US में बढ़ी असम के शहद की मांग, 20 मीट्रिक टन की पहली खेप रवाना; किसानों को मिलेंगे 43% अधिक दाम
11 मई 2026, नई दिल्ली: US में बढ़ी असम के शहद की मांग, 20 मीट्रिक टन की पहली खेप रवाना; किसानों को मिलेंगे 43% अधिक दाम – भारत के कृषि निर्यात को नई दिशा देने और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल को मजबूत बनाने की दिशा में असम ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। असम के आकांक्षी जिले बाक्सा से 20 मीट्रिक टन शहद की पहली निर्यात खेप अमेरिका के लिए रवाना की गई है। यह निर्यात 9 मई 2026 को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की पहल के माध्यम से किया गया। उत्तर-पूर्व क्षेत्र की एपीडा-पंजीकृत निर्यातक कंपनी सॉल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने इस खेप को अमेरिका भेजा है।
असम अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने वन संसाधनों और मधुमक्खी पालन की पारंपरिक संस्कृति के लिए जाना जाता है। राज्य की कार्बी, मिशिंग और बोडो जनजातियां सदियों से शहद संग्रहण और उत्पादन से जुड़ी रही हैं। यहां शहद का उपयोग केवल खाद्य पदार्थ के रूप में ही नहीं, बल्कि औषधीय, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों में भी किया जाता रहा है। यही वजह है कि असम का शहद अपनी शुद्धता और प्राकृतिक गुणों के कारण देश-विदेश में पहचान बना रहा है।
पर्यावरण के अनुकूल और कीटनाशक मुक्त वातावरण में तैयार होने वाला बाक्सा जिले का शहद उच्च गुणवत्ता और लगभग जैविक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। इसकी प्राकृतिक मिठास, समृद्ध पुष्प विविधता और औषधीय गुणों को देखते हुए इसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर किसानों और उत्पादकों की आय बढ़ाना है।
किसानों को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ
इस निर्यात पहल से स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, शहद उत्पादकों को स्थानीय बाजार की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त होगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने के बाद क्षेत्र में मधुमक्खी पालन को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।
एपीडा ने उपलब्ध कराई आधुनिक सुविधाएं
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत एपीडा ने इस निर्यात को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्था ने प्रसंस्करण इकाइयों में परीक्षण और प्रयोगशाला उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बुनियादी ढांचे के विकास में भी सहायता दी। इससे अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सका।
उत्तर-पूर्व के उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, असम ने वर्ष 2023-24 में करीब 1,650 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया। राज्य के बाक्सा, कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी और तामुलपुर जैसे जिले प्रमुख शहद उत्पादक क्षेत्र हैं। इस निर्यात पहल ने उत्तर-पूर्व भारत की कृषि निर्यात क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
ओडीओपी योजना से मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
भारत सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पाद को ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराना है। इससे मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। असम के शहद का अमेरिका निर्यात इस पहल की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जो किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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