फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन किसानों के लिए साप्ताहिक एडवाइजरी: बुवाई से लेकर तना मक्खी नियंत्रण तक जानिए हर जरूरी सलाह

09 जुलाई 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन किसानों के लिए साप्ताहिक एडवाइजरी: बुवाई से लेकर तना मक्खी नियंत्रण तक जानिए हर जरूरी सलाह – खरीफ सीजन में मानसून की सक्रियता के साथ देश के अधिकांश सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में बुवाई का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ इलाकों में किसान अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), इंदौर ने 6 से 12 जुलाई 2026 के लिए साप्ताहिक एडवाइजरी जारी कर किसानों को फसल प्रबंधन से जुड़ी अहम सलाह दी है। संस्थान ने कहा है कि चाहे बुवाई बाकी हो या फसल खेत में निकल चुकी हो, दोनों ही परिस्थितियों में समय पर वैज्ञानिक सलाह अपनाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और कीट-रोगों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

देर से बुवाई करने वाले किसान इन बातों का रखें ध्यान

संस्थान के मुताबिक जिन क्षेत्रों में अब तक सोयाबीन की बुवाई नहीं हुई है, वहां किसान जल्द पकने वाली किस्मों का चयन करें। देर से बुवाई की स्थिति में कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें और बीज दर बढ़ाकर 90 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करें। बुवाई तभी करें, जब क्षेत्र में कम से कम 100 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी हो, ताकि अंकुरण बेहतर हो और फसल की शुरुआती बढ़वार प्रभावित न हो।

वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी है कि एक ही किस्म पर निर्भर रहने के बजाय अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित दो से तीन सोयाबीन किस्मों की खेती करें और कम से कम 70 प्रतिशत अंकुरण क्षमता वाले गुणवत्तापूर्ण बीज का ही उपयोग करें।

बीज उपचार और उर्वरक प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान

फसल को शुरुआती अवस्था में रोगों और कीटों से बचाने के लिए बुवाई से पहले FIR पद्धति से बीज उपचार करने की सलाह दी गई है। इससे फफूंदजनित रोगों के साथ-साथ तना मक्खी और सफेद मक्खी जैसे कीटों से भी सुरक्षा मिलती है।

इसके अलावा किसानों को संतुलित पोषण देने की भी सलाह दी गई है। मध्य क्षेत्र के लिए 25:60:40:20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (N:P:K:S) पोषक तत्वों की अनुशंसित मात्रा दी गई है, जिसे किसान यूरिया, डीएपी, सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP), म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) और बेंटोनाइट सल्फर के विभिन्न संयोजनों से पूरा कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर जिंक सल्फेट और आयरन सल्फेट का भी उपयोग करने की सलाह दी गई है।

खरपतवार नियंत्रण में लापरवाही पड़ सकती है भारी

जिन किसानों की फसल 10 से 15 दिन की हो चुकी है, उन्हें खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय हाथ से निराई-गुड़ाई, डोरा या कुल्पा चलाकर खरपतवार हटाना सबसे बेहतर विकल्प है। यदि खरपतवार अधिक हों तो सोयाबीन के लिए अनुशंसित पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशी का छिड़काव किया जा सकता है।

छिड़काव करते समय नेपसैक स्प्रेयर से 450 से 500 लीटर और पावर स्प्रेयर से 120 से 150 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर उपयोग करने की सलाह दी गई है। बेहतर परिणाम के लिए फ्लड जेट या फ्लैट फैन नोजल का इस्तेमाल करें।

कमजोर अंकुरण होने पर करें गैप फिलिंग

यदि खेत में कहीं पौधे कम निकले हैं या अंकुरण कमजोर रहा है, तो किसान खाली स्थानों पर दोबारा बीज डालकर गैप फिलिंग करें। इससे खेत में पौधों की संख्या संतुलित बनी रहती है और उत्पादन में कमी नहीं आती।

तना मक्खी का खतरा बढ़ा, समय रहते करें नियंत्रण

एडवाइजरी में बताया गया है कि इस समय सोयाबीन की फसल में तना मक्खी (स्टेम फ्लाई) का प्रकोप शुरू होने की संभावना रहती है। इसके लक्षण दिखाई देते ही किसान थायमेथोक्साम 12.60% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.50% ZC का 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। समय पर नियंत्रण करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

गेंदा और सुवा की खेती से भी मिलेगा फायदा

वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जहां संभव हो, खेत के किनारों या बीबीएफ (ब्रॉड बेड एंड फरो) तथा रिज-फरो पद्धति से बनी नालियों में सुवा (डील) या गेंदा (मैरीगोल्ड) की बुवाई करें। ये पौधे हानिकारक कीटों को आकर्षित करते हैं, जिससे उनका प्रकोप मुख्य फसल पर कम होता है और कीट प्रबंधन में मदद मिलती है।

विपरीत मौसम से बचाने के लिए अपनाएं आधुनिक तकनीक

संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि सूखा या जलभराव जैसी परिस्थितियों से फसल को बचाने के लिए बीबीएफ (Broad Bed Furrow), रिज-फरो या रेज्ड बेड पद्धति से बुवाई करें। यह तकनीक जल निकासी और नमी संरक्षण दोनों में मददगार साबित होती है।

वैज्ञानिकों की अपील

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने किसानों से मौसम की स्थिति को देखते हुए वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की है। संस्थान का कहना है कि समय पर बुवाई, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक, खरपतवार नियंत्रण और शुरुआती अवस्था में कीट प्रबंधन जैसे उपाय अपनाकर किसान सोयाबीन की फसल को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global A