Share
26 मार्च 2021, भोपाल । समस्या- समाधान –

समस्या- ग्वारपाठा की खेती करना चाहता हूं, बुआई के तरीके व खाद के बारे में बतायें।
सुन्दरलाल राठौड़,
चित्तौडग़ढ़ (राज.)

समाधान

elorvera

  • ग्वारपाठा लगभग सभी भूमियों व जलवायु में उगाया जा सकता है। इसे जड़ाकुंरों तथा प्रकन्द कटिंग द्वारा लगाया जाता है। इसके लिये 15 से 20 से.मी. लंबे जड़ाकुंरों या प्रकंद कटिंग को 50 से.मी. लाइन से लाइन की दूरी तथा 30 से.मी. पौधे से पौधे की दूरी पर अच्छा तैयार खेत में लगाया जाता है। इनका दो तिहाई भाग जमीन के अंदर दबाया जाता है और एक तिहाई भाग जमीन के बाहर रखा जाता है।
  • बुआई के पूर्व खेत में 200-250 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद अच्छी तरह मिला लें। इसी समय 20 किलो नत्रजन, 20 किलो फास्फोरस तथा 20 किलो पोटाश प्रति एकड़ के मान से भी दें।
    द्य रोपाई के तुरन्त बाद सिंचाई अवश्य दें नियमित सिंचाई से इसकी उपज अच्छी मिलती है परंतु खेत में पानी नहीं ठहरना चाहिए। इसकी कई जातियाँ व किस्में उपलब्ध हैं। उन्नत किस्मों में एच-1, आईसी 11269, आईसी 111271 तथा आईसी 111280 प्रमुख हैं।

समस्या- अदरक लगाने का सही तरीका बतायें।
– दिनेश सोनवाने, पिपरिया

समाधान 

  • अदरक को लगातार एक ही खेत में न उगायें इसको हल्दी, प्याज, लहसुन, मिर्च, गन्ना, मक्का, मूंगफली तथा सब्जियों के साथ 2-3 वर्ष के फसल चक्र में सम्मिलित किया जा सकता है।
  • अदरक की क्यारियों को आधा फुट ऊंचाई की बनायें, जिनकी चौड़ाई लगभग 1 मीटर तथा लंबाई अपनी सुविधानुसार रखें। संभव हो तो गर्मी के मौसम में सफेद पॉलीथिन से गीले खेत को ढक कर सूर्य की गर्मी को 20-30 दिन तक उपचारित कर लें। इससे रोग व कीटों का प्रकोप कम होगा।
  • अनुशंसित उपलब्ध बीज का उपयोग करें। रोपाई करते समय रोपाई के गड्ढे में 25 ग्राम नीम की खली का पाउडर मिट्टी में मिला दें। रोपाई 25 से.मी. लाईन से लाईन की दूरी तथा 20 से 25 सेमी. कंद से कंद की दूरी पर करें। 20 से 30 ग्राम कंद का उपयोग बुआई के लिये करें।
  • कंद बोने के पूर्व उसे अच्छी सड़ी गोबर की खाद तथा ट्राइकोडर्मा फफूंद के मिश्रण से उपचारित कर लें। बुआई के बाद उन्हें हल्की मिट्टी से ढकें। एक एकड़ के लिये 600 से 1000 किलो कंद की आवश्यकता होगी। बुआई अप्रैल-मई के मध्य करें। बुआई के तुरन्त बाद पानी दें, क्यारियों को पलवार से ढक दें, आवश्यकता अनुसार सिंचाई दें।

tarbuja1

समस्या – तरबूज व खरबूज को खाद की कितनी मात्रा व कब देना चाहिए।
– धर्मेन्द्र जलखरे, होशंगाबाद

 

समाधान

  • तरबूज व खरबूज की अच्छी फसल लेने के लिये लगभग वही आवश्यकतायें रहती हैं जो कद्दूवर्गीय सब्जियों के लिये रहती हैं। इसके लिये 250 क्विंटल अच्छी सड़ी गोबर खाद के साथ 80 किलोग्राम नत्रजन, फास्फोरस 40 किलो तथा पोटाश 40 किलोग्राम प्रति हेक्टर लगेगा।
  • गोबर खाद, नत्रजन की आधी मात्रा व फास्फोरस तथा पोटाश की पूरी मात्रा, बीज बोने के पूर्व थालों में अच्छी तरह मिला लें।
  • नत्रजन की बची 40 किलो मात्रा को दो बार 20-20 किलो बुआई के 30 व 50 दिन बाद फूल आने के समय दें।
  • तरबूज व खरबूज लगाने के पूर्व मिट्टी जांच द्वारा देख लें कि आपके खेत में बोरोन की कमी तो नहीं है। बोरोन फलों के बनने व उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण तत्व है।

समस्या- गर्मी के मौसम में गेलार्डिया के फूलों की खेती करना चाहता हूं। जानकारी देने की कृपा करें।
– रामधारी सिंह, रतलाम

समाधान

  • गेलार्डिया की खेती के लिये हल्की मिट्टी की आवश्यकता होती है जिसमें पानी न ठहरता हो। काली मिट्टी में अधिक पानी लग जाने से पौधों मरने की संभावना रहती है। इसके फूल उपजाऊ भूमि की अपेक्षा कम उपजाऊ भूमि में अच्छे लगते हैं।
  • इस समय लगाई गई गेलार्डिया में हो सकता है कि गर्मियों में फूल न आयें। अक्टूबर नवम्बर में लगाई गई फसल में गर्मियोंं में अच्छे फूल आयेंगे। एक बार लगाई गई फसल को 2-3 साल तक रखना चाहिए।
  • बीज को उगने में 14 से 21 दिन का समय लगता है। पौधशाला से पौध निकालने के बाद उन्हें 14 से 16 इंच की दूरी पर लगाना चाहिए। 2 फीट के पौधे होने के बाद टहनियों से भी पौधे बनाये जा सकते हैंं। इसकी सामान्य जातियां 2-3 फीट ऊंची रहती हैं। इसको पौध संरक्षण की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं रहती।

समस्या- क्या जायद की मूंगफली में भी टिक्का रोग आ सकता है। लक्षण तथा उपाय बतायें।
– जमुना प्रसाद, खरगौन

समाधान

मूंगफली का टिक्का रोग आमतौर पर खरीफ के मौसम में आता है। जायद में उसके लिये आद्र्रता तथा तापमान उपयुक्त नहीं होती है। आप निम्न लक्षणों से उसे पहचानें।
द्य बुआई के 30 दिनों के बाद अगेती टिक्का आता है। जिसमें पत्तियों के ऊपरी सतह पर अर्धगोलाकार हरिमाहीन धब्बे निकलते है जो बाद में भूरे हो जाते हैं, धब्बों के आसपास पीला घेरा भी दिखता है।
द्य पिछेती टिक्का बुआई के 60 दिनों के अंदर से आता है। पत्तियों पर ऊपरी सतह पर महीन हरिमाहीन धब्बे बनते हैं जो अनियमित आकार के हो जाते हैं। पत्तियों के निचली सतह पर काले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं।
द्य रोकथाम के लिये 2 ग्राम कापर सल्फेट/लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिनों के अंतर से दो छिड़काव करें।

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *