फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की ये 5 उन्नत किस्में बदल सकती हैं किसानों की किस्मत, कम समय में देंगी ज्यादा पैदावार

19 मई 2026, नई दिल्ली: धान की ये 5 उन्नत किस्में बदल सकती हैं किसानों की किस्मत, कम समय में देंगी ज्यादा पैदावार – देशभर में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो गई है और किसान धान की खेती के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं। धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में शामिल है, इसलिए हर किसान चाहता है कि उसकी फसल कम समय में तैयार हो, लागत कम आए और उत्पादन ज्यादा मिले। बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत को देखते हुए अब किसान पारंपरिक बीजों की जगह उन्नत और ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्मों को अपनाने लगे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही बीज का चुनाव खेती की सफलता में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। यदि किसान अपनी जमीन और मौसम के अनुसार उन्नत किस्मों का चयन करें, तो कम मेहनत और कम लागत में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। आज देश के कई राज्यों में धान की कुछ ऐसी किस्में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, जो जल्दी तैयार होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं।

CSR-10: खारे पानी और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प

CSR-10 धान की ऐसी उन्नत किस्म है, जिसे विशेष रूप से खारी जमीन और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। कई बार खेतों में अधिक नमक या लंबे समय तक पानी भरने के कारण फसल खराब हो जाती है, लेकिन यह किस्म ऐसी परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देती है।

यह किस्म लगभग 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी औसत पैदावार 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मानी जाती है। इसके दाने सफेद, चमकदार और छोटे होते हैं, जिससे बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं।

NDR-359: जल्दी पकने वाली और रोग प्रतिरोधक किस्म

NDR-359 धान की सबसे लोकप्रिय किस्मों में गिनी जाती है। यह जल्दी पकने वाली फसल है और लगभग 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। यही वजह है कि किसान इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि जल्दी कटाई होने से अगली फसल की तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है।

इस किस्म की पैदावार करीब 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसके पौधे ज्यादा लंबे नहीं होते, जिससे तेज हवा और बारिश में गिरने का खतरा कम रहता है। यह किस्म कई प्रकार की बीमारियों और कीटों के प्रति सहनशील मानी जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है।

अनामिका: स्वाद और बाजार मूल्य दोनों में शानदार

पूर्वी भारत के कई राज्यों में अनामिका धान की काफी मांग है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के किसान इस किस्म को बड़े पैमाने पर उगा रहे हैं। यह किस्म लगभग 130 से 135 दिनों में तैयार होती है और 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है।

इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं तथा पकने के बाद चावल का स्वाद काफी अच्छा माना जाता है। हल्का चिपचिपा होने के कारण यह उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय है। बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।

WGL-32100: ज्यादा उत्पादन देने वाली उन्नत किस्म

WGL-32100 धान की एक आधुनिक और हाई-यील्डिंग किस्म है। यह लगभग 125 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी पैदावार 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है।

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत पौध संरचना है। पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं होते, इसलिए बारिश और तेज हवा में गिरने की संभावना कम रहती है। इसके छोटे और पतले दानों को बाजार में अच्छी गुणवत्ता के कारण पसंद किया जाता है। यही वजह है कि यह किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

IR-36: कम पानी में भी बेहतर उत्पादन

IR-36 धान की पुरानी लेकिन भरोसेमंद किस्मों में शामिल है। यह खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां बारिश कम होती है या सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होती।

यह किस्म लगभग 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सूखे की स्थिति को काफी हद तक सहन कर सकती है। साथ ही कई कीटों और बीमारियों के प्रति भी इसमें अच्छी प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है।

सही बीज के चुनाव से बढ़ेगा मुनाफा

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण अब ऐसी किस्मों की जरूरत बढ़ गई है, जो कम समय में तैयार हों और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन दें। उन्नत बीजों का उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है और किसानों को बाजार में बेहतर दाम भी मिलते हैं।

विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे खेती शुरू करने से पहले अपनी जमीन की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता और स्थानीय जलवायु को ध्यान में रखकर बीजों का चयन करें। साथ ही प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करें और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार वैज्ञानिक खेती अपनाएं।

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