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किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)फसल की खेती (Crop Cultivation)

थार हर्षा और थार तेजस: सहजन की नई किस्मों ने किसानों की झोली भर दी, आप भी जानें कैसे

12 दिसंबर 2024, भोपाल: थार हर्षा और थार तेजस: सहजन की नई किस्मों ने किसानों की झोली भर दी, आप भी जानें कैसे – कभी सिर्फ परंपरागत फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान अब सहजन की आधुनिक किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं। इसमें सबसे अहम भूमिका निभाई है ‘थार हर्षा’ और ‘थार तेजस’ जैसी उन्नत किस्मों ने। इन किस्मों ने न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि पोषण और आर्थिक लाभ का भी जबरदस्त जरिया बन गई हैं। आइए जानते हैं कैसे ये किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

सहजन की शक्ति और महत्व

सहजन (मोरिंगा ओलीफेरा) का उपयोग हजारों वर्षों से औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है। इसके पत्ते, फल, बीज और यहां तक कि जड़ें भी औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। लोक चिकित्सा में इसे नेत्रश्लेष्मा शोथ, पेट के कीड़े और गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए उपयोग किया जाता है। यही नहीं, सहजन के पत्तों में विटामिन ए, सी, कैल्शियम और आयरन की प्रचुर मात्रा होती है, जो पोषण सुरक्षा की दृष्टि से इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है।

सहजन की खेती के दौरान किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें मौसम की मार और फसल के विकास में बाधाएं प्रमुख थीं। लेकिन इन चुनौतियों से निपटने के लिए भाकृअनुप-केन्द्रीय बागवानी प्रयोग केन्द्र, गोधरा, गुजरात ने थार हर्षा और थार तेजस जैसी नई किस्में विकसित कीं। ये किस्में शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु में भी अच्छी पैदावार देती हैं और किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनी हैं।

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थार हर्षा: विशेषताएं और फायदे

थार हर्षा एक वार्षिक किस्म है जिसकी पत्तियां गहरे हरे रंग की होती हैं। इसकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:

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  • उपज क्षमता: प्रति हेक्टेयर 53-54.7 टन उपज।
  • फलन का समय: पीकेएम-1 किस्म की तुलना में मार्च-मई के दौरान फल लगते हैं।
  • पोषण मूल्य: पत्तियों और फलियों में प्रोटीन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, मैंगनीज, जिंक और कॉपर अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
  • आर्थिक लाभ: प्रति पौधा औसतन 314 फलियाँ मिलती हैं।

थार तेजस: विशेषताएं और फायदे

थार तेजस की पहचान इसके जल्दी पकने वाले फलों और मजबूत पौधों से होती है। इसके मुख्य गुण निम्नलिखित हैं:

  • पौधों की ऊंचाई: 2.74 मीटर ऊंचाई और 261-318 सेमी तक फैलाव।
  • फल की विशेषताएं: प्रति फली 9-10 बीज, 45-48 सेमी लंबाई और 218 ग्राम वजन।
  • उपज और उत्पादन: प्रति पौधा 245 फलियाँ और फल जनवरी-मार्च के दौरान पकते हैं।
  • पोषण गुण: इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, फिनोल्स और फ्लेवोनोइड्स की अधिक मात्रा पाई जाती है।

गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसानों ने थार हर्षा और थार तेजस किस्मों की व्यावसायिक खेती शुरू कर दी है। इन किस्मों की खेती करने वाले किसानों की कहानियां भी बेहद प्रेरणादायक हैं।

प्रगतिशील किसान प्रेम कुमार की कहानी

राजस्थान के झुंझुनू जिले के कजारा, पिलानी के प्रगतिशील किसान श्री प्रेम कुमार ने जुलाई 2020 में थार हर्षा की जैविक खेती शुरू की। दूसरे वर्ष में प्रति हेक्टेयर 12.24 टन टेंडर फली की कटाई हुई। प्रति हेक्टेयर खेती की लागत लगभग ₹ 1.25 लाख थी, जबकि प्रति हेक्टेयर आय ₹ 3.06 लाख से ₹ 4.28 लाख के बीच हुई। टेंडर फली ₹ 25-35 प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रही है।

किसानों ने इन किस्मों के जरिए न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है। गुजरात के आदिवासी इलाकों में 850 से अधिक किसानों को रोपण सामग्री और बीज उपलब्ध कराए गए, जिससे वे भी किचन गार्डनिंग के जरिए पोषण सुरक्षा प्राप्त कर सकें।

भाकृअनुप के वैज्ञानिकों ने किसानों को रोपण, कटाई, उर्वरक उपयोग और फसल सुरक्षा के उन्नत तरीकों की ट्रेनिंग दी। किसानों को यह भी सिखाया गया कि कैसे जैविक खेती से पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

क्या बनाती है थार हर्षा और थार तेजस को खास?

थार हर्षा और थार तेजस किस्में जलवायु सहनशीलता, पोषकता, कम लागत और मूल्यवर्धित उत्पादों के मामले में बेहद खास हैं। ये किस्में सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। इनकी पत्तियों और फलों में पोषक तत्वों की अधिक मात्रा होती है। उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक सहायता के कारण उत्पादन लागत में कमी आई है। साथ ही, पत्तियों से पाउडर और बीजों से तेल निकालकर किसानों को अतिरिक्त आय का जरिया मिल रहा है।

थार हर्षा और थार तेजस जैसी उन्नत किस्में भारतीय किसानों के लिए एक क्रांति की तरह हैं। ये किस्में खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा का एक आदर्श मॉडल पेश कर रही हैं। अब वक्त आ गया है कि अन्य किसान भी इन किस्मों की ओर रुख करें और अपनी आय को दोगुना करने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा में भी योगदान दें।

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