राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत को ‘विश्व की फूड बास्केट’ बनाने की ओर केंद्र का कदम, प्राकृतिक खेती से किसान सशक्तिकरण पर जोर

24 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: भारत को ‘विश्व की फूड बास्केट’ बनाने की ओर केंद्र का कदम, प्राकृतिक खेती से किसान सशक्तिकरण पर जोर – कृषि क्षेत्र में भारत की सशक्त भूमिका ने वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ी है। कोविड महामारी के दौरान, जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं लड़खड़ा रही थीं, भारत का कृषि क्षेत्र मजबूती से खड़ा रहा। देश की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 18% है, जो इसकी महत्ता को रेखांकित करता है। इस पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को और सुदृढ़ करने के लिए कई योजनाओं पर काम तेज किया है।

पुणे स्थित गोखले राजनीति एवं अर्थशास्त्र संस्थान (एईआरसी) के प्लेटिनम जुबली सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र को भविष्य की दिशा में और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि “भारत को विश्व की फूड बास्केट बनाने के लक्ष्य में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शोधकर्ताओं का कार्य केवल लैब तक सीमित न रहे। इसे किसानों तक पहुंचाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी जानकारियों को अंग्रेजी तक सीमित रखने की बजाय देश की विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित करना चाहिए, ताकि “लैब टू लैंड” की दूरी खत्म की जा सके।

किसानों की भंडारण क्षमता और विपणन को बढ़ावा

श्री चौहान ने कहा कि किसानों की भंडारण क्षमता बढ़ाने और उनके उत्पादों को दूरदराज के बाजारों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई योजना पर काम कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य है कि किसान अपने उत्पादों को बेहतर मूल्य पर बेच सकें और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।

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प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का संदेश

उन्होंने कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग पर चिंता जताई और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की आवश्यकता बताई। इसके जरिए कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन (वैल्यू एडिशन) किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि कम पानी में अधिक सिंचाई की तकनीक विकसित करना समय की मांग है, जिससे किसानों को सूखे और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।

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डीडी किसान चैनल पर विशेष कार्यक्रम आधुनिक कृषि चौपाल

कृषि मंत्री ने कहा कि डीडी किसान चैनल पर ‘आधुनिक कृषि चौपाल’ नामक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह मंच किसानों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को जोड़कर कृषि क्षेत्र की समस्याओं और नए अवसरों पर विचार-विमर्श का माध्यम बनेगा।

नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत 25 दिसंबर को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही देश में नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ करेंगे। इस योजना का उद्देश्य बाढ़ और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के लिए जल संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करना है। श्री चौहान ने कहा कि जहां अधिक बारिश होती है, वहां का पानी सूखे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाकर कृषि और जल प्रबंधन में सुधार किया जा सकेगा।

मंत्री ने कहा कि उत्पादन लागत घटाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। 2014 से 2024 के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सुधार और किसानों को त्वरित धनराशि उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं लागू की गईं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 1.94 मिलियन टन सब्सिडी किसानों को प्रदान की गई, जिससे उन्हें काफी राहत मिली।

चौहान ने कहा कि भारत को आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जो किसानों के लिए लाभप्रद हों। इस दिशा में केंद्र सरकार के प्रयास भविष्य में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित हो सकते हैं।

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