संपादकीय (Editorial)

हमारी फसल सिर्फ एक, दो, तीन कहते ही बिक जाती है

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पिन्टू मीना पहाड़ी, राजस्थान

20 अप्रैल 2024, भोपाल: हमारी फसल सिर्फ एक, दो, तीन कहते ही बिक जाती है – हमारी फसल सिर्फ एक, दो, तीन कहते ही बिक जाती है ये एक, दो, तीन कहने वाले वो लोग है जिन्होंने ना कभी खेती की और ना किसानों की तरह खेतों में संघर्ष किया मैं एक दिन कृषि उपज मंडी गया वहां लगभग 15-20 लोग आते हैं और किसानों की फसलों की बोली लगाते है गेहूँ की बोली शुरू हुई 2300 रुपये क्विंटल से उसके बाद बारी-बारी से ये लोग बोलते है पौने (75 पैसे), सवा (1.25 रुपये) ऐसे बोलते रहते हैं किसान मूकदर्शक बनकर उनके मुँह की तरफ देखता रहता है और मन ही मन अपने इष्ट देव को याद करता हुआ कहता है हे भगवान थोड़ी सी कीमत और बढ़ाओ धीरे-धीरे कीमत बढ़ती है।

फिर 2349 पर जाकर ये सभी लोग चुप हो जाते हैं तब आढ़तिया बोलता है 2349 से ज्यादा कोई लेने वाला है सब चुप रहते हंै फिर आढ़तिया बोलता है एक-दो-तीन और किसान को कहता है आपके गेहूँ रामलाल ने 2349 रुपये क्विंटल के हिसाब से खरीद लिए हंै किसान शांत खड़ा रहता है क्योंकि उसे पैसे की जरूरत है इसीलिए वो अपनी उपज मंडी में लेकर आया है यहां तक लाने का उसका किराया 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल लग जाता है फिर बिचौलिया आढ़त ले लेता है उसके बाद साफ सफाई करने वाले मजदूरों की मजदूरी भी लग जाती है ऐसे करके 150-200 रुपये प्रति क्विं. का खर्चा किसान का हो जाता है।

अपनी फसल स्वयं की कीमतों पर बेचें

अब जरूरत की वजह से बेचने वाला किसान इस फसल को वापस अपने घर भी नहीं ले जा सकता क्योंकि फिर लोडिंग-अनलोडिंग के अलावा किराया भाड़ा काफी लग जाता है इसलिए वो अपनी फसल को एमएसपी से कम दामों पर भी बेच जाता है अब हम पढ़े-लिखे किसान परिवार के बच्चों का दायित्व बनता है कि हम इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जमाने में कुछ ऐसा तरीका ईजाद करें कि कोई हमारी फसल को एक,दो,तीन बोलकर ना खरीद सके कुछ ऐसा किया जाए कि हमारी फसल को हम स्वयं की कीमतों पर बेचें।

किसान अपनी फसल की कीमत क्यों तय नहीं कर सकते

जब माचिस बेचने वाले अपनी माचिस की कीमत स्वयं तय कर सकता है तो हम किसान अपने उत्पाद की कीमत क्यों नहीं तय कर सकते हमे जरूरत है अपने गेहूँ को ट्रॉली में भरकर शहर की गलियों में घूमने की, ऑनलाइन ऑर्डर लेने की, शहर के लोगों के घरों तक सप्लाई करने की ये कार्य आप अकेले नहीं कर सकते इसके लिए जरूरत है आपको एक टीम बनाने की एफपीओ और एसएचजी बनाकर काम करने की क्योंकि जब तक संगठन ईमानदारी से काम नहीं करेगा तब तक आप बाजार में सफल नहीं हो सकते और जब तक आप बाजर जाकर स्वयं अपने उत्पाद को नही बेचेंगे तब तक आपकी आमदनी दुनिया की कोई भी ताकत नहीं बढ़ा सकती इसलिए आपसे आग्रह है प्लीज अपने पढ़े लिखे बच्चों को 10 हजार रुपये की प्राइवेट नौकरी करने मत भेजो उन्हें खेती में ही अपने साथ रखकर खेती के पैटर्न को बदलकर मार्केट में भेजो ऐसा करने से ना केवल आपका परिवार एक साथ रहेगा बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और आपके घरों में खुशहाली आएगी अन्यथा ये एक दो तीन बोलने वाले आपको यूँ ही लूटते रहेंगे और आपको आर्थिक रुप से कमजोर ही रखेंगे इसलिए मार्केटिंग को अपनाओ थोड़ी एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ेगी लेकिन ये मेहनत आपका जीवन संवार देगी यदि आप मेरी इस बात से सहमत है तो प्लीज पोस्ट को शेयर कर दूसरे किसानों को जागरूक करने में मदद करें क्योंकि ये आप नही करेंगे तो हमारे किसान भाई यूँ ही लूटते रहेंगे और एक, दो, तीन बोलने वाले लूटते रहेंगे।

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