100 जिलों में कृषि विकास को रफ्तार, धन-धान्य योजना की समीक्षा में सुधार पर जोर
05 सितंबर 2026, नई दिल्ली: 100 जिलों में कृषि विकास को रफ्तार, धन-धान्य योजना की समीक्षा में सुधार पर जोर – देश के कम कृषि उत्पादकता वाले 100 जिलों में खेती को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन की रफ्तार तेज कर दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं के बेहतर समन्वय, जिला स्तर पर प्रदर्शन में सुधार और किसानों को मिल रहे वास्तविक लाभ का आकलन करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों के आधार पर चयनित 100 जिलों का औसत प्रदर्शन स्कोर अप्रैल 2026 के 22.54 से बढ़कर जुलाई 2026 में 38.85 हो गया। यानी करीब तीन माह की अवधि में औसत स्कोर में 16.31 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। सरकार का जोर अब इस प्रगति को जमीनी स्तर पर किसानों की आय, उत्पादन और कृषि सुविधाओं में दिखाई देने वाले बदलाव में बदलने पर है।
6.90 लाख किसानों को मिला प्रशिक्षण
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 6,90,530 किसानों और 88,961 विस्तार कर्मियों को विभिन्न कृषि कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर उत्पादन और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाना है।
क्या है धन-धान्य कृषि योजना?
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत देश के ऐसे 100 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां कृषि उत्पादकता और फसल सघनता अपेक्षाकृत कम है तथा कृषि ऋण की पहुंच भी सीमित है। योजना में नई व्यवस्था खड़ी करने के बजाय पहले से संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं और कृषि कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर इन जिलों के कृषि विकास को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
योजना के छह प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इनमें कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना, फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, किसानों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कृषि ऋण की बेहतर उपलब्धता तथा कृषि सेवाओं और शासन व्यवस्था की डिलीवरी में सुधार शामिल हैं।
योजना की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल आंकड़ों में सुधार नहीं, बल्कि खेत तक पहुंचने वाला लाभ होगा। यदि सिंचाई, भंडारण, ऋण, तकनीक और बाजार जैसी सुविधाएं एक साथ मजबूत होती हैं तो चयनित जिलों के किसानों की उत्पादकता और आय दोनों में स्थायी सुधार की संभावना बढ़ेगी।
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