मिट्टी से जुड़ा भविष्य: आईटीसी ने किसानों की ज़मीनी कहानियों के ज़रिए दिखाई टिकाऊ खेती की राह
23 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: मिट्टी से जुड़ा भविष्य: आईटीसी ने किसानों की ज़मीनी कहानियों के ज़रिए दिखाई टिकाऊ खेती की राह – किसान दिवस 2025 के अवसर पर ITC ने भारतीय कृषि के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर मज़बूती से सामने रखा है। ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप, आईटीसी ने ‘मिट्टी मेरा देश – दिल से जुड़ी किसान की कहानियां’ अभियान की शुरुआत की है। यह पहल देश के अलग-अलग हिस्सों से किसानों की असली, ज़मीनी और अनुभवों से भरी कहानियों को सामने लाती है।
यह अभियान आईटीसी की जलवायु-स्मार्ट कृषि सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य बदलती जलवायु, अनिश्चित मौसम और बढ़ती लागत के बीच किसानों को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।
राष्ट्रीय सोच से जुड़ा अभियान
‘मिट्टी मेरा देश’ अभियान को केंद्र सरकार की ‘मेरी माटी मेरा देश’ पहल से प्रेरणा मिली है, जिसकी शुरुआत आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत की गई थी। इस श्रृंखला के ज़रिए आईटीसी खेती से जुड़े उन प्रयासों को सामने ला रही है, जो ज़मीन पर किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं।
जलवायु-स्मार्ट खेती से किसानों को सुरक्षा
आईटीसी की जलवायु-स्मार्ट कृषि पहल का उद्देश्य किसानों को मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से सुरक्षित रखना है। इसके तहत गेहूं, धान, सोयाबीन, प्याज़, फल और मसालों जैसी फसलों में वैज्ञानिक और संसाधन-संरक्षण आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। शून्य जुताई, सीधे बीज बोना, उथली क्यारी में खेती, मल्चिंग और नियंत्रित सिंचाई जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं।
पानी के बेहतर उपयोग पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। धान, गन्ना, गेहूं, सोयाबीन और बागवानी फसलों में फसल और क्षेत्र के अनुसार सिंचाई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। वर्ष 2024–25 में इस पहल से 19 राज्यों में लगभग 12 लाख किसान जुड़े हैं और करीब 32 लाख एकड़ क्षेत्र को कवर किया गया है। 2030 तक इसे 40 लाख एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य है।
जलवायु-स्मार्ट गांवों की ओर कदम
आईटीसी अपने प्रमुख कृषि क्षेत्रों में गांवों को जलवायु-स्मार्ट गांव के रूप में विकसित कर रही है। फिलहाल 12 राज्यों के लगभग 7,000 गांव इस पहल से जुड़े हुए हैं। यहां खेती, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, आजीविका के वैकल्पिक साधन और संस्थागत सहयोग—इन चार स्तंभों पर एक साथ काम किया जा रहा है।
मिट्टी की सेहत को प्राथमिकता
आईटीसी मानती है कि टिकाऊ खेती की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी से होती है। इसी सोच के तहत टैंक की गाद का उपयोग, जैविक खाद, शून्य जुताई, क्षेत्र-विशेष पोषक तत्व प्रबंधन, मिट्टी की मैपिंग और जैव उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रयासों का लक्ष्य मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाना और उसकी उपजाऊ क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखना है।
खेती में महिलाओं की मज़बूत भागीदारी
कृषि में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए आईटीसी विशेष कार्यक्रम चला रही है। महिला किसान फील्ड स्कूल, कृषि सखी और महिला कृषि व्यवसाय केंद्रों के ज़रिए महिलाओं को जलवायु-स्मार्ट खेती से जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2024–25 में 1.8 लाख से अधिक महिलाओं तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाई गई है।
नेक्स्ट-जेन कृषि और आईटीसीएमएएआरएस
आईटीसी अपने नेक्स्ट-जेन कृषि विज़न के तहत डिजिटल और ज़मीनी समाधान को एक साथ जोड़ रही है। इसका प्रमुख आधार है आईटीसीएमएएआरएस मंच, जो किसानों को इनपुट, बाजार, सलाह और वित्तीय सेवाओं से जोड़ता है। यह प्लेटफॉर्म तकनीक और किसान उत्पादक संगठनों के नेटवर्क के ज़रिए खेती को अधिक लाभकारी बना रहा है।
फिलहाल 11 राज्यों में सक्रिय आईटीसीएमएएआरएस से 22 लाख से अधिक किसान और 2,050 से ज्यादा एफपीओ जुड़े हैं। शुरुआती नतीजों में किसानों की आमदनी में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी और उपज में 15–20 प्रतिशत का सुधार सामने आया है। 2030 तक इसका लक्ष्य एक करोड़ किसानों तक पहुंचना है।
मूल्यवर्धित कृषि से नए रास्ते
आईटीसी मसाले, झींगा, गेहूं आधारित उत्पाद, कॉफी, प्रसंस्कृत फल-सब्ज़ियां और औषधीय पौधों जैसे क्षेत्रों में मूल्यवर्धित कृषि को आगे बढ़ा रही है। इसके ज़रिए किसानों को बेहतर दाम, स्थिर बाज़ार और वैश्विक अवसर मिल रहे हैं।
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