किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

प्राकृतिक खेती से फसल लहलहाई

Share

23 फरवरी 2023,  भोपाल । प्राकृतिक खेती से फसल लहलहाई – कृषक अनिल कुमार राठी ग्राम अतवास, तहसील सतवास विकासखण्ड कन्नौद, जिला देवास के निवासी हैं, पूर्वजों से प्राप्त 22 एकड़ भूमि है, जमीन पूर्ण सिंचित है जो दतुनी नदी से पाईपलाईन एवं कुँआ से सिंचित है जिसमें परम्परागत तरीके के खेती कार्य करते थे जिसमे लागत अधिक एवं मुनाफा कम होता था।

उसी समय मैं वर्ष 2010 में क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री राजेन्द्र यादव के सम्पर्क में आया एवं उनसे इस सम्बन्ध में चर्चा की तो उन्होंने खेती में नई तकनीकों का उपयोग एवं संतुलित मात्रा में रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक का उपयोग करने की सलाह एवं प्रशिक्षण दिया।

श्री यादव से प्रेरित होकर मैंने कृषि विभाग की योजनाओं से जुडक़र पाईपलाईन, स्प्रिंकलर सेट, विद्युत पंप एवं बायोगैस संयंत्र एवं फसल प्रदर्शन अनुदान पर प्राप्त कर अपने खेत पर स्थापित किया। खरीफ फसल में मुख्य रूप से सोयाबीन की नवीन उन्नत किस्मों का प्रयोग कर जे. एस. 4546, जे.एस. 2043 आदि किस्मों की बोनी की जिसमें जे.एस. 2447, जे.एस. 4546 का उत्पादन 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हुआ। रबी में चना फसल 40 एकड़ में उन्नत किस्मों की बोनी कर स्प्रिंकलर द्वारा सिंचाई की जाकर 20 से 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन ले रहा हूँ। गेहूं फसल लगभग 10 एकड़ में जिसकी किस्मे डी.बी.डब्लू 303, सी.306, सुगन्धा 744 की बोनी की है जो लगभग 50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन दे रही है।

इसके अतिरिक्त जायद फसल में मूंग की फसल लगभग 40 एकड़ में कर 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज लेकर लाभ कमा रहा हूँ। इसके अतिरिक्त वर्मी कम्पोस्ट खाद बायोगैस स्लरी का उपयोग कर रसायनिक उर्वकों का 50 प्रतिशत कमी कर गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त कर रहा हूँ। वर्तमान में कृषि विभाग के सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त कर एक एकड़ में प्राकृतिक खेती कर रहा हूँ। मैंने 30 देसी गाय का पालन किया है जिससे मुझे दूध, दही, छाछ, घी एवं गोबर गौमूत्र प्राप्त होता है। गाय का घी 1500 रुपये प्रति किलो ग्राम में बिक्री हो जाता है। मैंने अपने घर में जीवामृत, घनामृत, गोकृपामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट किट तैयार कर खेत में उपयोग कर रहा हूँ।

रबी में प्रकृतिक खेती के अंतर्गत एक एकड़ में गेहूं सी.306 किस्म की 25 किलो प्रति एकड़ बीज उपयोग कर बोनी की गई है जिसमे बीजोपचार ट्राईकोडर्मा विरीडी एवं गोमूत्र से उपचारित किया जाकर खेत मे 25 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट खाद एवं घनजीवामृत डालकर गेहूं फसल बोई। फसल अभी अच्छी अवस्था में है। मैं कृषि विभाग के समस्त अधिकारियों के मार्गदर्शन देने धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

महत्वपूर्ण खबर: गेहूं की फसल को चूहों से बचाने के उपाय बतायें

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *