फूल- फलों का झड़ना, कारण एवं निदान

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21 जुलाई 2022, भोपाल । फूल- फलों का झड़ना, कारण एवं निदान वृक्षों में फलों की संख्या अधिक हो, इसके लिए मात्र फूल आना ही महत्वपूर्ण नहीं है। बल्कि उतना ही महत्वपूर्ण फूल से फल बनना और परिपक्व होना है। फूल से फल बनना एक जटिल क्रिया है और यह क्रिया वृक्षों के आंतरिक एवं बाहरी घटकों द्वारा प्रभावित होती है। सामान्यत: फल वृक्षों पर बहुत अधिक संख्या में फूल आते हैं, परन्तु इन सभी फूलों से फल नहीं बन सकते। फूल से फल बनने में दो समस्याएं आती हैं। प्रथम फूलों का फल बनने से पहले झड़ जाना, द्वितीय फल बनकर गिर जाना।

फल झड़ने के कारण

बहुत से बाहरी व आंतरिक कारण पौधों से फलों के झडऩे की क्रिया को प्रभावित करते हैं, फल झडऩ के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।

विगलन पर्त का निर्माण

फूलों तथा फलों में उनके डण्ठल के आधार पर एक विशेष तरह की कोशिकाओं की पर्त बन जाती है। यह कोशिकाओं की पर्त आकार में लगभग आयताकार और ढीली होती है। इनके अंदर खाद्य पदार्थों को पहुंचाने वाले ऊतक भी नहीं होते, इसलिए यह स्थान कमजोर पड़ जाता है। इसी स्थान को विगलन पर्त कहते हैं। जिसके बन जाने से फूल तथा फल वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं। विगलन पर्त का निर्माण सम्भवत: वृक्ष में हार्मोन के असंतुलित हो जाने के कारण होता है।

पोषक तत्वों की कमी

वृक्षों में पोषक तत्वों की कमी से फूल से फल विकसित होने में कठिनाई होती है और फल गिर जाते हैं। फलों को पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में न मिलने के कारण या तो पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते या गिर जाते हैं। स्फुर, गंधक, बोरान, केल्शियम, मेग्नेशियम तत्व विशेष रूप से आवश्यक होते हैं।

जल की कमी

जल के अभाव में पोषक तत्वों का भूमि से पर्याप्त मात्रा में अवशोषण नहीं हो पाता और वृक्षों में उनकी कमी हो जाती है। वृक्ष की दैहिकीय क्रियाएं भी शिथिल हो जाती हैं और विकसित होते हुए फल में पोषक तत्वों की संचार व्यवस्था कम हो जाती है, और फल गिर जाते हैं।

वातावरणीय कारण

वायुमण्डल की हवा में नमी की कमी हो जाने से फल झडऩा आरंभ हो जाता है। आद्र्रता की कमी हो जाने से वाष्पोत्सर्जन की क्रिया अधिक हो जाती है। तापक्रम अधिक हो जाने से वायु में आद्र्रता कम हो जाती है। सूखे क्षेत्र में फल झडऩे का यह प्रमुख कारण है। तेज वायु, ओला आदि से भी फल और फूल झड़ जाते हैं।

कीट एवं व्याधियां

विभिन्न प्रकार के कीट एवं व्याधियों के प्रकोप से भी फल झड़ते हैं। आम में फूल व फल बनते समय भुनगा (मच्छर) (मेंगो हापर) का प्रकोप होने से बहुत अधिक संख्या में फूल व फल झड़ जाते हैं। इसी प्रकार से अनेक कीट एवं व्याधियां, फल पौधों में फल झडऩे का कारण बनती हैं।

जुताई-गुड़ाई क्रियाएं

फल बनते समय भी कई गहरी जुताई-गुड़ाई से फलों का झडऩा अधिक मात्रा में होता है। फूल व फल बनते समय किया गया रसायनों का छिडक़ाव भी प्रत्यक्ष रूप से फूल के विभिन्न अंगों को हानि पहुंचाकर अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पराग सेंचन में सहायक कीटों की क्रियाशीलता कम करके, फूल व फल झडऩे की क्रिया को बढ़ाता है।

कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा

फल बनने, उनके विकास एवं वृद्धि के लिये, पौधों में कार्बोहाइड्रेट्स की अतिरिक्त मात्रा में आवश्यकता होती है। यदि पौधों में कार्बोहाइडे्रट्स का स्तर कम है तो फल झडऩ अधिक संख्या में होगा।

हार्मोन्स का स्तर

फल पौधों में आक्सीन, एसीटिक एसिड व इथाईलीन का स्तर फल झडऩे की क्रिया को नियंत्रित करता है। इन हारमोन्स के असंतुलन होने से फल झडऩे की क्रिया बढ़ जाती है।

फलने की आदत

जिन पौधों में अग्र कलिकाओं पर फल बनते हैं, उनमें ऐसे पौधे की अपेक्षा उनमें पाश्र्व कलिकाओं पर फल बनते हैं, फल झडऩे की क्रिया को बढ़ाता है।

झडऩे से रोकने के उपाय

फूल एवं फल झडऩे की क्रिया विभिन्न कारकों द्वारा प्रभावित होती है। उपर्युक्त प्रत्येक कारक पर नियंत्रण सम्भव नहीं हो सकता, परन्तु निम्नलिखित विभिन्न उपायों के द्वारा एक निश्चित सीमा तक फल झडऩे पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

हार्मोन्स का प्रयोग

वृक्षों में वृद्धि नियामक पदार्थ या हार्मोन पदार्थों के असंतुलन को संतुलित कर फूल एवं फलों को झडऩे से रोका जा सकता है। आम में फल बनने के बाद 2,4- डी (10 पीपीएम), एनएए (30-40 पीपीएम) का छिडक़ाव करने से फल झडऩे की क्रिया धीमी हो जाती है। विभिन्न नीबूवर्गीय फलों में 2,4,-डी (5-20 पीपीएम) का छिडक़ाव अपै्रल व सितम्बर माह में करना उपयोगी पाया गया है। सेब में अप्रैल-मई में एनएए (10 पीपीएम) या 2, 4, 5-टी (20 पीपीएम) व एलार (200 पीपीएम) का छिडक़ाव करने से फल झडऩ की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

पोषक तत्वों का छिडक़ाव

पौधों में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी है तो उनका घोल के रूप में छिडक़ाव करने से फल झडऩ को कम किया जा सकता है। नीबूवर्गीय फलों में जिंक एवं बोरान का छिडक़ाव फल झडऩ को रोकने में बहुत उपयोगी है। आम के फलोद्यानों में बोरान का छिडक़ाव करना लाभदायक सिद्ध हुआ है।

सिंचाई

वृद्धि व फल बनने के समय भूमि में उचित मात्रा में नमी होना आवश्यक है। इस अवस्था में नमी की कमी होने से फल झडऩे की क्रिया तेज हो जाती है। अत: आवश्यकतानुसार फलोद्यान की सिंचाई करते रहें।

जुताई-गुड़ाई क्रियायें

फलोद्यान में कर्षण क्रियायें, जैसे – जुताई-गुड़ाई, रसायनों का छिडक़ाव व कटाई-छंटाई आदि उचित समय पर एवं उचित मात्रा में करें। वायु की गति को कम करने के लिये वायुरोधक वृक्ष लगायें।

कीट-व्याधियों का नियंत्रण

फल वृक्षों में अनेक कीट व व्याधियां हानि पहुंचाती हैं। इनके प्रकोप से फलों की काफी मात्रा झड़ जाती है, अत: इनका समय पर नियंत्रण करना आवश्यक है।

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