उद्यानिकी फसलों से किसानों की आय बढ़ेगी: श्री कुशवाहा
उज्जैन में होगी सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना
लेखक: अतुल सक्सेना
13 जुलाई 2026, भोपाल: उद्यानिकी फसलों से किसानों की आय बढ़ेगी: श्री कुशवाहा – उद्यानिकी फसलें छोटी जोत से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम हैं। उद्यानिकी फसलों के माध्यम से किसानों की वास्तविक आय बढ़ाई जा सकती है। उद्यानिकी एवं मसाला फसलों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए खाद्य प्रसंस्करण के तहत उद्यानिकी उत्पादों की भरपूर ब्रांडिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की खेती भी बहुतायत में की जाती है। इनकी बड़ी संभावनाएं हैं।
औषधि निर्माण के लिए जरूरी इन फसलों की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मांग के अनुसार आपूर्ति के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार की जा रही है। साथ ही सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में फूलों की खेती को प्रोत्साहन एवं विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। मसाला फसलों के उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है। यह जानकारी प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा सामाजिक न्याय मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कृषक जगत को एक विशेष मुलाकात में दी। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश –
30 लाख हेक्टेयर होगा बागवानी का रकबा
कृषक जगत: किसान कल्याण वर्ष में उद्यानिकी क्षेत्र के विस्तार के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं?
श्री कुशवाह: वर्तमान में प्रदेश में लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2028 तक इसे बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने की कार्ययोजना बनाई गई है। किसान कल्याण वर्ष में 1 लाख 32 हजार 147 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें फल फसलों के लिए लगभग 18 हजार हेक्टेयर, सब्जियों के लिए 54 हजार हेक्टेयर, मसाला फसलों के लिए 56 हजार हेक्टेयर, पुष्प उत्पादन के लिए 3,500 हेक्टेयर, औषधीय फसलों के लिए 600 हेक्टेयर तथा संरक्षित खेती के लिए 47 हेक्टेयर क्षेत्र वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कृषक जगत: उत्पादन और विपणन के क्षेत्र में उद्यानिकी की क्या उपलब्धियां रही हैं?
श्री कुशवाह: वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में लगभग 37 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में लगभग 389 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में 425 लाख मीट्रिक टन हो गया है। उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बाजार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात से जोड़ने के लिए भी तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
कृषक जगत: मसाला और औषधीय फसलों को लेकर सरकार की क्या रणनीति है?
श्री कुशवाह: मध्यप्रदेश मसाला फसलों के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मसालों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी प्रकार प्रदेश में औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की भी बड़ी संभावनाएं हैं। इनकी वैश्विक मांग को देखते हुए पूरी सप्लाई चेन विकसित की जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर मिल सकें।
सिंहस्थ के लिए पुष्प उत्पादन
कृषक जगत: सिंहस्थ-2028 को देखते हुए पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में क्या तैयारियां की जा रही हैं?
श्री कुशवाह: सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में फूलों की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वहां वहां सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। इससे आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे प्रदेश में पुष्प उत्पादन को नई दिशा मिलेगी।
12 उद्यानिकी उत्पादों को मिला जीआई टैग
कृषक जगत: प्रदेश के उद्यानिकी उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
श्री कुशवाह: हम प्रदेश के विशिष्ट उद्यानिकी उत्पादों को भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश ने एक साथ 12 उद्यानिकी उत्पादों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
इसके अतिरिक्त उज्जैन की इमली, अलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी तथा अशोकनगर की खिरनी सहित कई उत्पादों के लिए भी जीआई टैग का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
मखाना की लाभकारी खेती करें किसान
कृषक जगत: प्रदेश में मखाना की खेती को लेकर क्या योजनाएं हैं?
श्री कुशवाह: नवाचार के तहत प्रदेश के 14 जिलों—नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना एवं सतना में मखाना क्षेत्र विस्तार योजना संचालित की जा रही है। इस वर्ष इसका रकबा बढ़ाकर 85 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार की योजना के तहत मखाना उत्पादन इकाई स्थापित करने पर परियोजना लागत का लगभग 40% तक अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों को नई और लाभकारी खेती अपनाने का अवसर मिलेगा।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global A

