संपादकीय (Editorial)

मिट्टी परीक्षण: सरकार और किसान दोनो उदासीन

26 मई 2025, भोपाल: मिट्टी परीक्षण: सरकार और किसान दोनो उदासीन – भारत में करीब 15 करोड़ किसान हैं। भारत सरकार ने मिट्टी परीक्षण के महत्व को देखते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड (साईल हेल्थ कार्ड) योजना शुरू की है और इसके तहत अब देश में 24 करोड़ से अधिक कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। एक अनुमान के अनुसार किसानों की इतनी बड़ी संख्या में से पांच प्रतिशत से भी कम किसान मिट्टी परीक्षण करवाते हैं जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में मिट्टी परीक्षण के लिए कुल 8272 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ हैं जिनमें 1068 स्थैतिक, 6376 लघु और 665 ग्राम स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ शामिल हैं। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं की पर्याप्त संख्या होने के बावजूद मिट्टी परीक्षण करवाने वाले किसानों की नगण्य संख्या वाकई चिंताजनक बात है। चिंताजनक इसलिये कि देश में कृषि उत्पादन की लागत में अत्यधिक वृद्धि होने से किसानों विशेषकर लघु और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो पा रही है। कृषि लागत में वृद्धि होने का एक प्रमुख कारण यह भी माना जा सकता है कि रासायनिक खादों और दवाईयों का अंधाधुंध प्रयोग और इनके बिना अपेक्षित उत्पादन सम्भव भी नहीं है। इसलिए कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना बेहद जरूरी है और यह सम्भव होगा कृषि भूमि में फसल के मुताबिक आवश्यक तत्वों की पूर्ति यानी जमीन में वे पोषक तत्व डालें जाएं जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि तो होगी ही, पोषक तत्व भी भरपूर रहेंगे। और यह तभी सम्भव होगा जब फसल की बोवनी या फसल लगाने से पहले मिट्टी परीक्षण करवाकर जरूरी तत्व कृषि भूमि में डाल दिए जाएं। इससे फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, साथ ही अपेक्षित उत्पादन भी होगा बशर्ते कि कोई प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट न हो।

मिट्टी परीक्षण के फायदों के बारे में किसानों को जानकारी होने और पर्याप्त संख्या में परीक्षण प्रयोगशालाएं होने के बावजूद मिट्टी परीक्षण करवाने वाले किसानों की संख्या बहुत कम होने से इन प्रयोगशालाओं की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। किसान तो मिट्टी परीक्षण करवाना चाहते हैं लेकिन किसानों को समय पर जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाती है जिसके कारण वे सम्बंधित फसल में देर से प्राप्त रिपोर्ट की उपयोग नहीं कर पाते हैं। प्रत्येक क्षेत्र की मृदा और प्रत्येक फसल के पोषक तत्वों की आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं। लेकिन कई बार मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अलग – अलग फसलों के लिए एक जैसी ही सिफारिशें कर दी जाती है। इससे बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं। कई किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए विवरण को समझने में असमर्थ होते हैं, इसलिए दिए गए सुझावों का पालन नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा मृदा के घटक, जल धारण क्षमता तथा जल की आवश्यकता एवं मृदा में उपस्थित जीवाणुओं जैसे घटकों के बारे में न तो किसानों को जानकारी होती है और न ही उन्हें बताया जाता है। मिट्टी परीक्षण के लिए सही तरीके से मृदा एकत्रित करना भी अति आवश्यक होता है तभी सही जांच हो सकेगी।

भारत की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। इस बात के मद्देनजर मिट्टी का उपजाऊपन कम होना चिंता का विषय है। यह बात और चिंतनीय हो जाती है क्योंकि हमारे यहां 86 प्रतिशत से अधिक सीमांत और छोटे किसान हैं। राज्य सरकारों ने मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं तो स्थापित कर दी हैं लेकिन उनका उपयोग काफी कम हो रहा है। प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी के कारण मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती। कभी – कभी अंदाज से ही रिपोर्ट जारी कर दी जाती है जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।

केंद्र में इस समय कृषि से ताल्लुक रखने वाले शिवराज सिंह चौहान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का दायित्व संभाल रहे हैं। उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे मिट्टी परीक्षण को प्राथमिकता में शामिल करें और यह भी सुनिश्चित करें कि मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट समय पर मिल जाए ताकि किसान उसका उपयोग कर सके। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं की निगरानी की भी व्यवस्था करनी चाहिये ताकि लापरवाही न हो। साथ ही किसानों को उनके मोबाईल पर ही रिपोर्ट और सुझाव प्राप्त हो जाए तो यह किसानों के हित में ही होगा। सरकार जैविक कृषि को भी बढ़ावा दे रही है। इसलिए कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए मिट्टी परीक्षण जरूरी है। किसानों को मिट्टी परीक्षण से होने वाले लाभों के बारे में बताने के लिए ग्राम स्तर पर ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए जिसमें मिट्टी एकत्रित करना, फसल के अनुसार उर्वरक / पोषक तत्वों की I

आवश्यकता, मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिये गए सुझावों और वैज्ञानिक शब्दावली को आसान स्थानीय भाषा में जानकारी देनी होगी तभी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की सार्थकता सिद्ध होगी । प्रायोगिक आधार पर प्रत्येक राज्य में एक जिला को पूर्ण मृदा परीक्षण जिला बनाने की योजना शुरू की जानी चाहियेताकि मृदा परीक्षण से होने वाले लाभों से अन्य जिले के किसान मृदा परीक्षण के लिए स्वयं आगे आयेंगे। किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) के सभी सदस्यों के लिए मृदा परीक्षण अनिवार्य करने पर भी विचार किया जा सकता है।

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