‘ रबी फसलों में सुपर फॉस्फेट का उपयोग और प्रभाव ‘ विषय पर वेबिनार संपन्न

Share

26 अक्टूबर 2021, इंदौर । ‘ रबी फसलों में सुपर फॉस्फेट का उपयोग और प्रभाव ‘ विषय पर वेबिनार संपन्नकृषक जगत किसान सत्र के अंतर्गत गत दिनों ‘ रबी फसलों में सुपर फॉस्फेट का उपयोग और प्रभाव ‘ विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया। इसके प्रमुख वक्ता श्री अजय बाजपेयी ,वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग ) और श्री एनके जांगड़ा, जनरल मैनेजर (मार्केटिंग ) खेतान केमिकल्स एन्ड फर्टिलाइज़र्स लि.थे। इस वेबिनार में बड़ी संख्या में अंतरप्रांतीय किसानों ने हिस्सा लिया और सवालों के ज़रिए अपनी जिज्ञासा प्रकट की , जिसका वक्ताओं ने सटीक जवाब दिया। वेबिनार का संचालन कृषक जगत के संचालक श्री सचिन बोन्द्रिया ने किया।Ajay-Bajpayee ji

श्री अजय बाजपेयी ने बताया कि खेतान की देश में 6 इकाइयां हैं, जो मप्र में निमरानी,राजस्थान में निम्बाहेड़ा ,उप्र में झाँसी और मलवन ,गुजरात में दहेज और छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव में स्थित है। देश में 50 -52 लाख  टन सुपर फॉस्फेट बिकता है। देश में सिंगल सुपर फॉस्फेट बनाने वाली शीर्ष कंपनियों में खेतान का नाम भी शामिल है। खेतान का सुपर फॉस्फेट देश के 14 -16 राज्यों में जाता है। खेतान की उत्पादन क्षमता 11.50 लाख टन है। पूरे देश में खेतान के सुपर फॉस्फेट की किस्म एक जैसी होती है, उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाता है। ग्रेन्यूल्स और पाउडर के रूप में सुपर फास्फेट उत्पादित होता है। बेग पर ग्रेन्यूल्स के लिए लाल और पाउडर के लिए हरे पट्टे का संकेत होता है।

श्री बाजपेयी ने कहा कि देश में करीब 110 -120 लाख टन डीएपी बिकता है, जिसमें से 30 -40 लाख टन का निर्माण भारत में होता है । करीब 60 लाख टन डीएपी  का विदेशों से आयात करना पड़ता है।  विदेशों से डीएपी मंगाने पर सरकार को संबंधित कंपनियों को अनुदान देना पड़ता है। विदेशी कंपनियां रबी सीजन में मांग को देखते हुए कीमत बढ़ा भी देती है, इससे सरकार का सब्सिडी बोझ बढ़ जाता  है। इसलिए केंद्र सरकार ने नई नीति बनाई है, उसके अनुसार सरकार चाहती है, कि जितना डीएपी विदेश से मंगाते हैं उसकी 5 % मांग को हर साल सुपर फॉस्फेट में परिवर्तित किया जाए ,ताकि सब्सिडी का बोझ कम हो। बीते 4 -5 सालों में केंद्र /राज्य सरकार ,कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि पौधों को सिर्फ एनपीके देने से काम नहीं चलेगा। पौधों को 17 पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है। डीएपी से नाइट्रोजन,पोटाश और फास्फोरस की पूर्ति तो हो जाती है, लेकिन शेष तत्व ज़िंक,सल्फर ,कैल्शियम,बोरोन आदि नहीं मिल पाते हैं। सिंगल सुपर फॉस्फेट की उपयोगिता के बारे में बताया कि केवल एनपीके के निरंतर उपयोग से ज़मीन कड़ी हो जाती है। इस कारण  बीज को अंकुरण में दिक्कत आती है। सुपर फॉस्फेट को बोवनी से 5 -7 दिन पहले डाला जाता है, तो बाद में ज़मीन भुरभुरी होकर 4 -5- सेमी ऊपर आ जाती है। बोवनी के बाद बीज का अंकुरण सरलता से होता है और जड़ें गहराई से पोषण लेती है। सिंगल सुपर फॉस्फेट में ज़िंक,बोरोन मिश्रित होता है जो फसल को चमत्कारिक परिणाम देता है।

