फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन 2026: बुवाई से पहले ये 8 जरूरी काम, वरना पछताएंगे!

20 मई 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन 2026: बुवाई से पहले ये 8 जरूरी काम, वरना पछताएंगे! – खरीफ सीजन दस्तक दे रहा है — और अगर आप मध्य भारत के सोयाबीन किसान हैं, तो अभी से तैयारी शुरू करना ही समझदारी है। राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र (NRCS), इंदौर ने इस बार किसानों के लिए बुवाई से पहले की 8 अहम सलाह जारी की हैं — जो पैदावार को सीधे प्रभावित करती हैं।

1. गेहूं के अवशेष जलाएं नहीं — मिट्टी को जिंदा रखें

गेहूं की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को आग लगाना आम बात है, लेकिन यह मिट्टी के लिए घातक है। इसके बजाय रोटावेटर और वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग करें। इससे मिट्टी में कार्बनिक कार्बन बढ़ता है और लाभकारी सूक्ष्मजीव जीवित रहते हैं — जो सोयाबीन की जड़ों के लिए बेहद जरूरी हैं।

2. गहरी गर्मी की जुताई — हर साल नहीं, 3 साल में एक बार

Deep Summer Ploughing (गहरी ग्रीष्मकालीन जुताई) करना फायदेमंद है, लेकिन हर साल करने से नुकसान हो सकता है। NRCS की सलाह है कि इसे 3 साल में केवल एक बार करें — इससे उत्पादन स्थिर रहता है और खर्च भी बचता है।

3. एक ही किस्म पर निर्भर न रहें — 2-3 किस्में बोएं

सिर्फ एक किस्म की सोयाबीन बोने से रोग, सूखा या बाढ़ के वक्त पूरी फसल खतरे में आ सकती है। 2 से 3 अलग-अलग किस्मों की खेती करने से जोखिम बंट जाता है और कुल पैदावार अधिक स्थिर रहती है।

4. खेत की तैयारी का सही तरीका
  • यदि इस साल गहरी जुताई कर रहे हैं: गहरी जुताई → आड़ी-तिरछी जुताई (Criss-cross harrowing) → पाटा (Planking)
  • यदि पिछले 3 साल में गहरी जुताई हो चुकी है: दो बार आड़ी-तिरछी जुताई + पाटा ही पर्याप्त है।

सही क्रम से तैयार खेत में बीज का अंकुरण बेहतर होता है और नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है।

5. गोबर खाद या पोल्ट्री खाद — अंतिम जुताई से पहले डालें

अंतिम जुताई से पहले खेत में डालें:

  • अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद (FYM): 5-10 टन प्रति हेक्टेयर
  • या पोल्ट्री मैन्योर: 2.5 टन प्रति हेक्टेयर

यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है।

6. हरी खाद से मिट्टी को दें नई ताकत — ढैंचा बोएं

सिंचाई उपलब्ध हो तो ढैंचा (Dhaincha) के बीज 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बोएं। बुवाई के 45-50 दिन बाद इसे मिट्टी में पलट दें। यह एक प्राकृतिक नाइट्रोजन स्रोत है जो सोयाबीन को भरपूर पोषण देता है।

7. सब-सॉयलर मशीन — सूखे से बचाव का देसी जुगाड़

हर 5 साल में एक बार, खेत में 10 मीटर के अंतराल पर सब-सॉयलर (Sub-soiler) मशीन चलाएं। यह मिट्टी की सख्त परत (Hard Pan) तोड़ती है, जिससे बारिश का पानी अंदर तक जाता है और सूखे के दिनों में नमी बनी रहती है।

8. मई में करें बीज उपचार — रोग और कीट दोनों से सुरक्षा

बुवाई से पहले बीजों को उपचारित करना सबसे सस्ता बीमा है। NRCS की सिफारिश: Azoxystrobin 2.5% + Thiophanate Methyl 11.25% + Thiamethoxam 25% FS मात्रा: 10 मिली प्रति किलोग्राम बीज

यह मिश्रण बीज जनित रोगों और शुरुआती कीट-प्रकोप दोनों से सुरक्षा करता है।

संक्षेप में — बुवाई से पहले की चेकलिस्ट

कामकब करें
अवशेष न जलाएं, रोटावेटर चलाएंकटाई के तुरंत बाद
गहरी जुताई (3 साल में एक बार)अप्रैल–मई
गोबर/पोल्ट्री खाद डालेंअंतिम जुताई से पहले
ढैंचा हरी खाद बोएंमई
बीज उपचार करेंबुवाई से 1-2 दिन पहले
सब-सॉयलर (5 साल में एक बार)गर्मी की जुताई के साथ

स्रोत: राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र (NRCS), इंदौर

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