फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की फसल में थ्रिप्स, ब्लास्ट और तना छेदक का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

31 जुलाई 2026, नई दिल्ली: धान की फसल में थ्रिप्स, ब्लास्ट और तना छेदक का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI), कटक ने “कृषि परामर्श सेवा: जुलाई 2026 के दूसरे पखवाड़े के लिए कृषि सलाह” में धान की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन को लेकर किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। संस्थान ने थ्रिप्स, ग्रीन लीफ हॉपर, तना छेदक, लीफ ब्लास्ट, बकाने और ब्राउन स्पॉट जैसे कीट एवं रोगों की समय पर निगरानी और अनुशंसित उपाय अपनाने की सलाह दी है।

थ्रिप्स और ग्रीन लीफ हॉपर से ऐसे करें बचाव

आईसीएआर के अनुसार, धान की फसल में थ्रिप्स के प्रबंधन के लिए बीजों का उपचार थायमेथोक्साम 70% WS से किया जा सकता है। यदि फसल में थ्रिप्स का प्रकोप दिखाई दे तो अजादिरैक्टिन 0.15% नीम बीज आधारित ईसी, लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 5% EC या थायमेथोक्साम 25% WG का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं, ग्रीन लीफ हॉपर (GLH) की संख्या आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर अजादिरैक्टिन 5%, इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL, थायमेथोक्साम 25% WG, एसीफेट 75% SP या फिप्रोनिल 0.3% GR का उपयोग किया जा सकता है।

तना छेदक से ऐसे करें बचाव

एडवाइजरी में कहा गया है कि तना छेदक (स्टेम बोरर) की निगरानी के लिए खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाए जाएं। यदि ट्रैप में नर पतंगों की संख्या बढ़ती है तो अजादिरैक्टिन, क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल, कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड या अन्य अनुशंसित कीटनाशियों का उपयोग किया जा सकता है।

रोग प्रबंधन के तहत आईसीएआर ने सलाह दी है कि सीडलिंग ब्लाइट दिखाई देने पर प्रोपिकोनाजोल 25 EC का प्रयोग करें। लीफ ब्लास्ट की स्थिति में टेबुकोनाजोल + ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन या आइसोप्रोथिओलेन 40 EC का छिड़काव करें और आवश्यकता पड़ने पर 7 से 10 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें। वहीं बकाने (Bakanae) रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब से उपचार करने तथा ब्राउन स्पॉट रोग की स्थिति में प्रोपिकोनाजोल, मैनकोजेब या कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब के उपयोग की सिफारिश की गई है।

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