राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि मंत्री की ICAR संग बड़ी बैठक, बढ़ेगी दलहन-तिलहन पैदावार

09 मई 2025, नई दिल्ली: कृषि मंत्री की ICAR संग बड़ी बैठक, बढ़ेगी दलहन-तिलहन पैदावार – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते 29 अप्रैल को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के महानिदेशक और उप-महानिदेशकों के साथ नई दिल्ली के पूसा परिसर में एक लंबी बैठक की। इस बैठक का मकसद कृषि अनुसंधान को मजबूत करना, नवाचार को बढ़ावा देना और मौजूदा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना था।

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने भाकृअनुप के विभिन्न प्रभागों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की जानकारी ली और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “जब अंतिम पंक्ति का किसान समृद्ध बनेगा, तभी विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा।” मंत्री ने गेहूं और चावल के साथ-साथ दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाजों की पैदावार बढ़ाने के लिए बेहतर बीज किस्में विकसित करने पर जोर दिया।

दलहन और सोयाबीन पर विशेष ध्यान

चौहान ने दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने सोयाबीन की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ चर्चा करने की योजना भी साझा की। इसके अलावा, मृदा परीक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की गुणवत्ता का आकलन जरूरी है।

कीटनाशकों और बाजार व्यवस्था पर चर्चा

बैठक में कीटनाशकों के सही उपयोग पर भी बात हुई। चौहान ने कहा कि इस क्षेत्र में और अधिक शोध की जरूरत है ताकि किसानों को सुरक्षित और प्रभावी समाधान मिल सकें। उन्होंने खेत से बाजार तक की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की बात भी उठाई और ग्रामीण स्तर पर इस व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कृषि समितियों की भूमिका पर जोर दिया।

जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा करते हुए मंत्री ने अनुकूल खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों को प्रमाणित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक व्यवस्था बनाई जाए। छोटे किसानों के लिए मॉडल फार्म विकसित करने की योजना भी बैठक का हिस्सा रही।

कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका

कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) पर चर्चा करते हुए चौहान ने कहा, “किसानों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ने में केवीके से बेहतर कोई मंच नहीं है।” उन्होंने उन केवीके के प्रदर्शन को बेहतर करने की जरूरत बताई जहां कार्यक्षमता में कमी है। साथ ही, उन्होंने मांग आधारित सेवाओं के लिए एक तंत्र विकसित करने और महिलाओं व युवाओं को कृषि प्रसार से जोड़ने का सुझाव दिया।

बैठक में कौन-कौन शामिल?

बैठक में भाकृअनुप के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, सभी उप-महानिदेशक, सहायक महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह बैठक कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कृषि क्षेत्र में चुनौतियां कम नहीं हैं। मिट्टी की उर्वरता, जलवायु परिवर्तन और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों से निपटने के लिए ठोस और वैज्ञानिक प्रयासों की जरूरत है। इस बैठक के नतीजे आने वाले समय में कितने प्रभावी साबित होंगे, यह देखना बाकी है।

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