कृषि तकनीकी स्टार्टअप्स की एक नई लहर

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  • डॉ. जितेन्द्र सिंह,
    केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री,
    भारत सरकार

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23 जून 2022, नई दिल्ली । कृषि तकनीकी स्टार्टअप्स की एक नई लहर कृषि, भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक स्तंभ है, यहां की 54 प्रतिशत आबादी कृषि पर सीधे निर्भर है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में इसका हिस्सा करीब 19 (21) प्रतिशत है। हालांकि भारत में कृषि की पिछले कुछ वर्षों में सतत प्रगति हुई है लेकिन इस क्षेत्र में युवा, ताजा और अभिनव विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ ज्यादा नहीं किया गया।

कृषि तकनीकी से जुड़े स्टार्टअप्स भारत की अर्थव्यवस्था के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। मोदी सरकार द्वारा भारतीय कृषि के समक्ष उत्पन्न- आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, पुराने पड़ चुके उपकरणों के इस्तेमाल, अनुचित संरचना और किसानों की विभिन्न बाजारों का आकलन करने में अक्षमता- जैसी कठिनाइयों को दूर करने के लिए नीतिगत माहौल प्रदान किए जाने की वजह से पिछले कुछ वर्षों में भारत में कृषि तकनीकी स्टार्टअप्स की एक नई लहर आई है। युवा उद्यमी अब आईटी सेक्टर और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की अपनी नौकरियां छोडक़र अपने खुद के स्टार्टअप स्थापित कर रहे हैं। इन युवा उद्यमियों ने अब इस तथ्य को महसूस करना शुरू कर दिया है कि कृषि में निवेश करना बहुत सुरक्षित और लाभकारी व्यापारों में से एक है।

किफायती समाधान

कृषि तकनीकी से जुड़े स्टार्टअप समूची कृषि मूल्य श्रृंखला के समक्ष उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए अभिनव विचार और किफायती समाधान सुझा रहे हैं। इन स्टार्टअप्स में इतनी सामथ्र्य है कि वे भारतीय कृषि क्षेत्र के परिदृश्य को बदल सकते हैं और अंतत: किसानों की आय में वृद्धि कर सकते हैं। यह स्टार्टअप्स और नवोदित उद्यमी किसानों, कृषि सामग्री के डीलरों, थोक विक्रेताओं, फुटकर विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को एक-दूसरे से जोडक़र उनके लिए सशक्त बाजार संपर्क और समय पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्रदान करने वाली बीच की कडिय़ां बन सकते हैं।

नई तकनीक के उपयोग की आवश्यकता

कृषि क्षेत्र में आधुनिक नवीन प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता है। इजराइल, चीन और अमरीका जैसे देशों ने अपने यहां नई प्रौद्योगिकी की मदद से खेती करने के तरीकों में बड़ा परिवर्तन किया है। इन देशों ने दिखा दिया है कि प्रौद्योगिकी का वर्गीकरण जैसे हाइब्रिड बीज, सटीक खेती (प्रेसीजन फार्मिंग), डाटा के बड़े पैमाने पर विश्लेषण (बिग डाटा एनालिटिक्स), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीओ टैगिंग और सेटेलाइट मॉनीटरिंग, मोबाइल ऐप और कृषि प्रबंधन सॉफ्टवेयर को खेती की पूरी प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर लागू कर उपज और कृषि से होने वाली आय को बढ़ाया जा सकता है।

ड्रोन्स का इस्तेमाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष फरवरी में कृषि क्षेत्र के लिए देश भर में भारत में निर्मित 100 ‘कृषि ड्रोन’ की शुरुआत की। ये ‘कृषि ड्रोन’ अपनी अनूठी उड़ानों से खेती की प्रक्रिया में सहयोग कर सकते हैं। सरकार के बजट भाषण में भी फसल के आकलन, भू-रिकॉर्डों के डिजिटाइजेशन और कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिडक़ाव के लिए ‘किसान ड्रोन्स’ के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। श्री सिंह ने कहा कि ड्रोन्स का इस्तेमाल फसल या अन्य प्रकार के पेड़-पौधों के स्वास्थ्य की जांच के लिए, खरपतवार (चरस), संक्रमण और कीटों आदि से ग्रस्त खेतों की जांच तथा किसी खेत में रसायनिक उर्वरकों की सटीक जरूरतों का पता लगाने और इस तरह किसान की कुल लागत को कम करने के लिए किया जा सकता है। भारतीय कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जबर्दस्त क्षमता है, क्योंकि इससे देश की बहुत बड़ी आबादी जुड़ी हुई है। कृषि तकनीकी और कुछ नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल कर उपज को बढ़ाने, कुशलता लाने और राजस्व में वृद्धि करने का उपाय है। और इससे कृषि प्रक्रिया के सभी आयामों को जोड़ा जा सकता है, चाहे वे कृषि उपयोग में आने वाली वस्तुएं हों या उससे होने वाली उपज।

स्टार्टअप्स दे रहे टिकाऊ समाधान

भारत में बहुत से कृषि तकनीकी स्टार्टअप्स मुख्य रूप से बाजार आधारित हैं, जहां ई-कॉमर्स कंपनियां ताजे और ऑर्गेनिक फल और सब्जियां सीधे किसानों से खरीद कर बिक्री करती हैं लेकिन हाल में बहुत से स्टार्टअप्स ने किसानों की कठिनाइयों के अभिनव और टिकाऊ समाधान प्रदान करने शुरू किए हैं। स्टार्टअप्स अब बायो गैस संयंत्र, सौर ऊर्जा चालित प्रशीतन गृह, बाड़ लगाने और पानी पम्प करने, मौसम का पूर्वानुमान करने, छिडक़ाव करने वाली मशीन, बुआई की मशीन और वर्टिकल फार्मिंग जैसे समाधानों से किसानों को आय बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

हर किसान तक समाधान पहुंचाने की चुनौती

उम्मीद है कि इंटरनेट उपयोग में वृद्धि, स्मार्ट फोन के उपयोग में वृद्धि, स्टार्टअप्स के उभरने और ग्रामीण इलाकों में की जा रही सरकार की विभिन्न पहलों की वजह से कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी को अपनाने की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र के ज्यादातर मसलों के प्रौद्योगिकी आधारित समाधान अभी भी हमारे पास हैं लेकिन चुनौती उन समाधानों को देश के सिर्फ एक किसान तक ही नहीं बल्कि हर किसान तक पहुंचाने की है। अब समय आ गया है जब हमें अपनी अर्थव्यवस्था के हर एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा ताकि कृषि और किसान समुदाय इससे लाभान्वित हों और इसके बूते भारतीय अर्थव्यवस्था भी तेजी से प्रगति करे।

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