मप्र सहित पूरे देश में ज़िंक की बहुत ज्यादा कमी का जिक्र कर श्री बाजपेयी ने कहा कि सुपर फॉस्फेट की 50 किलो की एक बोरी में 8 किलो फॉस्फेट,5.5 किलो सल्फर ,11 किलो कैल्शियम ,16  किलो फॉस्फेट और दशमलव 25 ज़िंक मिलता है। इससे फसल को और किसान दोनों को फायदा होता है। किसानों को अनुशंसा के अनुरूप रबी की तरह खरीफ में भी इसे डालना चाहिए ,ताकि फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिल सके। आपका कहना था कि भविष्य में उत्पाद की गुणवत्ता और सेवा ही काम करेगी।

Jangra ji

श्री जांगड़ा ने कहा कि लागत कम होने से ही किसान को खेती में लाभ होगा , लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि असंतुलित उर्वरक डालें। पौधों को 17 तत्व निर्धारित अनुपात में मिलना चाहिए। एनपीके से प्राथमिक पोषक तत्व नाइट्रोजन यूरिया से, फास्फोरस डीएपी /सुपर फॉस्फेट से और पोटाश से पोटाश मिल जाता है।लेकिन कैल्शियम,सल्फर,मैग्नेशियम,आइरन  जैसे अन्य द्वितीय पोषक तत्व नहीं मिलते हैं , इनकी पूर्ति सिंगल सुपर फॉस्फेट से होती है, जो एक बेहतर विकल्प है। इसका निर्माण देश में हो रहा है। यह फसल की लागत ,ज़मीन की ज़रूरत के हिसाब से किसान को लाभदायी है। डीएपी और सुपर फॉस्फेट का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए श्री जांगड़ा ने बताया कि डीएपी में 18 % नाइट्रोजन,46 % फास्फोरस होता है,यानी एक बोरी में 9 किलो नाइट्रोजन और 23 किलो फास्फोरस मिलता है। जो किसान को 1200 में मिलता  है, वह सरकार को 2400 रु में पड़ता है। जबकि ज़िंक युक्त खेतान सुपर फॉस्फेट की तीन बोरी में 24 किलो फॉस्फेट, 31.5 किलो कैल्शियम ,16.5 किलो सल्फर और  750  ग्राम ज़िंक भी मिलता है। इसकी कुल लागत 1136 रुपए है ,जबकि डीएपी की 1200 है। इस तरह 64 रु की बचत के साथ बिना किसी लागत के (सल्फर 917 रु ,ज़िंक 114 रु  कुल 1031 रु )के अतिरिक्त पोषक तत्व मुफ्त में  मिल जाते हैं । कुल मिलाकर सिंगल सुपर फॉस्फेट के उपयोग से ज़मीन को सभी पोषक तत्व मिलने से उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और किसान की जेब को भी फायदा होगा, वहीं सरकार को यह फायदा होगा कि अतिरिक्त सब्सिडी की राशि विदेश जाने से बच जाएगी।

इस वेबिनार में मप्र,उप्र,बिहार,झारखण्ड, महाराष्ट्र के किसान शामिल हुए और उन्होंने अपनी फसल संबंधी कई सवाल पूछे जिनका कृषि विशेषज्ञ श्री आरके सक्सेना ने समाधानकारक जवाब दिया । एक सवाल के जवाब में श्री वाजपेयी ने कहा कि ज़िंक युक्त सुपर फास्फेट निजी  विक्रेताओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है,सहकारी समितियों में मार्क फेड के माध्यम से अगले सत्र में उपलब्ध कराया जा सकेगा।  प्रश्नोत्तरी के इस कार्यक्रम में खेतान के फसल मीटर का जिक्र जब श्री बाजपेयी ने किया तो किसानों ने इसमें बहुत रूचि ली। इस पर खेतान कम्पनी की ओर से किसानों को यह उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। लोकप्रिय कृषि ज्ञान प्रतियोगिता में  किसानों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और चैट बॉक्स में जवाब दिया। ज़ूम के दर्शकों के लिए सवाल था  कि खेतान सुपर में उपलब्ध तीन प्रमुख तत्वों की मात्रा प्रतिशत में बताएं। इसमें सबसे पहले सही जवाब देकर श्री संजय मामोदिया खाचरौद (उज्जैन )और श्री सुशील पाटीदार ,कोटला बहादुर (मंदसौर ) विजेता बने। इन्हें खेतान केमिकल्स एन्ड फर्टिलाइज़र्स की ओर से उर्वरक की दो बोरी पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी। अंत में ,संचालक श्री सचिन बोन्द्रिया द्वारा किसानों और खेतान कम्पनी के पदाधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया गया।

Share
Advertisements

One thought on “‘ रबी फसलों में सुपर फॉस्फेट का उपयोग और प्रभाव ‘ विषय पर वेबिनार संपन्न

  • Company k adhikaari logoien ka adhik jaankari k liye contact number mil sakta hai Kya.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.