फसल की खेती (Crop Cultivation)

पौधों के संतुलित पोषण के लिए मिट्टी परीक्षण आवश्यक

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  • आनंद राव आजाद (सहायक प्राध्यापक)
  • डॉ. दीपक खेर (डीन), स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर, सेज यूनिवर्सिटी, भोपाल

 

13 फरवरी 2023,  पौधों के संतुलित पोषण के लिए मिट्टी परीक्षण आवश्यक – हमारा देश ‘कृषि प्रधान देश’ कहा जाता है पर यह अतिश्योक्ति नहीं होगी यदि मैं कहूॅं कि हमारा देश ‘कृषक प्रधान देश है’ क्योंकि हमारे यहॉं लगभग 78 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और इनकी जीवन यापन एवं अन्य आवश्यकतों की पूर्ति के लिए इनको कृषि एवं इससे सम्बन्धित संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। अत: कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए हम सब को विशेष ध्यान देना होगा। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषकों के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती है देश की निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए घटती हुई प्रति व्यक्ति कृषि योग्य भूमि से खाद्यान्न, दलहन, तेल एवं अन्य भोज्य पदार्थो का उत्पादन इस स्तर तक बढ़ाना ताकि प्रत्येक व्यक्ति को दो जून की रोटी नसीब होती रहे। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि पर्यावरण प्रदूषित न हो और भूमि एवं भू-जल भी स्वस्थ बना रहे। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादन लागत कम करने के भी प्रयास करने होंगे। इस संदर्भ में रसायनों का सीमित एवं आवश्यकतानुसार उपयोग के साथ-साथ जैविक खेती के अपार विकल्पों में से चतुराई से चुनकर उन घटकों का समन्वित उपयोग करना होगा जो अधिक आसान एवं लाभप्रद है।

कृषि को और अधिक लाभप्रद बनाने के लिए जमीन को इसकी क्षमता के अनुरूप उपयोग करना, पारम्परिक फसलों को उगाने के साथ-साथ सीमित रकबे में अधिक आय देने वाली फसलों को उगाना, कृषि में विविधीकरण, पशुपालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन, मसाले वाली फसलों का उत्पादन, औषधीय एवं सुगन्धित फसलों की खेती, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर अधिक लाभ कमाना, आदि के ऊपर गंभीरता से ध्यान देना होगा। कृषि से अधिक उत्पादन, अधिक उत्पादकता एवं अधिक आय के लिये प्रमुख बिंदु है, भूमि की क्षमता के अनुरूप फसल एवं फसल पद्धति का चयन, उन्नत जातियों का चयन, बीज उपचार, संतुलित पौध पोषण, पौध संरक्षण एवं कृषि उत्पाद का मूल्य संवर्धन आदि। अधिक उत्पादन के लिये पौधों को संतुलित पोषण आवश्यक है जिसका आधार मृदा परीक्षण है।

मृदा परीक्षण क्यों और कैसे ?

फसलों की उपज भूमि में उपस्थित पौधों के पोषक तत्वों पर निर्भर करती है। ये आवश्यक तत्व मृदा में पौधों की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उपस्थित रहना चाहिये। मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश अधिक मात्रा में आवश्यक होते हैं इसके अतिरिक्त मृदा की अम्लीयता व क्षारीयता भी पौधों पर प्रभाव डालती है। जिसकी माप पीएच पैमाने से की जाती है। मृदा में उपस्थित धुलनशील लवणों की मात्रा का भी पौधों की वृद्धि पर असर पड़ता है। यदि आवश्यक तत्व पौधों की आवश्यकता के अनुसार मृदा में उपलब्ध न हों तथा पीएच एवं घुलनशील लवणों की मात्रा अनुकूल न हो तो पौधों की बाढ़ बहुत कम हो जाती है और फसलों की उपज भी कम हो जाती है। अत: यह जानने के लिये कि मृदा का पीएच मान क्या है मृदा परीक्षण कराना आवश्यक हो जाता है। उर्वरकों की निरंतर मूल्य वृद्धि तथा भूमि में दिये गये उर्वरकों की उपयोग क्षमता में कमी को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि मृदा परीक्षण के उपरांत ही फसल की आवश्यकतानुसार ही उर्वरकों का प्रयोग किया जाय।

