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की और धान प्रजनन विषय पर शोध के लिए आईसीएआर–आईएआरआई से पीएचडी की उपाधि हासिल की।
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