फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन में 20:80:60 NPK डोज: DAP, SSP और पोटाश की सही मात्रा से बढ़ सकता है उत्पादन और तेल प्रतिशत

19 जून 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन में 20:80:60 NPK डोज: DAP, SSP और पोटाश की सही मात्रा से बढ़ सकता है उत्पादन और तेल प्रतिशत – मध्य भारत में खरीफ सीजन शुरू होते ही सोयाबीन किसानों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस विषय पर होती है, वह है बुवाई के समय कौन सी खाद डाली जाए। कुछ किसान डीएपी को सबसे बेहतर मानते हैं, जबकि कई कृषि वैज्ञानिक एसएसपी के उपयोग की सलाह देते हैं। यही भ्रम हर वर्ष किसानों के सामने खड़ा होता है। दिलचस्प बात यह है कि सोयाबीन उन फसलों में शामिल है जिनकी पोषण आवश्यकता धान, मक्का या गन्ने जैसी फसलों से पूरी तरह अलग है।

सोयाबीन एक दलहनी फसल है और इसकी जड़ों में राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि इसे बहुत अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सोयाबीन बिना उर्वरक के अच्छी उपज दे सकती है। वास्तव में फास्फोरस, पोटाश और सल्फर इस फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता निर्धारित करने वाले प्रमुख तत्व हैं।

सोयाबीन के लिए अनुशंसित उर्वरक मात्रा

पोषक तत्वमात्रा (किग्रा/हेक्टेयर)
नाइट्रोजन (N)20-40
फास्फोरस (P₂O₅)60-80
पोटाश (K₂O)40-60

सामान्य उर्वरक स्रोत

उर्वरकमुख्य पोषक तत्व
DAPनाइट्रोजन + फास्फोरस
SSPफास्फोरस + सल्फर
MOPपोटाश

सोयाबीन में फास्फोरस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह जड़ विकास, गांठ निर्माण और प्रारंभिक वृद्धि को प्रभावित करता है। यदि शुरुआती अवस्था में फास्फोरस की कमी हो जाए तो पौधे कमजोर रह जाते हैं और राइजोबियम की गतिविधि भी प्रभावित होती है। यही कारण है कि सोयाबीन में फास्फोरस की अनुशंसित मात्रा कई अन्य फसलों की तुलना में अधिक होती है।

पिछले कुछ वर्षों में सल्फर की कमी सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ी है। सल्फर तेल निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिन खेतों में सल्फर की कमी होती है वहां दानों का तेल प्रतिशत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि कई कृषि वैज्ञानिक सोयाबीन में एसएसपी को डीएपी की तुलना में अधिक उपयोगी मानते हैं, क्योंकि यह फास्फोरस के साथ सल्फर भी उपलब्ध कराता है।

सोयाबीन की खेती में जैव उर्वरकों का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। राइजोबियम और पीएसबी (फास्फोरस घुलनशील जीवाणु) के उपयोग से पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और उर्वरकों की उपयोग दक्षता में सुधार होता है।

आज जब सोयाबीन की खेती केवल उत्पादन नहीं बल्कि तेल गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई है, तब संतुलित पोषण प्रबंधन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।

एक बोरी खाद में कितना नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश होता है? किसानों के लिए उपयोगी गणना तालिका

मानक गणना (50 किलोग्राम की एक बोरी के आधार पर)

उर्वरकग्रेड (N:P)50 किग्रा की एक बोरी में नाइट्रोजन (N)फास्फोरस (P₂O₅)पोटाश (K₂O)अन्य पोषक तत्व
यूरिया46-0-023.0 किग्रा00
DAP18-46-09.0 किग्रा23.0 किग्रा0
MAP11-52-05.5 किग्रा26.0 किग्रा0
SSP0-16-008.0 किग्रा0सल्फर लगभग 6 किग्रा
TSP0-46-0023.0 किग्रा0
MOP0-0-600030.0 किग्रा
SOP0-0-500025.0 किग्रासल्फर लगभग 8.5 किग्रा
CAN26-0-013.0 किग्रा00कैल्शियम
अमोनियम सल्फेट21-0-010.5 किग्रा00सल्फर लगभग 12 किग्रा
पोटेशियम नाइट्रेट13-0-456.5 किग्रा022.5 किग्रा
19:19:1919-19-199.5 किग्रा9.5 किग्रा9.5 किग्रा
20:20:2020-20-2010.0 किग्रा10.0 किग्रा10.0 किग्रा
10:26:2610-26-265.0 किग्रा13.0 किग्रा13.0 किग्रा
12:32:1612-32-166.0 किग्रा16.0 किग्रा8.0 किग्रा

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