मिट्टी परीक्षण के उद्ेश्य- अपने कृषि क्षेत्र की मृदा परीक्षण करवा कर हमें निम्न सूचना प्राप्त होती है।

  •  मृदा की उर्वरा शक्ति के साथ ही आवश्यक उपलब्ध तत्वों की मात्रा ज्ञात होती है।
  • मृदा गुणों के मान से अधिकतम उत्पादन के लिए उर्वरक एवं खाद की फसल विशेष के लिये अनश्ुांसा।
  • समस्या ग्रस्त मृदा की जानकारी एवं उपचार।
  • मृदा गुणों के आधार पर कृषि उत्पादन एवं अन्य उपयोगी योजनाओं का क्रियान्वन।
  • मिट्टी परीक्षण के अनुसार दीर्घकालीन भूमि उपयोग कर भूमि के स्वास्थ्य में सुधार करना।
मिट्टी का नमूना लेने के प्रयोजन

मिट्टी नमूना लेने के पहिले आप को यह जान लेना चाहिए कि आप किस प्रयोजन से मिट्टी नमूना ले रहे है। उर्वराशक्ति अथवा फसल के लिए खाद की मात्रा को अनुशंसा के लिए 0-15 सें.मी. सतह से 500 ग्रा. प्रतिनिधित्व नमूना लेें। बाग या पेड़ लगाने के लिय भूमि में 2 मीटर तक गहराई तक प्रोफाईल खोदकर मृदा सर्वेक्षण विशेषज्ञ की सलाह से मृदा के विभिन्न स्तरों के नमूने लीजिए। ऊसर सा खारचा भूमि के सुधार के लिये या तो मृदा सर्वेक्षण विशेषज्ञ की सहायता लें या बरमे की मदद से कम से कम 1 मीटर तक 15-20 से.मी. के अंतराल से लगभग एक किलो प्रतिनिधित्व नमूना एकत्रित करें।

मिट्टी का नमूना लेने की विधि
  • खेत को मिट्टी के रंग, प्रकार एवं प्राकृतिक ढलान एवं गहराई के आधार पर विभाजित कर लें।
  • पिछली-फसल की कटाई के ठीक बाद या अगली फसल के पहले खेत की मिट्टी का नमूना लें।
  • मिट्टी की ऊपरी सतह से कार्बनिक पदार्थ जैसे लकड़ी की टहनियां, सूखी पत्तियां आदि हटाकर लगभग 20 से.मी. लंबा और चौड़ा एवं 15 से.मी. गहरा आकार का गड्ढे के अंदर की मिट्टी बाहर कर सामने के तल से खुरपी द्वारा भूमि सतह के ऊपर से 15 से.मी. चौड़ी मिट्टी की तह काट लें और इसे एक तगारी में एकत्रित करें।
  • बरमे की मदद से सीधे 15 से.मी. गहराई का नमूना निकालें ओर तगारी में एकत्रित करें।
  • एक खेत में से 8 से 10 स्थानों से नमूना एकत्रित करें और सभी नमूने एक ही तगारी में एकत्रित करें।
  • किसी पुराने अखबार पर या साफ  कपड़े पर इन सभी स्थानों से एकत्रित नमूने को अच्छी तरह मिलाकर चार भागों में विभाजित कर लें।
  • इन चारों भाग से चर्तुफल पद्धति द्वारा दो हिस्से रखें एवं दो अलग कर लें।
  • उक्त क्रिया तब तक दोहरायें जब तक लगभग 1 किलोग्राम नमूना रह जाये।
  • इस प्रकार प्राप्त नमूने की जानकारी बना कर नमूने के साथ रखकर छाया में सुखायें।
  • पॉलीथिन की थैली में नमूने से संबंधित सूचना पत्र के साथ सूखी मिट्टी का नमूना रखें और थैली को ठीक तरीके से बांधकर एक कपड़े की थैली में रखकर निकटतम मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को या कृषि विभाग के अधिकारियों को दें।
मिट्टी का नमूना कैसे लिया जाय

