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फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की नर्सरी में तना छेदक की रोकथाम के लिए समय पर निगरानी और नियंत्रण जरूरी

30 जुलाई 2026, नई दिल्ली: धान की नर्सरी में तना छेदक की रोकथाम के लिए समय पर निगरानी और नियंत्रण जरूरी – धान की नर्सरी में तना छेदक (स्टेम बोरर) एक प्रमुख कीट है, जो समय पर नियंत्रण नहीं होने पर मुख्य फसल में गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए नर्सरी स्तर पर ही इसकी निगरानी और आवश्यकता अनुसार नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है। समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) के तहत फेरोमोन ट्रैप और अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग इस कीट के प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

तना छेदक की सूंडियां पौधों के तने के अंदर प्रवेश कर मध्य भाग को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे पौधों में ‘डेड हार्ट’ (मध्य कोंपल का सूख जाना) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि नर्सरी में ही इसका प्रबंधन कर लिया जाए, तो मुख्य खेत में संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है।

नर्सरी में लगाएं स्किरपोल्योर फेरोमोन ट्रैप

जिन क्षेत्रों में तना छेदक के प्रकोप की संभावना हो, वहां स्किरपोल्योर (Scirpolure) फेरोमोन ट्रैप लगाना चाहिए। प्रत्येक 200 वर्ग मीटर नर्सरी में कम से कम तीन फेरोमोन ट्रैप लगाने की सिफारिश की जाती है। ये ट्रैप नर पतंगों को आकर्षित कर उनकी संख्या का आकलन करने में मदद करते हैं, जिससे समय पर नियंत्रण का निर्णय लिया जा सकता है।

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फेरोमोन ट्रैप का नियमित निरीक्षण करें। यदि प्रति ट्रैप 4 से 5 नर पतंगे मिलने लगें, तो इसे आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level) माना जाता है और तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए।

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अनुशंसित नियंत्रण उपाय

जब प्रति ट्रैप 4–5 नर पतंगे मिलने लगें, तब निम्न में से किसी एक उपाय को अपनाएं—

  • अजादिरैक्टिन 0.15% (नीम बीज गिरी आधारित ईसी फॉर्मूलेशन) का 800 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 4% जीआर का 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से भुरकाव करें।
  • कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी का 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 1:1 अनुपात में रेत मिलाकर समान रूप से बिखेरें।
  • अथवा क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी का 60 मिली प्रति एकड़ की मात्रा 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

एक समय में केवल एक ही अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग करें तथा लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।

नियमित निगरानी से होगा बेहतर बचाव

फेरोमोन ट्रैप के उपयोग से न केवल तना छेदक की समय पर पहचान होती है, बल्कि अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव से भी बचा जा सकता है। नियमित निगरानी और आर्थिक क्षति स्तर पर ही नियंत्रण उपाय अपनाने से नर्सरी स्वस्थ रहती है, मुख्य खेत में कीट का प्रसार कम होता है और धान की बेहतर उपज सुनिश्चित होती है।

समय पर निगरानी और वैज्ञानिक तरीके से किए गए नियंत्रण उपाय धान की फसल को तना छेदक से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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