आशाओं, उम्मीदों की दीपावली

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आशाओं, उम्मीदों की दीपावली – कोरोना काल के बावजूद दीपावली त्यौहार के चलते इन दिनों बाजार में रौनक बढ़ गई है। किसान अपनी खरीफ उपज मंडियों में ला रहे हैं जिससे अच्छे कारोबार की उम्मीद बढ़ गई है। क्योंकि 70 फीसदी कारोबार ग्रामीण ग्राहकी पर निर्भर है। लॉकडाउन के दौरान कृषि क्षेत्र के सभी कार्य सुचारू रूप से चलते रहे, जिस कारण वर्ष 2019-20 में 296.65 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ और वर्ष 2020-21 खरीफ में 149.35 मिलियन खाद्यान्न उत्पादन होने का अनुमान है तथा रबी के लिए 151.65 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। म.प्र. में गत वर्ष की तुलना में सोयाबीन का उत्पादन ज्यादा होने की उम्मीद के चलते दीपावली पर जोरदार कारोबार होने की आशा है। गत रबी में भी समर्थन मूल्य पर देश में 390 लाख टन गेहूं की खरीदी हुई, इसमें म.प्र. की 129 लाख टन की भागीदारी रही जो प्रदेश को पंजाब-हरियाणा से आगे ले गयी। इस कारण देश एवं प्रदेश के किसान वर्तमान में आर्थिक रूप से सक्षम है तथा दीपावली पर खरीदी भी बढ़ गई है। आटोमोबाईल सेक्टर में किसानों द्वारा ज्यादा खरीददारी की संभावना है।

महत्वपूर्ण खबर : 21 हजार करोड़ के मसाले निर्यात

केन्द्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधारों का सिलसिला जारी है। नए रिफार्म्स से खेती-किसानी की तस्वीर बदलेगी। कृषि संबंधी नए कानूनों से किसानों को उपज कहीं भी-किसी को भी-किसी भी कीमत पर बेचने की आजादी मिल गई है। कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसान उपज का सौदा बुवाई से पहले ही कर सकेंगे। देवास के किसान सरदार दलजीत सिंह भाटिया आईटीसी के साथ कॉन्ट्रेक्ट पर तुलसी खेती कर रहे हैं। नए कानूनों में देश के किसानों, खासकर छोटे-मझौले किसानों, जो 86 प्रतिशत है, उनके हर तरह से संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं। देश में 10 हजार नए एफपीओ बनाने का काम भी किया जा रहा है, जिस पर 5 साल में केंद्र सरकार साढ़े छह हजार करोड़ रुपये से ज्यादा राशि खर्च करने वाली है। वहीं, आत्मनिर्भर भारत अभियान में 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेजों का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से गांव-गांव में निजी निवेश के माध्यम से कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस और अन्य अधोसंरचनाएं विकसित होगी।

समर्थन मूल्य में भी वृद्धि कर सरकार ने किसानों को राहत दी है। इस वर्ष धान 1868, ज्वार 2620 एवं बाजरे का 2150 रुपये क्विंटल मूल्य तय किया गया है तथा खरीदी की जा रही है। म.प्र. में भी 16 नवम्बर से धान की खरीदी की जाएगी। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में किसानों की क्रय शक्ति सदैव मजबूत बनी रहनी चाहिए। कोरोना काल में जब आर्थिक वृद्धि दर के समस्त सूचकांक ऋणात्मक थे, तब कृषि क्षेत्र ने ही अपनी बढ़त कायम रखी थी। इस दर को बनाए रखने और इसको अधिक गति देने के लिए सरकार को और अधिक प्रयास करना होंगे। खरीफ फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और मंडी में मिलने वाले अच्छे भावों से जहां किसानों का उत्साहवर्धन होगा, वहीं ये ऊर्जा बाजार को भी एक सकारात्मक उछाल देगी।

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