मिट्टी के परीक्षण के लिये आधा किलो मिट्टी का नमूना एक पूरे खेत का प्रतिनिधित्व करता है। अत: यह आवश्यक हो जाता है कि नमूना सही रूप में लिया जाये। मिट्टी का नमूना लेने के लिये वैसे तो मिट्टी निकालने की नली या बरमा का प्रयोग करें। परन्तु इनकी उपलब्धि किसानों के पास न होने के कारण किसान खुरपी या गेंती को काम में ला सकते हैं। खेत से मिट्टी निकालकर रखने के लिये साफ  तसला तथा नमूना परीक्षण के लिये कपड़े की थैलियांं हों। खेत का मिला जुला नमूना लें। यदि एक खेत की फसल की बाढ़ में असमानता हो, मिट्टी के रंग में विभिन्नता हो तथा ढाल ऊंचा नीचा हो तो खेत को विभिन्न भागों में बॉंट कर अलग-अलग भाग का नमूना अलग-अलग लें। धान, गेहूं ज्वार चना आदि फसलों के लिये 6 से 9 इंच तक की गहराई से नमूना लें। मक्का, कपास, अरहर एवं गन्ना आदि फसलों के लिये एक से डेढ़ फीट तक की गहराई से नमूना लें। क्योंकि इनकी जड़ें गहरे में रहती है। बगीचों से मिट्टी का परीक्षण कराने के लिये 3.5 3 2.5 फुट गहरा गड्ढ़ा खोदकर, गड्ढे की एक तरफ  की दीवार साफ  करके, विभिन्न परतों की मिट्टी अलग-अलग थैलियों में भरें एवं साथ में अन्य सूचना भी रखें।

एक समान क्षेत्र से मिला जुला नमूना लेने के लिये खेत के क्षेत्रफल के अनुसार 5 से 15 विभिन्न स्थानों से थोड़ा-थोड़ा नमूना लेकर तसले में रख लेें। इसमें से घांस, फूस, कंकड़, पत्थर साफ कर लें।  अब मिट्टी को खूब अच्छी तरह मिलाकर नमूनों का ढेर बनाकर चार भागों में बांटकर दो भागों को ले लेना चाहिये तथा दो भागों को अलग कर दें। इस मिट्टी को हटा-हटा कर इतना कम करेेंं कि आधा किलो मिट्टी रह जाय। यदि मिट्टी में नमी हो तो मिट्टी को सुखाकर कपड़े की थैली में भर दें। मिट्टी भरने के बाद उसमें सूचनापत्र रखकर थैली का मुंह बांधकर उसे पास की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में भेज देंं। यदि मृदा का पी.एच. मान 6.0 से कम है तो भूमि अम्लीय है, 6.0से 8.5 बीच में है तो साधारण और यदि 8.5 से अधिक है तो भूमि की क्षारीय बनने की संभावना है। और यदि पी.एच. 9.0 से अधिक है तो भूमि क्षारीय मानी जाती हैं।

मिट्टी का नमूना लेने के लिए आवश्यक सामग्री
  •  मिट्टी खोदने के औजार जैसे गेती, फाबड़ा, खुरपी या मिट्टी के नमूने अधिक गहराई तक लेने के लिए बरमा।
  • नमूना एकत्रित करने के लिए तगारी।
  • नमूना सुखाने के लिए साफ  कपड़ा या पुराने अखबार।
  • नमूना रखने के लिए साफ  पॉलीथिन थैली (500 ग्राम क्षमता)।
  • मिट्टी का नमूना रखने के लिए साफ  कपड़े की थैली लें। खाद की थैली में नमूना न रखें।

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