नए बीज कानून पर मंथन: नकली बीज बेचने पर 30 लाख जुर्माना और जेल, किसान संगठनों से मंत्री की चर्चा
11 सितंबर 2026, नई दिल्ली: नए बीज कानून पर मंथन: नकली बीज बेचने पर 30 लाख जुर्माना और जेल, किसान संगठनों से मंत्री की चर्चा – केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में देश के प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें नए बीज कानून के मसौदे पर चर्चा हुई। यह प्रस्तावित कानून 60 साल पुराने बीज अधिनियम 1966 की जगह लेगा।
बैठक में मंत्री ने बताया कि नए कानून में बीज की हर पैकेजिंग पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिससे हर बैग को ट्रैक किया जा सकेगा। नकली या घटिया बीज बेचने वालों पर 30 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही पर जोर
चौहान ने बैठक में कहा, “हम अब भरोसे, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही पर आधारित एक आधुनिक कानून ला रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी किसान को ठगा न जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी बीज कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
बैठक में भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति और दक्षिण भारतीय किसान संघ समेत कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार, तमिलनाडु, झारखंड और केरल के किसान नेता शामिल हुए। मंत्रालय के मुताबिक, संसद में बिल पेश करने से पहले किसानों की राय ली जा रही है।
यह पहला मौका नहीं है जब चौहान ने बीज कानून सख्त बनाने का संकेत दिया हो। इससे पहले मार्च 2026 में मसूरी में हुए एक कार्यक्रम में भी मंत्री ने बीज गुणवत्ता कानून को सख्त बनाने की जरूरत पर बात की थी। ताजा बैठक इसी दिशा में मसौदे को अंतिम रूप देने की एक कड़ी है।
बीज नियंत्रण आदेश 1983 भी बदलेगा
मौजूदा बीज अधिनियम 1966 और बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 दोनों दशकों पुराने हैं और इनमें नकली बीज बेचने पर सजा का कोई सख्त प्रावधान नहीं है। नया कानून बीज उत्पादन से लेकर बिक्री तक हर चरण को डिजिटल रूप से दर्ज करेगा।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, हर साल कई किसान घटिया या नकली बीज के कारण फसल खराब होने की शिकायत करते हैं, खासकर कपास, सोयाबीन और सब्जियों के बीज में। नया कानून बीज कंपनियों के लाइसेंस, बैच नंबर और शुद्धता की जांच को अनिवार्य बनाएगा। मंत्रालय ने किसान संगठनों से लिखित सुझाव भी मांगे हैं, जिन्हें अंतिम मसौदा तैयार करते समय शामिल किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अभी नकली बीज बेचने की शिकायत दर्ज कराने और उस पर कार्रवाई होने में लंबा समय लग जाता है, जिससे किसानों को खराब हुई फसल का नुकसान भरने में मदद नहीं मिल पाती। नए कानून में तेज सुनवाई और सख्त सजा का प्रावधान किसानों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, संसद में बिल पेश करने से पहले राज्य सरकारों और बीज उद्योग के प्रतिनिधियों से भी अलग से बातचीत की जाएगी, ताकि छोटे और बड़े दोनों तरह के बीज उत्पादकों की व्यावहारिक स्थिति को कानून में शामिल किया जा सके। मंत्रालय का कहना है कि क्यूआर कोड आधारित ट्रेसेबिलिटी से यह पता लगाना आसान होगा कि कोई बीज किस कंपनी, किस बैच और किस खेत से आया है, जिससे गड़बड़ी करने वाली कंपनी की पहचान तुरंत हो सकेगी।
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