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कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

चेक अनादर मामले में आरोपी को एक साल की सजा; जैन इरिगेशन कंपनी को 30 लाख रुपये मुआवजा

27 अगस्त 2026, जलगांव: चेक अनादर मामले में आरोपी को एक साल की सजा; जैन इरिगेशन कंपनी को 30 लाख रुपये मुआवजा –  उधारी के बदले दिए गए करीब 26 लाख 32 हजार 846 रुपये के चेक के अनादर (चेक बाउंस) के मामले में परभणी की वितरक कंपनी पांडुरंग ट्रेडिंग कंपनी के सूर्यकांत सीताराम कछवे को जलगांव न्यायालय ने दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाते हुए संबंधित कंपनी को 30 लाख रुपये मुआवजे के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।

सूर्यकांत सीताराम कछवे ने वर्ष 2015 में जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के साथ हुए आर्थिक व्यवहार के तहत बकाया राशि के भुगतान के लिए 26 लाख 32 हजार 846 रुपये का चेक दिया था। कंपनी की ओर से उक्त चेक नियमानुसार बैंक में जमा कराया गया, लेकिन वह अनादरित होकर बैंक से वापस आ गया। इसके बाद कंपनी की ओर से कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

इस मामले में जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जलगांव न्यायालय में फौजदारी प्रकरण क्रमांक 4321/2015 दायर किया। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से न्यायालय के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि आरोपी द्वारा दिया गया चेक कंपनी की बकाया राशि के भुगतान के लिए था। चेक, आर्थिक लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों तथा अन्य कानूनी साक्ष्यों के आधार पर कंपनी की ओर से अधिवक्ता निशांत अत्रे ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।

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लंबे समय तक चले इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड को 30 लाख रुपये मुआवजे के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।

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चेक की मूल राशि से अधिक मुआवजे का आदेश दिए जाने के कारण इस फैसले को आर्थिक लेन-देन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मामले में जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड की ओर से अधिवक्ता निशांत अत्रे ने न्यायालयीन कार्यवाही संभाली, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता चंद्रकांत सीताराम कछवे ने पक्ष रखा।

चेक के माध्यम से होने वाले आर्थिक व्यवहार विश्वास और वित्तीय प्रतिबद्धता पर आधारित होते हैं। चेक जारी करते समय उसके पीछे की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी करना अपेक्षित होता है। चेक अनादरित होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले से चेक के माध्यम से होने वाले आर्थिक लेन-देन में कानूनी जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया गया है।

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