फसल की खेती (Crop Cultivation)

गन्ने में 300:100:150 NPK डोज: 100 टन से अधिक उत्पादन के लिए कितनी यूरिया, DAP और पोटाश डालें?

19 जून 2026, नई दिल्ली: गन्ने में 300:100:150 NPK डोज: 100 टन से अधिक उत्पादन के लिए कितनी यूरिया, DAP और पोटाश डालें? – भारत दुनिया के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन के मामले में अभी भी सुधार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। अधिकांश किसान बेहतर किस्मों और सिंचाई सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन गन्ने की वास्तविक उत्पादकता का आधार पोषण प्रबंधन होता है। गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है जो लगभग 10 से 12 महीने तक खेत में रहती है और इस दौरान मिट्टी से भारी मात्रा में पोषक तत्वों का अवशोषण करती है। यही कारण है कि कृषि वैज्ञानिक इसे सबसे अधिक पोषण मांग वाली फसलों में गिनते हैं।

कई क्षेत्रों में किसान गन्ने की खेती को केवल यूरिया आधारित पोषण पर चलाने का प्रयास करते हैं। इससे प्रारंभिक वृद्धि तो अच्छी दिखाई देती है, लेकिन बाद में तनों की मोटाई, लंबाई, वजन और शर्करा संचय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गन्ने में संतुलित नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उपलब्धता ही उच्च उत्पादन और बेहतर रिकवरी का आधार बनती है।

गन्ने के लिए अनुशंसित उर्वरक मात्रा

पोषक तत्वमात्रा (किग्रा/हेक्टेयर)
नाइट्रोजन (N)200-300
फास्फोरस (P₂O₅)60-100
पोटाश (K₂O)100-150

सामान्य उर्वरक स्रोत

उर्वरकमुख्य पोषक तत्व
यूरियानाइट्रोजन
DAPनाइट्रोजन + फास्फोरस
MOPपोटाश

गन्ने की फसल में नाइट्रोजन प्रारंभिक वृद्धि, कल्ले बनने और जैव द्रव्यमान उत्पादन को प्रभावित करती है। लेकिन यदि पूरी नाइट्रोजन एक साथ दे दी जाए तो उसका बड़ा हिस्सा पौधों द्वारा उपयोग किए जाने से पहले ही नष्ट हो सकता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे कई खुराकों में देने की सलाह देते हैं।

फास्फोरस गन्ने की जड़ों को मजबूत बनाता है और शुरुआती वृद्धि को गति देता है। वहीं पोटाश इस फसल का सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है क्योंकि यह तनों में शर्करा संचय, जल प्रबंधन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। जिन खेतों में पोटाश की कमी होती है वहां उत्पादन के साथ-साथ रिकवरी प्रतिशत भी प्रभावित हो सकता है।

देश के कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में जैविक कार्बन का स्तर लगातार घट रहा है। ऐसे में गोबर खाद, प्रेसमड, कम्पोस्ट और हरी खाद का उपयोग उर्वरक दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आधुनिक गन्ना खेती में केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता के बजाय समन्वित पोषण प्रबंधन को अधिक प्रभावी माना जा रहा है।

गन्ना उद्योग की बढ़ती मांग और इथेनॉल कार्यक्रम के विस्तार के बीच प्रति इकाई क्षेत्र अधिक उत्पादन प्राप्त करना राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन किसानों की आय बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन साबित हो सकता है।

एक बोरी खाद में कितना नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश होता है? किसानों के लिए उपयोगी गणना तालिका

मानक गणना (50 किलोग्राम की एक बोरी के आधार पर)

उर्वरकग्रेड (N:P)50 किग्रा की एक बोरी में नाइट्रोजन (N)फास्फोरस (P₂O₅)पोटाश (K₂O)अन्य पोषक तत्व
यूरिया46-0-023.0 किग्रा00
DAP18-46-09.0 किग्रा23.0 किग्रा0
MAP11-52-05.5 किग्रा26.0 किग्रा0
SSP0-16-008.0 किग्रा0सल्फर लगभग 6 किग्रा
TSP0-46-0023.0 किग्रा0
MOP0-0-600030.0 किग्रा
SOP0-0-500025.0 किग्रासल्फर लगभग 8.5 किग्रा
CAN26-0-013.0 किग्रा00कैल्शियम
अमोनियम सल्फेट21-0-010.5 किग्रा00सल्फर लगभग 12 किग्रा
पोटेशियम नाइट्रेट13-0-456.5 किग्रा022.5 किग्रा
19:19:1919-19-199.5 किग्रा9.5 किग्रा9.5 किग्रा
20:20:2020-20-2010.0 किग्रा10.0 किग्रा10.0 किग्रा
10:26:2610-26-265.0 किग्रा13.0 किग्रा13.0 किग्रा
12:32:1612-32-166.0 किग्रा16.0 किग्रा8.0 किग्रा

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